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जिस मूनलाइटिंग पर विप्रो के साथ इंफोसिस भी हुई सख्त, जानें आखिर क्या है वो 

कंपनियों का मानना है कि मूनलाइटिंग से प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ेगा और डेटा ब्रीच की आशंका भी बनी रहती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

दिग्गज आईटी इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को मूनलाइटिंग (Moonlighting) से दूर रहने के लिया कहा है. कंपनी चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा करने वालों को परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Infosys के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट का कहना है कि कर्मचारियों के कोड ऑफ कंडक्ट में मूनलाइटिंग की इजाजत नहीं दी गई है. मूनलाइटिंग को कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना जाएगा और इस स्थिति में  नौकरी से निकाले जाने सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. 

ईमेल भेज चेताया
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि Infosys ने कर्मचारियों को आगाह करते हुए 'नो टू-टाइमिंग, नो मूनलाइटिंग' सब्जेक्ट लाइन के साथ एक ईमेल किया है. यह ईमेल उन कर्मचारियों को चेतावनी की तरह है, जो फिलहाल मूनलाइटिंग कर रहे हैं. वैसे, अकेले इंफोसिस ही नहीं है, जिसने कर्मचारियों को ये फरमान सुनाया है. इससे पहले, विप्रो (Wipro) भी कर्मचारियों को मूनलाइटिंग से दूर रहने के लिए कह चुकी है.

ये है मूनलाइटिंग का मतलब
अब ये भी समझ लेते हैं कि आखिर मूनलाइटिंग होता क्या है? मूनलाइटिंग का मतलब होता है नियमित नौकरी के साथ-साथ किसी तरह की अन्य नौकरी करना. उदाहरण के तौर पर आप एक कंपनी में काम करते हैं, उसके टाइमिंग के बाद आप एक्स्ट्रा कमाई के लिए कोई पार्ट-टाइम जॉब ढूंढ लेते हैं, तो उसे मूनलाइटिंग कहा जाएगा. अक्सर लोग नाइट और वीकएंड पर इस तरह की जॉब करते हैं. पश्चिमी देशों में तो लंबे समय से मूनलाइटिंग का कल्चर है. लेकिन, भारत में कोविड-19 महामारी के बाद से इसमें तेजी आई है. 

कंपनियों ने बताई वजह 
IT सहित कई सेक्टर की कंपनियों को जानकारी मिली है कि उनके कर्मचारी अन्य कंपनियों के प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए विप्रो और इंफोसिस ने अपने स्टाफ को आगाह किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्फोसिस की तरफ से कहा गया है कि कर्मचारी कामकाजी घंटों या उसके बाद भी किसी तरह का अन्य असाइनमेंट नहीं ले सकते. कंपनियों का मानना है कि इससे प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ेगा और डेटा ब्रीच की आशंका भी बनी रहती है.
 


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