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तरणजीत सिंह संधू बने दिल्ली के नए एलजी, वीके सक्सेना को लद्दाख की जिम्मेदारी
इस बदलाव के तहत विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि देश के अन्य राज्यों में भी कई राज्यपालों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों के व्यापक फेरबदल के तहत एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. पूर्व भारतीय राजनयिक तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. वे अब तक इस पद पर रहे विनय कुमार सक्सेना की जगह लेंगे, जिन्हें लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है.
राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना में हुआ ऐलान
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में बताया गया कि पूर्व राजनयिक तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. यह फैसला राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्यपालों के बड़े स्तर पर किए गए फेरबदल का हिस्सा है. इस बदलाव के तहत विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि देश के अन्य राज्यों में भी कई राज्यपालों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है.
तीन दशक का कूटनीतिक अनुभव
तरणजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 1988 बैच के अधिकारी रहे हैं. उन्हें तीन दशकों से अधिक का कूटनीतिक अनुभव हासिल है. उन्होंने फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्य किया. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही.
श्रीलंका में भी निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
अपने कूटनीतिक करियर के दौरान संधू ने वाशिंगटन डीसी में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया. इसके अलावा वे 2017 से 2020 तक श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त भी रहे. अपने शुरुआती करियर में भी उन्होंने कोलंबो स्थित भारतीय मिशन में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली थीं.
राजनीति में भी आजमाया था हाथ
साल 2024 में विदेश सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद तरणजीत सिंह संधू सक्रिय राजनीति में आए. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें चुनाव में जीत नहीं मिल सकी.
दिल्ली में अहम होती है उपराज्यपाल की भूमिका
दिल्ली के उपराज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं. दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण यहां प्रशासनिक व्यवस्था में उपराज्यपाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है. विशेष रूप से केंद्र सरकार और दिल्ली की निर्वाचित सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने में उपराज्यपाल की अहम जिम्मेदारी होती है.
अन्य राज्यों में भी हुए बदलाव
राज्यपालों के इस फेरबदल में अन्य राज्यों में भी बदलाव किए गए हैं. तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल भेजा गया है. यह बदलाव पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद किया गया है. वहीं सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
पदभार संभालने के बाद लागू होंगी नियुक्तियां
सरकार की ओर से की गई ये सभी नियुक्तियां संबंधित पदाधिकारी के अपने-अपने पद का कार्यभार संभालने के बाद प्रभावी होंगी. यह फेरबदल प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत देता है, जिसका असर आने वाले समय में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शासन पर देखने को मिल सकता है.
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