होम / अप्वाइंटमेंट / भारत के 52वें चीफ जस्टिस बने जस्टिस बीआर गवई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ
भारत के 52वें चीफ जस्टिस बने जस्टिस बीआर गवई, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ
CJI खन्ना के बाद वरिष्ठता सूची में जस्टिस गवई का नाम था. इसलिए जस्टिस खन्ना ने उनका नाम आगे बढ़ाया. CJI गवई देश के दूसरे दलित और पहले बौद्ध चीफ जस्टिस हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago
भारत को आज नए चीफ सीजेआई मिल गए हैं. मंगलवार को सीजेआई संजीव खन्ना ने अपना कार्यभार न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण (बीआर) गवई को सौंप दिया था. जिसके बाद आज बीआर गवई ने सुप्रीम कोर्ट ने नए सीजेआई के तौर पर ले ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सीएजेआई पद की शपथ दिलाई, जिसके बाद अब वो देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं.
केवल 6 महीने का होगा कार्यकाल
जस्टिस गवई भारत के पहले बौद्ध सीजेआई हैं. आजादी के बाद वो देश में दलित समुदाय से दूसरे सीजेआई हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर उनका कार्यकाल छह महीने का होगा. उन्होंने जब पद की शपथ ली तो इस ऐतिहासिक पल के साक्षी पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत तमाम गणमान्य अतिथि बने.
बॉम्बे हाईकोर्ट से की करियर की शुरुआत
देश के नए सीजेआई बीआर गवई का जन्म अमरावती में हुआ था. उसके बाद उन्होंने वहीं से अपनी पढ़ाई पूरी की और नागपुर विश्वविद्यालय से बीए एलएलबी की डिग्री हासिल की. सीजेआई बीआर गवई ने 1985 में अपने वकालत के करियर की शुरुआत की और 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र तौर पर काम किया. उसके बाद 1992-93 तक वो बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में सहायक सरकारी वकील के तौर पर काम किया. यहां वो जगह है जहां से उनके जस्टिस बनने की शुरूआत हुई. बीआर गवई उसके बाद 14 नवंबर 2003 को बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया.12 नवंबर, 2005 को वे स्थायी न्यायाधीश बने.
कब बने सुप्रीम कोर्ट के जज?
साल 2005 में जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई बॉम्बे हाईकोर्ट में पहली बार स्थाई जज बने थे. उसके बाद साल 2019 में उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर हुई. यहां पर उन्होंने करीब 300 फैसले सुनाए जिसके बाद अब बीआर गवई को भारत का नया चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया है. जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को खारिज करने वाली बेंच का हिस्सा थे. इसके साथ ही वो नोटबंदी के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुनवाई करने वाले बेंच में भी शामिल थे. अगर सैलरी की बात करें तो भारत के मुख्य न्यायाधीश की सैलरी 2 लाख 80 हजार रुपये प्रतिमाह होती है. आज शपथ लेने के बाद जस्टिस बीआर गवई देश के दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं.
टैग्स