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क्यों धूल फांक रहे हैं अधिकांश EV-चार्जिंग स्टेशन, आखिर क्या है वजह?

इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को परेशानी से बचाने के लिए कई जगहों पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं, लेकिन उनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जब भी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बात आती है, बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर का मुद्दा जरूर उठता है. कहा जाता है कि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की पर्याप्त उपलब्धता के बिना EV सफल नहीं हो सकते. यह बात काफी हद तक सही भी है, लेकिन यह भी काबिले गौर है कि पहले से मौजूद चार्जिंग स्टेशनों का इस्तेमाल भी बहुत कम हो रहा है. 

घर पर हो रही चार्जिंग
एक मीडिया रिपोर्ट बताती है कि देशभर में कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए जितने भी चार्जिंग स्टेशन बनाए हैं, उनका केवल 5 से 20 फीसदी ही इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, इसकी एक बड़ी वजह ये है कि देश में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों को व्यापक तौर पर नहीं अपनाया गया है. ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहन 2-व्हीलर हैं. देश में 9 लाख से ज्यादा ऐसे वाहन पंजीकृत हैं. इनमें से करीब 80 फीसदी घरों पर ही चार्ज किए जाते हैं.

महज एक फीसदी कारें
वहीं, कुल कारों में से इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी की बात करें, तो यह महज 1 प्रतिशत है. इन्हीं के लिए बड़ी संख्या में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होती है, क्योंकि कारों को अपेक्षाकृत 2-व्हीलर से ज्यादा दूरी तय करनी होती है. अभी देश की सड़कों पर ज्यादा ई-कारें नहीं हैं. हालांकि, कंपनियों ने अब EV पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. विदेशी कंपनियां भी भारत में अपनी EV लेकर आ रही हैं.  

कारगर आर्थिक मॉडल नहीं
एक मीडिया रिपोर्ट में Bain & Company के हवाले से बताया गया है कि देश में अभी लगभग 5,000 सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशन हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की संख्या काफी कम होने की वजह से चार्जिंग स्टेशनों के लिए कारगर आर्थिक मॉडल अभी सामने नहीं आ पाया है. चार्जिंग स्टेशन कारोबार से जुड़ी Statiq के करीब 7,000 से ज्यादा चार्जर हैं, जिनमें से 1000 तेजी से चार्ज करने वाले चार्जर हैं. हालांकि, दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के अन्य शहरों में इसके सार्वजनिक फास्ट चार्जर का उपयोग काफी कम किया जा रहा है. 

महज इतना इस्तेमाल
बेंगलुरु की इलेक्ट्रिक दोपहिया कंपनी एथर एनर्जी के विभिन्न शहरों में करीब 950 चार्जर हैं, जिनका 23 फीसदी तक इस्तेमाल हो रहा है. सार्वजनिक क्षेत्र की कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज को देश में चार्जिंग के लिए बुनियादा ढांचा तैयार करने में मदद का काम सौंपा गया है। कंपनी के 13 राज्यों में 440 से ज्यादा चार्जर हैं. इनमें से यात्री कार चार्जरों का केवल 5 फीसदी इस्तेमाल हो रहा है. कंपनी के उत्तर प्रदेश में प्रति एक चार्जिंग स्टेशन पर रोजाना औसतन 9 वाहन आते हैं. जबकि दिल्ली में औसतन 8, हरियाणा में 4 और तमिलनाडु में 1.9 ही वाहन आते हैं.


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