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क्या सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की दौड़ में Musk और Ambani को पीछे छोड़ देंगे सुनील मित्तल?

एलन मस्क की स्टारलिंक और मुकेश अंबानी की रिलायंस Jio भी इस दौड़ में शामिल हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड (Satellite Broadband) शुरू करने की दौड़ बेहद रोमांचक हो गई है. एलन मस्क (Elon Musk) की स्टारलिंक (Starlink) और मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की रिलायंस जियो (Reliance Jio) के साथ-साथ अब सुनील मित्तल की भारती एयरटेल भी इस दौड़ में शामिल हो गई है. खबर तो यहां तक है कि एंट्री के साथ ही एयरटेल ने अपने 2 सबसे ताकतवर प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ने की तैयारी भी कर ली है. बता दें कि भारती एयरटेल के निवेश वाली कंपनी Eutelsat OneWeb देश में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करना चाहती है.

डेमो एयरवेव का इस्तेमाल शुरू
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Eutelsat OneWeb ने एडमिनिस्ट्रेटिव रूट के माध्यम से 90 दिनों की अवधि के लिए ‘का’ एंड ‘कू’ बैंड का डेमो सैटेलाइट स्पेक्ट्रम हासिल किया है. ‘का’ बैंड स्पेक्ट्रम अर्थ स्टेशनों के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है और ‘कू’ बैंड यूजर्स एक्सेस टर्मिनलों का समर्थन करता है. इसके साथ ही यूटेलसैट वनवेब ने सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क पर डेमो एयरवेव का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. अभी केवल रक्षा बलों और कुछ बड़ी सरकारी कंपनियों को ही यह सेवा दी जा रही है, लेकिन जल्द ही इसे कमर्शियल लॉन्च किया जाएगा. 

इसलिए रेस में है आगे 
एलन मस्क की स्टारलिंक सीधे रिटेल यूजर्स को सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देगी जबकि यूटेलसैट वनवेब पूरी तरह से B2B मॉडल पर काम करेगी. दूरसंचार विभाग यानी DoT सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के एडमिनिस्ट्रेटिव आवंटन को अंतिम रूप देने और नियामक गाइडलाइन के आधार पर मूल्य निर्धारण करने की प्रक्रिया में है. नया दूरसंचार कानून अब एडमिनिस्ट्रेटिव चैनलों के माध्यम से सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन की सुविधा प्रदान करता है. वैसे तो सैटेलाइट इंटरनेट की दौड़ में Jio, Starlink के अलावा, TATA, Amazon Kuiper जैसे नाम भी शामिल हैं, लेकिन तैयारियों को देखकर यूटेलसैट वनवेब के अव्वल आने की संभावना अधिक है. कंपनी के पास स्पेस इंडस्ट्री रेगुलेशन, IN-SPACe से आवश्यक लाइसेंस हैं. गुजरात और चेन्नई के पास कंपनी के अर्थ स्टेशन भी चालू हैं.  

Jio को टक्कर दे पाएंगे मस्क?
Elon Musk की कंपनी स्टारलिंक की बात करें, तो यह अमेरिका में सफल रही है. स्टारलिंक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सर्विस की सबसे खास बात ये है कि इसमें जमीन पर टावर लगाने की जरूरत नहीं होती है. सीधे सैटेलाइट से इंटनेट सर्विस मिलती है. इसके चलते दूरदराज के इलाकों में भी अच्छी स्पीड वाला इंटरनेट प्रदान किया जा सकता है. भारत में इंटरनेट का जाल तेजी से फैला है, लेकिन कनेक्टिविटी की समस्या अभी भी कायम है. एक्सपर्ट मानते हैं कि स्टारलिंक के आने से न केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी, बल्कि कनेक्टिविटी की समस्या भी दूर होगी. हालांकि, अगर मस्क और अंबानी की टक्कर के लिहाज से देखें, तो Musk की कंपनी के लिए मुकेश अंबानी की रिलायंस Jio को टक्कर देना आसान नहीं होगा. इसकी कई वजह हैं, लेकिन सबसे अहम है इंटरनेट सर्विस की कीमत. अमेरिका में स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस के लिए करीब 7 हजार रुपए प्रति महीना चार्ज करती है. भारत में इतना पैसा देने को लोग शायद ही तैयार हों.


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