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RBI के इस कदम से क्रेडिट स्कोर की शिकायतें होंगी कम, लोन लेना होगा आसान
इसके द्वारा अब किसी भी व्यक्ति के क्रेडिट या सिबिल स्कोर में होने वाली विसंगतियों को दूर किया जा सकेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी तिमाही मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान लोन या फिर क्रेडिट कार्ड लेने के दौरान होने वाली एक बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए एक नई सुविधा को शुरू करने की घोषणा की थी. इसके द्वारा अब किसी भी व्यक्ति के क्रेडिट या सिबिल स्कोर में होने वाली विसंगतियों को दूर किया जा सकेगा.
सेंट्रल बैंक ने किया आंतरिक लोकपाल के गठन का ऐलान
सेंट्रल बैंक ने देश की चार क्रेडिट इंफोर्मेंशन कंपनियों में आंतरिक लोकपाल के गठन का ऐलान किया है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक भी एक लोकपाल का गठन अपने यहां करेगा, जैसा उसने बैंकों की शिकायतों के निवारण के लिए कर रखा है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने कहा कि 'सीआईसी के भीतर शिकायत निपटान व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर अब इन कंपनियों को आंतरिक ओम्बुड्समैन (Integrated Ombudsman) के दायरे में लाने का निर्णय किया गया है.
ग्राहकों को होगा ऐसे फायदा
अभी देश में इस तरह की व्यवस्था पहले नहीं थी. इसके चलते ग्राहकों का केड्रिट स्कोर हर कंपनी में अलग-अलग होता है यानि किसी में कम और किसी में ज्यादा. ऐसे में कई बार ग्राहकों को लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में सेंट्रल बैंक का यह कदम ग्राहकों को बहुत फायदा देने वाला है और साथ ही क्रेडिट इंफोर्मेशन कंपनियों (CIC) की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता लेकर के आएगा.
क्या है यह इंटीग्रेटिड ओम्बड्समैन स्कीम
इस स्कीम को नंवबर 2021 में लेकर के आया गया था, जिसमें आरबीआई की मौजूदा तीन लोकपाल योजनाओं को इंटीग्रेटिड किया गया है. (1) बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006, (3) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए लोकपाल योजना, 2018, और (3) डिजिटल लेनदेन के लिए लोकपाल योजना, 2019. इस योजना ने प्रत्येक लोकपाल कार्यालय के अधिकार क्षेत्र को समाप्त कर दिया है. किसी भी भाषा में भौतिक और ईमेल शिकायतों की प्राप्ति और प्राइमरी प्रोसेसिंग के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, चंडीगढ़ में एक सेंट्रलाइज रसीद और प्रोसेसिंग केंद्र स्थापित किया गया है. विनियमित इकाई का प्रतिनिधित्व करने और ग्राहकों द्वारा विनियमित इकाई के खिलाफ दायर शिकायतों के संबंध में जानकारी प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक या समकक्ष में महाप्रबंधक के पद पर प्रधान नोडल अधिकारी की होगी.
रिजर्व बैंक ने कहा कि आरबीआई-आईओएस को और अधिक व्यापक बनाने के लिये क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) को इसके दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है. यह इन कंपनियों के ग्राहकों को उसके खिलाफ शिकायतों के समाधान के लिये लागत मुक्त वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करेगा.
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