होम / यूटिलिटी / 5जी से कैसे स्मार्ट होगी खेती, पल में मिल जाएगी मौसम की जानकारी
5जी से कैसे स्मार्ट होगी खेती, पल में मिल जाएगी मौसम की जानकारी
ये कैमरा 5 वर्ग किलोमीटर के एरिया पर आसानी से नजर रख पाएगा. इसका काम होगा कि वो पौधों के विकास के ऊपर नजर रखेगा. उनकी हर रोज की ग्रोथ को वो एक डेटा सेंटर में भेजेगा.
ललित नारायण कांडपाल 3 years ago
5 जी टेक्नोलॉजी आने के बाद किस तरह से दुनिया में बदलाव आने वाला है उसकी एक झलक दिख रही है दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे इंडिया मोबाइल कांग्रेस में. यहां भविष्य में हर कंपनी आपके रोजमर्रा के कामों को आप कैसे तकनीक की मदद से कर सकते हैं इसी पर काम कर रही है. इसी का एक हिस्सा है स्मार्ट एग्रो.
कैसे काम करती है स्मार्ट एग्रो तकनीक
स्मार्ट एग्रो तकनीक के तीन बेहद महत्वपूर्ण भाग है. जिसमें पहला भाग है क्रॉपव्यू भविष्य में खेती के तरीके में होगा ये कि आपके खेत के एक कोने पर एक हाई रेसोल्यूशन कैमरा लगा दिया जाएगा. ये कैमरा 5 वर्ग किलोमीटर के एरिया पर आसानी से नजर रख पाएगा. इसका काम होगा कि वो पौधों के विकास के ऊपर नजर रखेगा. उनकी हर रोज की ग्रोथ को वो एक डेटा सेंटर में भेजेगा जिससे वहां बैठे वैज्ञानिक उसकी ग्रोथ पर नजर रख सकेंगे ये तकनीक सिम कार्ड से काम करेगा. इसी सिम से सारा डेटा ट्रांसफर होगा.
वेदर फोकॉस्टिंग
दूसरी सबसे दिलचस्प बात है इस स्मार्ट एग्रो तकनीक की वो है इसका वेदर स्टेशन. ये वेदर स्टेशन पूरे गांव में एक लगाया जाता है. इससे आने वाले डेटा को भी वहां बैठे साइंटिस्ट रीड करते हैं और अगर बारिश आंधी तूफान की संभावना है तो वो गांव को सूचित कर देते हैं.सूचना के लिए कंपनी की ओर से उसी गांव के चार से पांच लोगों की एक टीम बनाई हुई है. जो इस जानकारी को पूरे गांव में फैला देता है.इसी में एक संयंत्र खेत के अंदर भी लगा होता है,जो खेत की नमी भी भांपता है. और खेत को ऑटो मैटिक तरीके से पानी उपलब्ध करा देता है.
इनसेक्ट ट्रैप
इस तकनीक का तीसरा भाग है स्मार्ट इंसेक्ट ट्रैप. ये इंसेक्ट ट्रैप खेतों में लगने वाले इंसेक्ट की पिक्चर को सीधे डेटा सेंटर भेजता है और वहां से उस कीड़े की दवा की जानकारी किसान को मुहैया करा दी जाती है.
कई राज्यों में चल रहा है प्रयोग
वोडाफोन आइडिया के सीएसआर प्रयास से चल रहे इस तकनीकी काम का देश के कई हिस्सों में प्रयोग चल रहा है.अभी वोडाफोन आइडिया देश के 10 से ज्यादा राज्यों के किसानों के साथ मिलकर इस तकनीक को परख रहे हैं. जिससे इस तकनीक को और बेहतर बनाया जा सके.
टैग्स