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₹25,000 करोड़ की मेगा परियोजना: पहली स्वदेशी कोयला गैसीकरण डील से बदलेगी ऊर्जा तस्वीर
कोयला मंत्रालय ने ऊर्जा उत्पादों के आयात को कम करने के लिए सात कोयला परियोजनाओं के लिए ₹64,000 करोड़ मंजूर किए हैं, जिसमें लखनपुर परियोजना भी शामिल है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहली स्वदेशी कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए जमीन पट्टे पर समझौता किया है. यह परियोजना आयात पर निर्भरता घटाने और देश में ऊर्जा उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. भारत कोल गैसिफिकेशन एंड कैमिकल लिमिटेड (BCGCL) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के बीच समझौता हुआ है. परियोजना ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में स्थापित की जाएगी. इसके तहत कोयले से अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन होगा, जो प्रमुख औद्योगिक रसायन है और उर्वरक एवं खनन उद्योग में व्यापक उपयोग होता है.
परियोजना की क्षमता और निवेश
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना की क्षमता 2,000 टन प्रतिदिन (TPD) है. अनुमानित निवेश करीब ₹25,000 करोड़ रखा गया है. इसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) की स्वदेशी कोयला गैसीकरण तकनीक का इस्तेमाल होगा. यह तकनीक कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदलती है, जिससे अमोनिया, मेथनॉल, यूरिया, हाइड्रोजन, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG), पेट्रोकेमिकल्स और तरल ईंधन जैसे उत्पाद बन सकते हैं.
सरकारी प्रोत्साहन और नीति बदलाव
कोयला मंत्रालय ने ऊर्जा उत्पादों के आयात को कम करने के लिए सात कोयला परियोजनाओं के लिए ₹64,000 करोड़ मंजूर किए हैं, जिसमें लखनपुर परियोजना भी शामिल है. नई नीति के तहत कोयला युक्त क्षेत्रों में गैसीकरण परियोजनाओं की अनुमति दी गई, जिससे लखनपुर परियोजना को विशेष प्रोत्साहन मिला. केंद्र सरकार ने इस परियोजना के लिए पहले ही ₹1,350 करोड़ की वित्तीय सहायता भी बढ़ा दी है.
परियोजना का भौगोलिक और तकनीकी विस्तार
लखनपुर परियोजना MCL की 350 एकड़ से अधिक भूमि पर स्थापित की जाएगी. प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण अनुबंध पहले ही दिए जा चुके हैं. BHEL ने लार्ज लंप सम टर्नकी (LSTK) पैकेज LSTK-1 और LSTK-2 हासिल किए हैं, जबकि LSTK-3 और LSTK-4 लार्सन एंड टुब्रो को दिए गए हैं. साइट विकास गतिविधियाँ जैसे बाउंड्री वॉल निर्माण और वृक्ष गणना समानांतर रूप से चल रही हैं.
केंद्रीय मंत्री ने परियोजना की महत्ता बताई
नई दिल्ली में इस समझौते पर केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए. उन्होंने परियोजना के रणनीतिक महत्त्व पर प्रकाश डाला और बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए ₹8,500 करोड़ के व्यय को मंजूरी दी है. अब तक सात परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है, जिनमें से तीन की नींव रखी जा चुकी है.
भारत के कोयला भंडार का महत्व
भारत में कोयले का भंडार लगभग 400 अरब टन है, जोकि दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा भंडार है. यह भंडार कम से कम 70 वर्षों तक ऊर्जा सुरक्षा के लिए उपयोगी रहेगा. इस परियोजना से न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश में कोयला आधारित उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.
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