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एक छोटी सी चिप ने कैसे खराब किया मारुति का खेल? जानें पूरी कहानी

सेमीकंडक्टर चिप को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ‘दिमाग’ कहा जाता है. ये चिप कंप्यूटर प्रोग्रामिंग पर आधारित होती है और वाहन के डेटा को भी प्रोसेस करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

एक छोटी सी चिप ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गई है. अकेले मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में चिप की कमी के कारण 51,000 यूनिट्स के उत्पादन का नुकसान हुआ है. कई अन्य कंपनियां भी इस कमी से प्रभावित हुई हैं. तो ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि आखिर ये चिप है क्या और क्यों इसके बिना कंपनियों का काम नहीं चल सकता?

कार से लेकर गैजेट्स तक
इस सेमीकंडक्टर चिप की ज़रूरत केवल ऑटोमोबाइल कंपनियों को ही नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, वॉशिंग मशीन से लेकर सभी तरह के गैजेट्स में होता है. इससे आप चिप की डिमांड का अंदाजा लगा सकते हैं. आजकल सभी गाड़ियां लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर बन रही हैं, जिनमें तमाम तरह के आधुनिक फीचर्स होते हैं. गाड़ियों की पावर स्टीयरिंग, ब्रेक सेंसर, एंटरटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग और पार्किंग कैमरों में सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल की जाती है. 

एक कार में लगती हैं इतनी चिप्स
एक रिपोर्ट के मुताबिक, आमतौर पर एक वाहन में 1,000 से अधिक सेमीकंडक्टर चिप्स लगाईं जाती हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो सेमीकंडक्टर को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ‘दिमाग’ कहा जाता है. ये चिप कंप्यूटर प्रोग्रामिंग पर आधारित होती है और वाहन के डेटा को भी प्रोसेस करती है. सेमीकंडक्टर का प्रमुख कार्य विद्युत प्रवाह को नियंत्रित करना होता है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना आधुनिक वाहनों का निर्माण असंभव है. आजकल कंपनियां बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कारों पर भी फोकस कर रही हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर चिप्स का काफी इस्तेमाल होता है. ऐसे में चिप की कमी के चलते कंपनियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है.

कैसे हुई चिप की कमी?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर चिप की कमी आई कैसे और इसके कब तक दूर होने की उम्मीद है? चिप संकट के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई कारण हैं, लेकिन सबसे प्रमुख है कोरोना वायरस. महामारी के दौरान ऑटोमोबाइल कंपनियां ज़्यादातर बंद रहीं, इससे सेमीकंडक्टर चिप की डिमांड एकदम से कम हो गई. हालांकि, लॉकडाउन के वक्त वर्चुअल वर्क कांसेप्ट ने जोर पकड़ा, जिसकी वजह से कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की मांग में तेजी आई. इस 'तेजी' के कारण चिप्स की डिमांड बढ़ी और चिप बनाने वाली कंपनियों ने ऑटोमोबाइल सेक्टर से ध्यान हटाकर दूसरे क्षेत्रों पर फोकस कर लिया. ऐसे में हालात सामान्य होने के बाद भी चिप बनाने वालीं कंपनियां ऑटो सेक्टर की डिमांड को पूरी करने में सफल नहीं हुईं और डिमांड-सप्लाई के बीच का फासला बढ़ता गया.

भारत आयात पर निर्भर
चिप की कमी की वजह से कार कंपनियों कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कम लोकप्रिय मॉडल के प्रोडक्शन में कमी कर दी है, ताकि ज्यादा पसंद किए जा रहे मॉडल्स की डिमांड को पूरा किया जा सके. हालांकि, इसके बावजूद कई कारों का वेटिंग पीरियड काफी ज्यादा है. समस्या यह है कि पूरी दुनिया में केवल कुछ ही कंपनियां ही सेमीकंडक्टर चिप बनाती हैं. इन कंपनियों ने अपना उत्पादन भी बढ़ाया है, लेकिन ये कमी 2023 तक बनी रह सकती है. भारत की कोई भी कंपनी सेमीकंडक्टर चिप नहीं बनाती है, लिहाजा देश इस मामले में पूरी तरह से आयात पर निर्भर है.

169 उद्योग हो रहे प्रभावित
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मारुति ने 2022-23 की जून तिमाही के दौरान 4,67,931 वाहन बेचे. कंपनी ने माना कि सेमीकंडक्टर की कमी उत्पादन संबंधित गतिविधियों की योजना बनाने में एक चुनौती बन रही है. वहीं, गोल्डमैन सॉक्स की एक रिपोर्ट बताती है कि 169 उद्योग चिप की कमी से जूझ रहे हैं. चिप के कारण दुनियाभर में वाहनों का उत्पादन धीमा पड़ गया है.
 


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