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टोल टैक्स में बड़ा सुधार: अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा नहीं, सिर्फ बनी सड़क का ही लगेगा शुल्क

अधूरे प्रोजेक्ट पर पूरी वसूली की व्यवस्था खत्म होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा. 15 फरवरी से लागू होने जा रहे ये नियम सड़क परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

देशभर के वाहन चालकों के लिए राहत की बड़ी खबर है. केंद्र सरकार ने टोल वसूली के नियमों में अहम बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल नहीं लिया जाएगा. जितनी सड़क चालू और उपयोग योग्य होगी, उतने हिस्से का ही शुल्क देना होगा. नए नियम 15 फरवरी 2026 से लागू होंगे और इससे निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस ऑपरेटरों को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. 

अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरी वसूली अब बंद

पहले की व्यवस्था के तहत, यदि कोई नेशनल एक्सप्रेसवे आंशिक रूप से तैयार होता था, तब भी यात्रियों से पूरी लंबाई का टोल वसूला जाता था. यानी सड़क का बड़ा हिस्सा निर्माणाधीन होने के बावजूद वाहन चालकों को पूरा शुल्क चुकाना पड़ता था. अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए तय किया है कि केवल चालू और उपयोग योग्य हिस्से के लिए ही टोल लिया जाएगा. इससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो अधूरे प्रोजेक्ट के बावजूद पूरा शुल्क देने को मजबूर थे.

नियमों में क्या हुआ बदलाव

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन अधिसूचित किया है. नए प्रावधानों के अनुसार अब आंशिक रूप से चालू नेशनल एक्सप्रेसवे पर पूरा टोल नहीं वसूला जाएगा और केवल चालू हिस्से के लिए ही राष्ट्रीय राजमार्ग की दरों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा. यह प्रावधान एक वर्ष तक या एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का कहना है कि यह फैसला यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

मौजूदा टोल स्ट्रक्चर और नई व्यवस्था

वर्तमान में नेशनल एक्सप्रेसवे पर टोल दरें सामान्य नेशनल हाईवे की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत अधिक हैं. ऐसे में अधूरे एक्सप्रेसवे पर पूरा शुल्क वसूला जाना यात्रियों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होता था. नई व्यवस्था के तहत अधूरे एक्सप्रेसवे पर टोल दरों में अनुपातिक कमी होगी और यात्रियों को केवल उपयोग किए गए हिस्से का ही भुगतान करना होगा. मंत्रालय का मानना है कि इससे समानांतर चल रहे पुराने नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा और ट्रैफिक जाम से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आ सकती है.

15 फरवरी 2026 से होंगे लागू

संशोधित नियम नेशनल हाईवे शुल्क (दर निर्धारण एवं वसूली) (संशोधन) नियम, 2026 के तहत 15 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे. यह प्रावधान एक वर्ष तक या संबंधित एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगा. सरकार का मानना है कि इस बदलाव से निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस संचालकों को भी लाभ मिलेगा. टोल शुल्क में कमी से परिवहन लागत घट सकती है, जिसका असर माल भाड़े और उपभोक्ता कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

यात्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा

टोल में अनुपातिक कटौती से लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को सीधी राहत मिलेगी. ट्रक और बस ऑपरेटरों के लिए यह निर्णय परिचालन लागत कम करने में सहायक हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एक्सप्रेसवे का बेहतर उपयोग होगा और समानांतर हाईवे पर भीड़ घटेगी, जिससे यात्रा और सुगम हो सकती है.

 


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