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iPhone के दीवानों के लिए आ गई बड़ी खुशखबरी! चार्जर से जुड़ी है यह खबर
अभी iPhone के साथ कस्टमर को सिर्फ डेटा केबल तो मिलता है, पर एडॉप्टर नहीं मिलता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
सैन फ्रांसिस्को: एप्पल के कार्यकारी ग्रेग जोसविएक ने पुष्टि की है कि तकनीकी दिग्गज iPhone के लिए USB-C चार्जिंग पोर्ट का उपयोग करेंगे. इसका मतलब ये हुआ कि आने वाले समय में बहुत जल्द अब iPhone भी C टाइप के चार्जर से चार्ज हो सकेंगे! अभी iPhone के साथ कस्टमर को सिर्फ डेटा केबल तो मिलता है, पर एडॉप्टर नहीं मिलता है.
यूरोपीय संघ के कानून का दबाव
आपको बता दें कि यूरोपीय संघ ने हाल ही में नए कानून को औपचारिक रूप दिया है, जिसमें डेटा ट्रांसफर चार्ज करने के लिए USB-C पर स्विच करने के लिए अधिकांश व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक्स की आवश्यकता होगी. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब, पहली बार Apple ने यह पुष्टि की है कि उसे इस नए विनियमन का पालन करना होगा, भले ही कंपनी अभी भी WSJ का हवाला देते हुए नए सामान्य चार्जर नियमों के आधार पर मौलिक रूप से असहमत है.
iPhone मानना नहीं चाहता ये कानून पर मजबूर है
कंपनी के वर्ल्डवाइड मार्केटिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जोसविएक ने पुष्टि की. जोसविएक ने बताया कि यूएसबी-सी और लाइटनिंग दुनिया के दो सबसे लोकप्रिय कनेक्टर हैं, जिनमें एक अरब से अधिक लोग लाइटनिंग केबल का उपयोग करते हैं. जोसविएक ने कहा कि यूरोपीय संघ के कानून निर्माता और एप्पल एक सामान्य चार्जर विनियमन के विचार के बारे में अभी भी थोड़े असहमत हैं.
गौरतलब है कि भारत में भी iPhone का निर्माण हो रहा है. इसके बाद एक्सपोर्ट में तेजी देखने को मिल रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अप्रैल से अब तक 1 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के आईफोन का भारत से निर्यात किया गया है. उम्मीद है कि मार्च 2023 तक यह 2.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. यानी अप्रैल से अब तक निर्यात किए गए 1.3 अरब डॉलर मूल्य का लगभग दोगुना. यह दर्शाता है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. भारत में बने iPhone मुख्य रूप से यूरोप और मध्य पूर्व में भेज जा रहे हैं.
PLI स्कीम का अहम रोल
मोदी सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं. इनमें परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भी शामिल है. इस वजह से दुनिया की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही हैं और भारत से निर्यात लगातार बढ़ा रही हैं. बता दें कि कंपनियों को भारत में सामान बनाने के लिए आकर्षित करने के मद्देनजर सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम शुरू की है. PLI स्कीम के तहत केंद्र सरकार अगले पांच साल के दौरान भारत में सामान बनाने वाली कंपनियों को 1.46 लाख करोड़ रुपए का प्रोत्साहन देगी. इसका उद्देश्य घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और आयात बिल में कटौती करना है.
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