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हेल्थ इंश्योरेंस: मल्टी ईयर पॉलिसी लेना फायदे का सौदा, हो जाएंगे कई बातों से टेंशन फ्री

हेल्थ पॉलिसी को हर व्यक्ति को लेना चाहिए और छूट लेने के लिए कंपनियां भी पॉलिसी का कवर अमाउंट देखती हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः इंश्योरेंस पॉलिसी खासतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के वैसे तो सभी को फायदे मालूम होते हैं, हालांकि इसके बाद भी बहुत कम लोग इसको कराते हैं. टू-व्हीलर या फोर व्हीलर पॉलिसी लेना अनिवार्य है, इसलिए इनको लेना सभी वाहन मालिकों के लिए जरूरी होता है, क्योंकि क्लेम लेने में ये बहुत काम आती हैं. अब बहुत सी कंपनियां एक साल के अलावा दो और तीन साल की पॉलिसी लेने का विकल्प भी शुरू कर चुकी हैं. 

मल्टी ईयर पॉलिसी लेने के फायदे

एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इंवेस्टमेंट एडवाइजर्स (ARIA) के बोर्ड मेंबर लोवाई नवलखी ने BWHindi.com से बात करते हुए बताया कि, मल्टी ईयर पॉलिसी लेने के बहुत सारे फायदे हैं. इसमें इनकम टैक्स में बचत के साथ ही अब कंपनियां भी बहुत अच्छा डिस्काउंट देने लगी हैं. टैक्सपेयर साल के हिसाब से रिटर्न फाइल करते वक्त इसका फायदा ले सकते हैं. इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन भी किया जा चुका है. वहीं कई कंपनियां ग्राहकों को मल्टी ईयर पॉलिसी लेने पर 10 से 20 फीसदी की छूट प्रीमियम पर दे रही हैं. 

कवर होना चाहिए बढ़िया

नवलखी ने आगे बताया कि हेल्थ पॉलिसी को हर व्यक्ति को लेना चाहिए और छूट लेने के लिए कंपनियां भी पॉलिसी का कवर अमाउंट देखती हैं. अगर चार लोगों की फैमिली है तो फिर पॉलिसी में इंश्योरेंस कवर 25 लाख का होना चाहिए. ग्राहक अपनी पॉकेट के अनुसार कवर को 50 लाख तक भी ले जा सकता है. अस्पतालों में बढ़ते इलाज के खर्च और रूम रेंट पर जीएसटी लगने के बाद से 20 लाख की पॉलिसी कराने से किसी तरह का कोई फायदा नहीं मिलेगा. 

क्या हैं मल्टी-ईयर हेल्थ इंश्योरेंस का लाभ?

सालाना प्रीमियम वाली पॉलिसी में हर इंश्योरेंस कंपनी एक साल बाद प्रीमियम की कीमत बढ़ा सकती है लेकिन इस पॉलिसी में आपको पूरे टेन्योर में केवल एक बार पैसा देना होगा. इसलिए आप हर साल बढ़ने वाले रेट से सुरक्षित हो जाते हैं. इसके अलावा 3 साल के प्रीमियम के लिए दी गई रकम से आप पॉलिसी के खत्म होने तक हर साल टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं. अगर आपने 60,000 रुपये के प्रीमियम के साथ पॉलिसी ली है तो हर साल आप 3 साल तक 20,000 रुपये की टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं.

क्या है घाटा?

नवलखी ने कहा कि अगर आप मल्टी-ईयर पॉलिसी लेने के एक साल बाद इसे पोर्ट या कैंसल करने के बारे में सोचते हैं तो संभव है कि इससे आपको घाटा उठाना पड़ेगा. अगर इंश्योरेंस कंपनियों ने अगले कुछ सालों में प्रीमियम की कीमतें घटा दी तो भी आप लाभ से वंचित रह जाएंगे. इसके अलावा मल्टी-ईयर पॉलिसी कितनी बेहतर है ये इंश्योरेंस कंपनी की सेवा पर भी निर्भर करता है. कुछ पॉलिसी किसी बीमारी को 2 साल बाद तो कुछ 4 साल बाद कवर करना शुरू करती हैं. ऐसे में पॉलिसी को पोर्ट करना काफी परेशान करने वाला हो सकता है.

मिलती है टॉप अप की सुविधा

टॉप-अप हेल्थ प्लान उन लोगों के लिए अतिरिक्त कवर होता है जिनके पास पहले से ही हेल्थ पॉलिसी है. यह काफी कम कीमत में मिल जाता है. चूंकि कम कीमत में इससे अतिरिक्त कवर मिल जाता है, इसीलिए जिस व्यक्ति के पास पहले से इंश्योरेंस कवर है उसके लिए ये सही विकल्प है. इंश्योरेंस कंपनियां टॉप-अप प्लान के लिए कोई मेडिकल स्क्रीनिंग नहीं करती. यहां तक कि आप दूसरी कंपनी से भी टॉप-अप लेते हैं तो भी कोई स्क्रीनिंग नहीं होती है.

किसके लिए रहेगा टॉप अप ज्यादा फायदेमंद?

अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं जहां से आपको और आपके परिवार को हेल्थ इंश्योरेंस में तो कवर किया गया है लेकिन आपको लगता है कि आपके कवर की रकम काफी नहीं है तो आपका 'टॉप-अप' प्लान लेना सही रहेगा. क्योंकि अगर आप अलग से प्लान लेते हैं तो ये आपको काफी महंगा पड़ सकता है लेकिन 'टॉप-अप' प्लान आपके इस खर्च को कम कर सकता है. 

VIDEO: क्या है गोल्ड का घेवर? जानिए इसे बनाने वाले ने क्या बताई एक पीस की कीमत

 


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