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क्या भारत बन सकता है ईवी में आत्मनिर्भर, एक्सपर्ट बोले- हम वर्ल्ड लीडर बनने को हैं तैयार
बल्कि देश के ईवी मार्केट में वर्ल्ड लीडर बनने की भी काबिलियत है. भारत अभी ईवी मार्केट में 11वें पोजिशन पर है और नॉर्वे पहले स्थान पर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः BW Auto World द्वारा आयोजित EV Summit के पैनल सेशन Making India Atmanirbhar: Can India become World Leader in EV? में सेशन को मॉडरेट कर रहे सुधीर मिश्रा, Managing Partner, Trust Legal ने जब उपस्थित पैनलिस्ट से इस सवाल का जवाब पूछा तो सभी का मानना था कि भारत ईवी में न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि देश के ईवी मार्केट में वर्ल्ड लीडर बनने की भी काबिलियत है. भारत अभी ईवी मार्केट में 11वें पोजिशन पर है और नॉर्वे पहले स्थान पर है.
सुधीर मिश्रा जो पिछले 25 सालों से ऑड-ईवन और प्रदूषण पर लड़ रहे हैं, उनका मानना है कि इस साल पराली जलाने के मामलों में कमी आई है. पेट्रोल में ईथेनॉल की ब्लेंडिंग हो रही है और ईवी पर भी काफी फोकस हो रहा है.
ईवी की कीमत ज्यादा होना सबसे बड़ा चैलेंज
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए साक्षी विज, Founder and CEO, Myles ने कहा कि अभी सबसे बड़ा चैलेंज ईवी की कीमत ज्यादा होना है. अगर इलेक्ट्रिक व्हीकल की कीमतों में कमी हो जाए तो हम न केवल इसमें आत्मनिर्भर बन सकते हैं बल्कि नंबर एक पोजिशन पर पहुंच सकते हैं. इलेक्ट्रिक व्हीकल के बहुत सारे पार्ट्स अभी भी इंपोर्ट करने पड़ रहे हैं. हालांकि हम लोग डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को कम करने का प्रयास कर रहे हैं. इसके अलावा हम इलेक्ट्रिक व्हीकल की ओनरशिप में वैल्यू ऐडेड सर्विसेज को भी कस्टमर को बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के दे रहे हैं, ताकि उन पर ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े.
ईवी के लिए बड़ा मार्केट लेकिन सेल्स अभी नाकाफी
साक्षी ने आगे कहा कि ईवी के लिए देश बहुत बड़ा बाजार है लेकिन अभी सेल्स उस गति पर नहीं पहुंची है, जिसकी हम लोग कल्पना कर रहे थे. हमको अभी एक लंबा रास्ता तय करना है. अभी भी केवल 100 लोग इनका डेली डेमो लेते हैं लेकिन खरीदने वालों की संख्या बहुत कम है.
पार्ट्स मिलना बड़ी चुनौती
अरुण श्रेयस, CEO & Co-Founder, RACEnergy ने ईवी के पार्ट्स मिलने पर आने वाली मुश्किलों पर प्रकाश डाला. अरुण ने कहा कि बैटरी की कीमत ज्यादा है और रिप्लेस कराने पर हम बैटरी की कीमत को कम कर रहे हैं. टियर थ्री लेवल पर अभी बहुत काम करना बाकी है. सेमीकंडक्टर और चिप्स की शॉर्टेज है. ईवी में पेट्रोल-डीजल की तुलना में ज्यादा सेमीकंडक्टर और चिप्स लगती हैं और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स भी लगते हैं, लेकिन अभी हमें इस सेगमेंट में खुद को आत्मनिर्भर बनाना है. पार्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ईवी की कीमत और लागत दोनों बढ़ रही है. हालांकि ज्यादा प्रोडक्शन होने पर हम इसको कम ला सकते हैं.
इंडस्ट्री कर रही है काम
अंकित कुमार, CEO, Skye Air ने कहा कि हम ड्रोन के जरिए लॉजिस्टिक और डिलीवरी कर रहे हैं ताकि लोगों के कॉर्बन फुटप्रिंट कम हो और लोगों को कम समय में उनका सामान मिले. जहां तक ईवी इंडस्ट्री का सवाल है, वहां पर अभी भी यह प्रारंभिक फेज में है क्योंकि बहुत सारी चीजें धीरे-धीरे डेवलप हो रही हैं. फिलहाल महंगे होने के चलते ईवी की तरफ ज्यादा आम आदमी का रूझान नहीं है लेकिन आगे चलकर इसमें बढ़ोतरी हो सकती है. हमें एक मिक्स सॉल्यूशन पर काम करना होगा.
सेशन में अनमोल बोहरे, Co-founder & Managing Director, Enigma Auto ने भी अपने विचार रखे और कहा कि ग्रोथ की संभावना काफी है और यकीनन ईवी इंडस्ट्री इसको पूरा करने का माद्दा रखती है.
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