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CII की CBG कमेटी के को-चेयरमैन नियुक्त हुए वरुण कराड
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सरकार ₹23,731 करोड़ के गोबरधन (GOBARdhan) ढांचे को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
रिनर्जी डायनेमिक्स (REnergy Dynamics) के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण कराड को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की 2026-27 की राष्ट्रीय जैव ऊर्जा समिति के तहत संपीड़ित बायोगैस (CBG) समिति का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब सरकार ₹23,731 करोड़ के गोबरधन (GOBARdhan) ढांचे को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. सीबीजी के उत्पादन और परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए इस महीने विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.
गोबरधन ढांचे का उद्देश्य सीबीजी परियोजनाओं के विस्तार से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को दूर करना है. इनमें मांग की स्पष्टता, कीमतों की स्थिरता, परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और पूंजीगत सहायता जैसे मुद्दे शामिल हैं. सरकार को उम्मीद है कि योजना की अवधि के दौरान देश में सीबीजी उत्पादन में करीब 10 गुना वृद्धि हो सकती है.
व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं पर जोर
नीतिगत ढांचे में मांग और राजस्व को लेकर अधिक स्पष्टता आने के साथ सीबीजी क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि नीतिगत उपायों को कितनी तेजी से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं में बदला जाता है. इसके लिए विश्वसनीय कच्चे माल की आपूर्ति, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य संयंत्र, परियोजनाओं के लिए वित्त और सीबीजी की सुनिश्चित खरीद जैसे पहलुओं पर ध्यान देना होगा.
सीआईआई की राष्ट्रीय जैव ऊर्जा समिति के अध्यक्ष तरुण साव्हनी और संपीड़ित बायोगैस समिति के अध्यक्ष रोशन तामक के नेतृत्व में वरुण कराड सह-अध्यक्ष विवेक तनेजा के साथ काम करेंगे. समिति उद्योग से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने, सीबीजी से जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और नीति निर्माताओं, संबंधित मंत्रालयों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बढ़ाने पर काम करेगी.
‘सीबीजी क्षेत्र महत्वपूर्ण मोड़ पर’
वरुण कराड ने कहा कि भारत का सीबीजी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. उनके मुताबिक, नया नीतिगत ढांचा मांग और राजस्व को लेकर अधिक स्पष्टता देता है, लेकिन वास्तविक चुनौती इस स्पष्टता को ऐसी परियोजनाओं में बदलना है जो व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य, वित्तपोषण के योग्य और संचालन के लिहाज से मजबूत हों.
उन्होंने कहा कि अब उद्योग को संयंत्र के आसपास के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान देने की जरूरत है. इसमें कच्चे माल का भरोसेमंद संग्रह, दीर्घकालिक खरीद व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण और परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन शामिल है. उन्होंने कहा कि वह सीआईआई, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक उपायों पर काम करने के लिए उत्सुक हैं, जो सीबीजी क्षेत्र के अगले चरण की वृद्धि को गति दे सकें.
नीति और उद्योग के बीच समन्वय पर फोकस
सीआईआई की संपीड़ित बायोगैस समिति नीति संबंधी सुझाव, उद्योग और सरकार के बीच संवाद तथा ऐसे व्यावहारिक उपायों की पहचान पर ध्यान देगी, जिनसे सीबीजी क्षेत्र अलग-अलग परियोजनाओं से आगे बढ़कर एकीकृत और बड़े स्तर के पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित हो सके.
24 सितंबर को समिति की पहली बैठक हुई थी. इसमें उद्योग से जुड़े हितधारकों ने नए गोबरधन ढांचे, प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं और समिति की कार्ययोजना पर चर्चा की. बैठक में नए नीतिगत ढांचे के क्रियान्वयन के दौरान संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने पर भी चर्चा हुई.
सीबीजी की खरीद से लेकर पाइपलाइन तक कई उपाय
नए गोबरधन ढांचे में सीबीजी की सुनिश्चित खरीद, प्रशासित मूल्य व्यवस्था, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन बुनियादी ढांचा, ऋण सहायता और एक पारिस्थितिकी तंत्र चुनौती कोष सहित कई उपाय शामिल किए गए हैं.
परिचालन दिशानिर्देशों के तहत पात्र उत्पादक तकनीकी और परिचालन व्यवहार्यता के आधार पर बिक्री के लिए उपलब्ध सीबीजी की 100 प्रतिशत तक मात्रा की सुनिश्चित खरीद का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं, प्रशासित मूल्य व्यवस्था के तहत कम से कम 10 साल की अवधि के लिए कीमतों को लेकर अधिक स्पष्टता देने का प्रावधान किया गया है.
इस ढांचे से सीबीजी की पूरी मूल्य श्रृंखला में अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है. हालांकि, क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए कच्चे माल के संग्रह, परियोजना वित्तपोषण, बुनियादी ढांचे, कराधान, सह-उत्पादों के व्यावसायीकरण और सीबीजी की विविध मांग विकसित करने जैसे क्षेत्रों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत होगी.
भारत के ऊर्जा मिश्रण में सीबीजी की भूमिका बढ़ाने की कोशिशों के बीच सीआईआई की यह समिति परियोजना डेवलपर्स, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और अन्य हितधारकों को सीबीजी क्षेत्र के सतत विस्तार के लिए जरूरी व्यावसायिक, परिचालन और नीतिगत परिस्थितियों पर चर्चा का मंच उपलब्ध कराएगी.
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