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इस सरकारी बैंक से लिया है लोन? पढ़ लें ये काम की खबर वरना बिगड़ जाएगा बजट
महंगाई कंट्रोल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में नीतिगत दरों में इजाफा था, तब से अब तक कई बैंक कर्ज महंगा कर चुके हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बढ़ोत्तरी के बाद से बैंक कर्ज महंगा कर रहे हैं. अब तक कई सरकारी और प्राइवेट बैंक ब्याज दरों में इजाफा कर चुके हैं. अब इस लिस्ट में बैंक केनरा बैंक (Canara Bank) का नाम भी जुड़ गया है. इस सरकारी बैंक ने सभी अवधि के लिए अपने एमसीएलआर रेट (MCLR) और आरएलएलआर रेट (RLLR) में 15 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर दिया है.
EMI भी बढ़ जाएगी
मीडिया रिपोर्ट्स में बैंक के हवाले से बताया गया है कि ब्याज दरों में यह बदलाव आज यानी 7 अक्टूबर से लागू हो जाएगा. बैंक के इस कदम से लोन (Loan) लेना पहले से ज्यादा महंगा होगा और जिन्होंने पहले से ही बैंक से लोन लिया है उनकी EMI भी बढ़ जाएंगी. गौरतलब है कि आरबीआई ने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है. जिसके बाद यह बढ़कर रेट 5.9 फीसदी हो गया है.
ये बैंक भी कर चुके हैं महंगा
ब्याज दरों में मौजूदा वृद्धि के बाद केनरा बैंक का 1 साल के लिए एमसीएलआर रेट अब बढ़कर 7.90% हो गया है. इससे पहले, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) को बढ़ाकर 8.55 फीसदी करने का ऐलान किया था. इसी तरह उसने रेपो रेट से संबंधित उधार दर RLLR को 50 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया है. बैंक ऑफ इंडिया, HDFC, ICICI आदि बैंक भी लोन महंगा कर चुके हैं.
क्या होता है एक्सटर्नल बेंचमार्क?
RBI ने 2019 से फ्लोटिंग रेट (Floating Interest) वाले सभी नए पर्सनल और रिटेल लोन को एक एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य कर दिया था. एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) किसी लोन पर ब्याज की न्यूनतम दर होती है. इसमें आरबीआई का रेपो रेट भी शामिल है. बैंकों में फिलहाल तीन तरह के एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट चल रहे हैं, जिनके हिसाब से ब्याज दरों को तय किया जाता है.
क्या होता है Repo Rate?
महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक इस साल मई से लेकर अब तक चार बार रेपो रेट बढ़ा चुका है. बीते शुक्रवार को उसने रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया था. आरबीआई की इस बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट 5.90 फीसदी पर पहुंच गया है. रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है. इस रेट के बढ़ते ही बैंक कर्ज महंगा कर देते हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI की तरफ से ऐसी बढ़ोत्तरी आगे भी हो सकती है.
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