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GroupM ESP ने भारतीय खेल प्रायोजन पर 'Sporting Nation' रिपोर्ट का 12वां एडिशन किया लॉन्च
जैसे-जैसे खेलों से जुड़ाव बढ़ रहा है और दर्शकों की पसंद बदल रही है, भारत की खेल अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित होती रहेगी और इसे एक तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में मजबूत बनाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
GroupM India की एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स डिवीजन GroupM ESP ने आज Sporting Nation रिपोर्ट का 12वां एडिशन लॉन्च किया. यह एक अनोखी रिपोर्ट है, जो भारत में बदलते स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप (खेल प्रायोजन) पर गहराई से विश्लेषण करती है.
भारतीय खेल प्रायोजन उद्योग की ग्रोथ
भारत के स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप सेक्टर में 6% की सालाना वृद्धि हुई और 2023 में यह ₹16,633 करोड़ को पार कर गया. भारत का कुल स्पोर्ट्स मार्केट अब $2 बिलियन के करीब पहुंच रहा है और 2008 से इसमें 7 गुना बढ़ोतरी हुई है. पिछले 10 सालों में भारत का खेल उद्योग 3.6 गुना बढ़ा है, जिससे यह एक मजबूत बिजनेस सेक्टर बन गया है. पिछले 17 सालों में 13% CAGR के साथ यह इंडस्ट्री लगातार बढ़ रही है.
2024 में खेल प्रायोजन की स्थिति
2024 में स्पॉन्सरशिप ग्रोथ केवल 1% रही क्योंकि IPL और ICC ने अपने राइट्स साइकिल को रीसेट किया और टीम इंडिया ने 2023 की तुलना में 20 मैच कम खेले. हालांकि, कम मैचों के बावजूद भारतीय खेल बाजार मजबूत और स्थिर बना रहा.
एथलीट एंडोर्समेंट में रिकॉर्ड वृद्धि
2024 में एथलीट एंडोर्समेंट ₹1,224 करोड़ तक पहुंच गया, जो 2023 के ₹927 करोड़ से 32% अधिक है. यह ग्रोथ सिर्फ क्रिकेट से नहीं, बल्कि नए उभरते खेलों की वजह से भी हुई. नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु और मनु भाकर जैसे खिलाड़ियों के कारण गैर-क्रिकेट एंडोर्समेंट में 46% की वृद्धि देखी गई. ओलंपिक प्रभाव की वजह से नए खेलों की स्पॉन्सरशिप 19% बढ़कर ₹2,461 करोड़ हो गई. खासतौर पर डिस्टेंस रनिंग (लंबी दौड़) का योगदान इस बाजार का 25% रहा, जो भारत में फिटनेस और एंड्योरेंस स्पोर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है.
लीडर्स की राय
GroupM South Asia के COO अश्विनी पद्मनाभन ने कहा कि "भारतीय खेल उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है. क्रिकेट अब भी मुख्य खेल है, लेकिन गैर-क्रिकेट खिलाड़ी, ओलंपिक का प्रभाव और डिजिटल क्रांति इसे बदल रहे हैं. ब्रांड अब स्पोर्ट्स को ग्राहकों से जुड़ने के एक बेहतरीन मंच के रूप में देख रहे हैंय. यह सिर्फ संख्या की ग्रोथ नहीं, बल्कि एक पूरी इंडस्ट्री का बदलाव है, जो अब ज्यादा डिजिटल, इनोवेटिव और विविध हो चुकी है."
GroupM India के एंटरटेनमेंट और स्पोर्ट्स कंटेट के एमडी विनित कारनिक ने कहा कि "2008 से भारतीय खेल अर्थव्यवस्था 7 गुना बढ़कर $2 बिलियन के करीब पहुंच गई है. पारंपरिक खेल अभी भी मजबूत हैं, लेकिन असली बदलाव नए खेलों, खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू और डिजिटल स्पेंडिंग में दिख रहा है. मीडिया स्पेंडिंग में 25% की बढ़त हुई है और खिलाड़ियों की एंडोर्समेंट वैल्यू ₹1,224 करोड़ तक पहुंच गई है. यह दिखाता है कि ब्रांड अब खिलाड़ियों पर बड़ा दांव लगा रहे हैं. आगे इनोवेशन और डिजिटल एंगेजमेंट से भारतीय खेलों की व्यावसायिक सफलता और बढ़ेगी."
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