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सावधानः भारतीय स्टूडेंट्स को Malware के जरिए ऐसे टारगेट बना रहे हैं पाकिस्तानी हैकर्स
यह हैकर्स स्टूडेंट्स का डाटा हैक करने के बाद उसका इस्तेमाल भारत सरकार के विभिन्न विभागों की जासूसी करने के लिए कर रहे हैं. एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः पाकिस्तानी हैकर्स अब देश के विभिन्न कॉलेज और यूनिवर्सिटिज में पढ़ने वाले छात्रों के डाटा को एक मालवेयर के जरिए हैक करके टारगेट बना रहे हैं. यह हैकर्स स्टूडेंट्स का डाटा हैक करने के बाद उसका इस्तेमाल भारत सरकार के विभिन्न विभागों की जासूसी करने के लिए कर रहे हैं. एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
दिसंबर 2021 से हुआ है सक्रिय
दिसंबर 2021 से ट्रांसपेरेंट ट्राइब के नाम से जाने जाने वाले एडवांस परसिस्टेंट थ्रेट (APT) समूह ने कई स्टूडेंट्स को टारगेट करते हुए एक नया फिशिंग कैंपेन चला रखा है. सिस्को टैलोस (Cisco Talos) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि, "यह नया कैंपेन यह भी बताता है कि एपीटी सिविलियन यूजर्स को भी पीड़ित करते हुए अपने नेटवर्क में शामिल कर रहा है और इसका विस्तार भी कर रहा है."
मई 2022 में चला इसके बारे में पता
इस मालवेयर का पता पहली बार मई 2022 में भारत स्थित K7 लैब्स द्वारा देखा गया जो शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों को निशाना बना रहा है. इससे भारत में एक नए तरह के खतरे का पता चल रहा है. सिस्को टैलोस के शोधकर्ताओं ने द हैकर न्यूज को बताया, "एजुकेशनल सेक्टर को इस तरह से टारगेट बनाने का एक ही मकसद है कि स्टूडेंट्स से राष्ट्र या राज्य के खिलाफ जासूसी करवाई जाए, जिससे उनको फायदा पहुंचे. इसका एक ही लक्ष्य है कि हैकर्स भारत की यूनिवर्सिटीज और रिसर्च ऑर्गेनाइजशन में व्यक्ति या ग्रुप से लंबे समय तक चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी इकठ्ठा कर सकें.
APT के अलावा ये हैकर्स भी हैं सक्रिय
इसके अलावा मॉनीकर्स APT36, ऑपरेशन C-मेजर, PROJECTM, Mythic Leopard के तहत ट्रैक किया गया, ट्रांसपेरेंट ट्राइब के मुख्य कर्ताधर्ता के पाकिस्तानी मूल के होने का संदेह है और भारत और अफगानिस्तान में सरकारी संस्थाओं और थिंक टैंकों को कस्टम मैलवेयर जैसे कि CrimsonRAT, ObliqueRAT और CapraRAT से हमला करने के लिए जाना जाता है.
लिंक या अटैचमेंट के जरिए आ रहा मालवेयर
साइबर सुरक्षा फर्म द्वारा डॉक्यूमेंटेड की गई अटैक चेन्स से पता चला है कि हैकर एक मालडॉक को एक अटैचमेंट या लिंक के तौर पर ईमेल के जरिए भेज रहे हैं. इस लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक करते ही ये CrimsonRAT को सिस्टम में एक्टिव कर देता है, जिससे सारी जानकारी हैकर के पास पहुंच जाती है.
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