होम / यूटिलिटी / जानते हैं सबसे बड़ी खुशी का क्या है कारण? सर्वे में सामने आयी ये वजह
जानते हैं सबसे बड़ी खुशी का क्या है कारण? सर्वे में सामने आयी ये वजह
सर्वे रिपोर्ट में हाल ही में हुए जी 20 समिट का असर भी दिखाई दे रहा है. सर्वे करने वाली कंपनी का कहना है कि उसके कारण खुशी में इजाफा देखने को मिल रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
सितंबर में एक बार फिर Happiness Monitor सामने आया है. इसे लेकर सर्वे रिपोर्ट कहती है कि हैप्पीनेस मॉनिटर वैसे तो पिछले महीने की तरह की स्थिर बना हुआ है लेकिन एक बार फिर भारतीयों की हैप्पीनेस का प्रमुख कारण बनकर सामने आया है वो है उनका परिवार. सर्वे रिपोर्ट कह रही है कि एक बार फिर 69 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वो खुश हैं. जबकि महिलाएं, छात्र, गृहणियां का हैप्पीनेस मीटर भी पहले से बेहतर निकलकर सामने आया है.
क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट ?
Ipsos IndiaBus Happiness Monitor की ओर से जारी की गई ये रिपोर्ट बताती है कि जो लोग खुश हैं उनमें फुल टाइम स्टूडेंट 74 प्रतिशत, होममेकर 73 प्रतिशत, महिलाएं 71 प्रतिशत और उच्च शिक्षा प्राप्त लोग 70 प्रतिशत शामिल हैं. सर्वे रिपोर्ट ये भी कहती है कि टियर 1 शहरों में रह रहे 94 प्रतिशत अर्बन लोगों का कहना है कि वो अपनी जिंदगी से खुश हैं. नार्थ और वेस्ट अर्बन सिटी में रहने वाले साउथ और ईस्ट वालों से ज्यादा खुश हैं. आंकड़ा बताता है कि पश्चिम क्षेत्र में रहने वाले शहरी भारतीयों में 87% खुश थे और उसी तरह उत्तर क्षेत्र में रहने वाले लोगों में से 77% ने खुश होने का दावा किया है. जबकि दक्षिण क्षेत्र में रहने वाले केवल 54% लोग खुश थे. जबकि पूर्व की स्थिति को देखें तो केवल 1 में से 2 (50%) लोग खुश थे. यह रुझान पिछले महीने के मुकाबले सितंबर में पाया गया है.
किन वजहों से खुश हैं लोग?
Ipsos IndiaBus Happiness Monitor की रिपोर्ट बताती है कि अगर खुशी की वजहों की तरफ देखें तो आज भी परिवार ऐसी वजह बना है जिससे ज्यादा लोग खुश हैं. इसमें इस बार (1%) का इजाफा हुआ है. इसी तरह से जो लोग दुनिया की स्थिति से खुश हैं उनमें (3%) का इजाफा हुआ है. , देश की स्थिति से खुश लोगों में (2%) का इजाफा हुआ है, पड़ोसी में (1) का इजाफा देखने को मिला है. इसी तरह से स्वास्थ्य में (2%) की कमी, आर्थिक/ वित्तीय स्थितियों में (1%) की कमी, सहयोगी/ व्यापार साथी (2%) का इजाफा, रोजगार या काम में (1%) की कमी, देखने को मिली है.
क्या बोले सर्वे करने वाले?
इस सर्वेक्षण के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए ईएसजी और सीएसआर के ग्रुप सर्विस लाइन लीडर, पब्लिक अफेयर्स, परिजात चक्रवर्ती ने कहा कि खुशी के स्तर स्थिर रहे हैं और परिवार खुशी को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ी शक्ति बना हुआ है. खुशी मॉनिटर यह भी दिखाता है कि खुशी को हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिभाषित किया जाता है. उन्होंने कहा कि G20 समिट ने भारत और दुनिया के दृष्टिकोण पर प्रभाव डाला है और सितंबर में उसका असर सर्वे में दिखाई दे रहा है. साथ ही काम और सहयोगी और बढ़ते हुए काम के दबाव ने थोड़ी सी खुशी के स्तर को कम किया है. सर्वे बताता है कि महिलाएँ और गृहणियाँ अपने खुद के समय के साथ खुश हैं.
टैग्स