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किसे फाइल करना चाहिए ITR, पुराने या नए में कौन सा सिस्टम है बेहतर, यहां जानिए सब कुछ
फिलहाल केंद्र सरकार की तरफ से दो तरह के सिस्टम चल रहे हैं जिनके जरिए रिटर्न फाइल किया जा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए सरकार की तरफ से 31 जुलाई की डेडलाइन आ चुकी है. सरकार की तरफ से राजस्व सचिव ने साफ कर दिया है कि इस डेडलाइन में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं होगी. वहीं टैक्सपेयर्स में आईटीआर भरने को लेकर के काफी कंफ्यूजन की स्थिति रहती है.
दो तरह से फाइल कर सकते हैं आईटीआर
फिलहाल केंद्र सरकार की तरफ से दो तरह के सिस्टम चल रहे हैं जिनके जरिए रिटर्न फाइल किया जा सकता है. नया टैक्स स्लैब सिस्टम है और पुराना टैक्स स्लैब सिस्टम. अब इसमें कौन सा टैक्स सिस्टम किस के लिए सबसे ज्यादा मुफीद रहता है, यह व्यक्ति की आय के स्त्रोत (Source of Income) और निवेश (Investments) के ऊपर मैटर करता है. हालांकि इसमें अपने मन से किसी भी सिस्टम में आईटीआर फाइल करने की कोशिश न करें. इसके लिए किसी अच्छे सीए या फिर इनकम टैक्स के जानकार वकील से मदद ली जा सकती है.
1 अप्रैल 2022 से प्रभावी है ये टैक्स रेट
1 फरवरी को वित्त मंत्री ने नए टैक्स स्लैब की घोषणा की थी जो इस प्रकार से हैंः
| इनकम (रुपये) | टैक्स (फीसदी) |
| 2.5 लाख | 0 |
| 2.5-5 लाख | 5 |
| 5.-7.5 लाख | 10 |
| 7.5-10 लाख | 15 |
| 10-12.5 लाख | 20 |
| 12.5-15 लाख | 25 |
| 15 से ज्यादा | 30 |
पुराने स्लैब में किन इंस्ट्रूमेंट पर मिलती है टैक्स छूट?
- हाउसिंग लोन का प्रिसिंपल और ब्याज
- PPF और EPF में निवेश
- डिपॉजिट पर होने वाली ब्याज आय (80TTA)
- FD यानी फिक्सड डिपॉजिट
- बच्चों की ट्यूशन फीस
- नौकरी करने वालों का स्टैंडर्ड डिडक्शन (50 हजार रुपये)
- LTA यानी लीव ट्रैवल अलाउंस
- HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस
- मेडिकल और इंश्योरेंस के खर्च
- 80DD दिव्यांगों के इलाज पर टैक्स छूट
- 80U में दिव्यांगों के खर्चें पर टैक्स छूट
- 80E एजुकेशन लोन पर टैक्स छूट
- सेक्शन 16-इंटरटेनमेंट अलाउंस
- 80GG मकान के किराए पर छूट
- 80G-डोनेशन (दान पर छूट)
- 80EEB-इलेक्ट्रिक व्हीकल पर टैक्स छूट
New tax slab में किस पर मिलेगी राहत?
- किराए पर स्टैंडर्ड डिडक्शन.
- खेती से होने वाली आमदनी.
- PPF पर मिलने वाले ब्याज.
- बीमा की मैच्योरिटी की रकम.
- मृत्यु पर बीमा से मिली रकम.
- छंटनी पर मिला मुआवजा.
- रिटायरमेंट पर लीव इनकैशमेंट.
- VRS- वॉलेंट्री रिटायरमेंट.
- सुकन्या समृद्धि खाते पर मिली ब्याज और मैच्योरिटी रकम.
स्विच कर सकते हैं टैक्स स्लैब
खास बात ये है कि टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पुराने टैक्स स्लैब (Old tax slab) से नए स्लैब में जा सकते हैं और वे नए स्लैब से फिर पुराने स्लैब में वापस आ सकते हैं. हालांकि यह छूट कुछ खास वर्ग के टैक्सपेयर्स के लिए ही है. नौकरीपेशा नए स्लैब में जाकर वापस आ सकते हैं. नौकरीपेशा हर वित्त वर्ष में टैक्स स्लैब (How to switch tax slab) स्विच कर सकते हैं. जिनकी सैलेरी, किराए या अन्य सोर्स से आय है, वे हर बार टैक्स स्लैब बदल सकते हैं. अगर आपकी बिजनेस से इनकम है तो आप सिर्फ एक बार शिफ्ट कर सकते हैं. बिजनेसमैन एक बार स्विच करने पर वापस नहीं आ सकते.
सीए अतुल गर्ग ने बताया कि नए और पुराने में टैक्स रेट की गणना इंवेस्टमेंट के आधार पर की जाती है. अगर किसी सैलरीपेशा टैक्सपेयर्स ने कहीं कोई इंवेस्टमेंट किया हुआ है तो वो पुराने टैक्स सिस्टम के हिसाब से ही आईटीआर को फाइल करे. वहीं अगर किसी तरह का कोई इंवेस्टमेंट नहीं किया है तो फिर नए सिस्टम के हिसाब से आईटीआर फाइल करना चाहिए.
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