होम / यूटिलिटी / नकली सामान डिलीवर होने पर ई-कॉमर्स कंपनियां होंगी जिम्मेदार, संसद में पेश हुई रिपोर्ट
नकली सामान डिलीवर होने पर ई-कॉमर्स कंपनियां होंगी जिम्मेदार, संसद में पेश हुई रिपोर्ट
संसदीय कमेटी के इस फैसले से उन ग्राहकों को फायदा मिलेगा जो डिलीवर हुए नकली या घटिया उत्पाद से परेशान हैं और जिनकी कहीं सुनवाई नहीं है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: अगर कोई ग्राहक ऑनलाइन सामान मंगवाता है, सामान खराब या नकली निकल जाता है तो इसकी जिम्मेदारी केवल विक्रेता की नहीं होगी बल्कि ई-कॉमर्स कंपनियों की भी होगी. दरअसल वाणिज्य मामलों पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने ई-कॉमर्स खिलाड़ियों के इस तर्क को खारिज कर दिया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर बेची जाने वाली वस्तुओं पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है, उनकी जिम्मेदारी सिर्फ उनके प्लेटफॉर्म पर बिक रहे किसी घटिया और नकली प्रोडक्ट को लेकर अगर कोई शिकायत है तो वो सिर्फ एक मध्यस्थ की भूमिका में ही रहते हैं.
नकली सामान के लिए ई-कॉमर्स कंपनियां होंगी जिम्मेदार
संसदीय कमेटी के इस फैसले से उन ग्राहकों को फायदा मिलेगा जो डिलीवर हुए नकली या घटिया उत्पाद से परेशान हैं और जिनकी कहीं सुनवाई नहीं है. क्योंकि ऐसे में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ही जिम्मेदारी होगी कि वो ये देखे कि ग्राहकों को नकली या घटिया सामान डिलिवर न हो. पिछले साल ई-कॉमर्स नियमों का एक ड्राफ्ट जारी हुआ था, जिसमें “fallback liability" का जिक्र था, जिसके मुताबिक किसी प्लेटफॉर्म पर अगर कोई विक्रेता कोई सामान या सर्विस उपभोक्ता को डिलिवर करने में नाकाम रहता है, चाहे वो सेलर की लापरवाही के कारण हो, चूक की वजह से हो या फिर कमीशन की वजह से और जिसकी वजह से उपभोक्ता का नुकसान होता हो तो जिम्मेदारी मार्केटप्लेस की होगी.
ई-कॉमर्स के लिए ड्राफ्ट रूल
यह सरकार और ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच एक विवादित मुद्दा बन गया, बाद में ई-कॉमर्स नियमों के मसौदे से इस खंड को हटाने का सरकार से आग्रह किया. दरअसल मार्केटप्लेस का हमेशा ये दावा रहा है कि वो इंवेंट्री को नियंत्रित नहीं करते हैं इसलिए उन्हें विक्रेताओं के साथ किसी भी विवाद के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाना चाहिए. ई-कॉमर्स कंपनियों को कहना है कि किसी प्रोडक्ट की खराब या क्वालिटी के लिए सिर्फ विक्रेता को ही लॉयबिलिटी क्लॉज में शामिल किया जाए.
राज्य सभा में पेश हुई रिपोर्ट
स्थायी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ‘Promotion and Regulation of E-Commerce in India’ में कहा है कि यह ग्राहकों के हित में नहीं होगा कि मार्केटप्लेस अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले सामानों की गुणवत्ता और मानक बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी से भाग जाएं.” इस रिपोर्ट को राज्य सभा में गुरुवार को पेश किया गया. कमेटी ने प्रस्ताव दिया कि ई-कॉमर्स कंपनियों के ऊपर जिम्मेदारी डाली जानी चाहिए और प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले घटिया और नकली सामानों की डिलिवरी जैसे मामलों के निपटारे को लेकर उनके एक्टिव रोल को जरूरी किया जाना चाहिए. ड्राफ्ट रूल्स के मुताबिक ग्राहकों के हितों के लिए एक चीफ कंप्लायंस ऑफिसर, नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन, एक रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर नियुक्त करने के साथ साथ वेबसाइट पर शिकायतों के निपटारे का मैकेनिज्म भी देना होगा.
संसदीय समिति को हालांकि ये भी लगता है कि सभी ई-कॉमर्स कंपनियों पर एक साथ नियमों को लगा देना भारत में ई कॉमर्स ग्रोथ को धीमा कर सकता है. इसलिए कमेटी ये सुझाव देती है कि ई कॉमर्स कंपनियों को रेगुलेट करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जाना चाहिए. ड्राफ्ट नियमों के माध्यम से पेश किए जाने वाले अतिरिक्त कर्तव्यों और देनदारियों को लागू किया जाना चाहिए.
VIDEO: खाने के तेल को लेकर आई एक और अच्छी खबर, सुनते ही झूम उठेंगे आप
टैग्स