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Apple ने बनाई बड़ी योजना, वर्ष 2025 तक भारत में शिफ्ट होगा इतने प्रतिशत कारोबार
दुनियाभर के संकट के बीच भारत के बाजार के लिए एक और अच्छी खबर निकलकर सामने आई है. बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार टेक कंपनी एप्पल दो सालो में कारोबार के बडे हिस्से को टांसफर कर सकती है.
ललित नारायण कांडपाल 2 years ago
एक ओर भारत की इकोनॉमी जहां तेजी से आगे बढ़ रही है उसके कारण हमारी जीडीपी में भी इजाफा हो रहा है. अब बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के हवाले से ऐसी खबर आ रही है कि नामी टेक कंपनी एप्पल अपने कारोबार के बड़े हिस्से को अगले 2 सालों में भारत में शिफ्ट कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो देश में जहां उत्पादन में इजाफा होगा वहीं दूसरी ओर नौकरियों के भी अवसर पैदा हो सकते हैं. ये जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट में सामने आई है. BofA की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर Apple के वेंडर्स यहां बढ़ते हैं तो iPhone मैन्युफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी और भी बढ़ सकती है.
क्या कहती है बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट
बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन के लिए केंद्र की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत, तकनीकी दिग्गज ऐप्पल 20024-25 (वित्त वर्ष 25) तक अपने आईफोन के वैश्विक उत्पादन का 18 प्रतिशत से अधिक भारत में स्थानांतरित कर सकती है। FY23 में, वैश्विक iPhone उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत थी. पीएलआई योजना को पहली बार 6 अक्टूबर, 2020 को अधिसूचित किए जाने से पहले यह जीरो थी. उसी वर्ष, केंद्र ने फॉक्सकॉन होन हाई, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन को मंजूरी दी, जो सभी भारत में एप्पल के अनुबंध निर्माता हैं. रिपोर्ट कहती है कि आने वाले समय में एप्पल के वेंडर्स की संख्या में तेजी से इजाफा होता है तो आईफोन मैन्युफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी आने वाले समय में और बढ़ जाएगी.
अभी भारत में कितनी है एप्पल की हिस्सेदारी
रिपोर्ट का मानना है कि आने वाले समय में एप्पल की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है अगर वह अपने बड़े पैमाने के विक्रेताओं को भारत में भी विस्तार करने के लिए कहता है तो कंपनी इस बारे में सोच सकती है. भारत में बने एप्पल की सामर्थ्य में सुधार हो सकता है. मौजूदा समय में एप्पल अपने समूचे प्रोडक्शन का सिर्फ 4 प्रतिशत ही भारत में सेल करता है.
भारत में कितने है एप्पल के वेंडर
अगर चीन के और भारत के वेंडरों की संख्या का आंकल करें तो मौजूदा समय में Apple के वर्तमान में चीन में एप्पल के 151 वेंडर काम कर रहे हैं जबकि भारत में उसके सिर्फ 14 वेंडर हैं. इनमें से अधिकांश विक्रेता दक्षिणी भारत में स्थित हैं, जो अनुबंध निर्माताओं, फॉक्सकॉन और पेगाट्रॉन (तमिलनाडु) और विस्ट्रॉन (कर्नाटक) के करीब हैं. रिपोर्ट के निष्कर्षों से पता चला है कि पीएलआई योजना के दो साल के भीतर, वित्त वर्ष 23 में भारत से आईफोन का निर्यात बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये हो गया है. FY22 में यह 11,000 करोड़ रुपये था. इसमें और तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि इस साल फरवरी से यह पहले ही मासिक निर्यात के 1 अरब डॉलर के रन-रेट पर पहुंच चुका है.
रिपोर्ट में भारत सरकार की पीएलआई स्कीम के बारे में कहा गया है कि 38,000 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम ने स्थानीय उत्पादन में निर्यात को सुधारने में भी मदद की है. अब ये 16 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यही नहीं इसके अलावा, ऐप्पल का अपने नए आईफ़ोन का निर्माण करने का निर्णय भारत के बड़े मैन्युफक्चरिंग स्थलों में से एक होने की क्षमता में बढ़ते विश्वास का संकेत है, क्योंकि इसका उद्देश्य चीन के बाहर मैन्युफैक्चरिंग में विविधता लाना है.
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