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महाराष्ट्र रेरा ने डेवलपर्स पर कसी नकेल, 11 हजार हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को भेजा नोटिस
महाराष्ट्र में होने वाली करीब 11000 परियोजनाओं में से, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी एमएमआर, जिसमें आसपास के उत्तरी कोंकण क्षेत्र में सबसे अधिक 5,231 लैप्स प्रोजेक्ट हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MAHARERA) ने रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. दरअसल, महाराष्ट्र रेरा ने लैप्स हाउसिंग प्रोजेक्ट की जांच शुरू कर दी है और लगभग 11,000 ऐसी परियोजनाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से अधिकांश मुंबई महानगर क्षेत्र में हैं. महाराष्ट्र रेरा ने रियल एस्टेट डेवलपर्स को चेतावनी दी है कि अगर 30 दिनों के भीतर उन्हें कोई रिस्पांस नहीं मिलता है, तो परियोजनाओं का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड या कैंसल किया जा सकता है. तो आइए आपको इस पूरे मामले की जानकारी देते हैं.
इन डेवलपर्स को भेजा नोटिस
महाराष्ट्र रेरा की ओर से उन डेवलपर्स को नोटिस जारी किए गए हैं, जो प्रोजेक्ट की कंप्लीशन डेट शुरू में रेगुलेटर को प्रस्तुत करने के बाद भी अपने प्रोजेक्ट का स्टेटस और संबंधित जानकारी को महाराष्ट्र रेरा के साथ अपडेट करने में फेल रहे हैं. महारेरा ने इस अनियमितता पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और लगभग 10,773 परियोजनाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. रेगुलेटर ने एक बयान में कहा कि ये लैप्स प्रोजेक्ट्स मई 2017 से उसके पास रजिस्टर्ड थीं. महारेरा ने चेतावनी दी कि यदि 30 दिनों के भीतर कोई को जवाब नहीं मिलता है तो इन परियोजनाओं का रजिस्ट्रेशन कैंसल या सस्पेंड कर किया जा सकता है. साथ ही फ्लैट्स की सेल पर प्रतिबंध और बैंक खाते फ्रीज किए जा सकते हैं.
एमएमआर में लैप्स प्रोलेक्ट्स सबसे ज्यादा
महाराष्ट्र में लैप्स होने वाली 10,773 परियोजनाओं में से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी आसपास के उत्तरी कोंकण क्षेत्र के सबसे अधिक 5,231 लैप्स प्रोजेक्ट हैं. इसके बाद पुणे क्षेत्र में 3,406, नासिक में 815, नागपुर में 548, संभाजी नगर में 511,अमरावती में 201, दादरा और नगर हवेली 43 और दमन एवं दीव 18 परियोजनाएं शामिल हैं. लैप्स प्रोजेक्ट्स के डेवलपर्स को फॉर्म 4 के साथ एक ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (OC) जमा करने या प्रोजेक्ट्स के एक्सपेंशन की मांग करनी पड़ती है. इस आवेदन को अपेक्षित दस्तावेजों के साथ संलग्न किया जाता है.
महाराष्ट्र रेरा ने शुरू की कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक महाराष्ट्र रेरा ने परियोजना के पंजीकरण को सीधे सस्पेंड या कैंसल करके, दंडात्मक कार्रवाई करके और ज्वाइंट डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार को ऐसी परियोजनाओं में फ्लैटों की किसी भी सेल और परचेज को रजिस्टर्ड नहीं करने का निर्देश जारी करके कार्रवाई शुरू की है. इसमें कहा गया है कि ऐसी परियोजनाओं से जुड़े बैंक अकाउंट्स तक को फ्रीज किए जा सकते हैं. रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 11(1)(बी), (सी), (डी) और (ई) के तहत प्रत्येक परियोजना की तिमाही प्रगति रिपोर्ट को अपडेट करना अनिवार्य होता है. अगर प्रोजेक्ट अधूरा रहता है तो बिल्डर को समय सीमा विस्तार आवेदन जमा करना होगा. वैकल्पिक रूप से, यदि परियोजना शुरू करने में कोई समस्या है, तो डी-रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना आवश्यक हो जाता है.
रियल एस्टेट सेक्टर की माइक्रो मॉनेटरिंग भी शुरू
रेगुलेटर प्रावधानों के अनुसार, महाराष्ट्र रेरा ने कंप्लायंस सेल के माध्यम से कई लेवल पर रियल एस्टेट सेक्टर की माइक्रो मॉनेटरिंग शुरू की है. महाराष्ट्र रेरा के साथ रजिस्टर्ड प्रत्येक परियोजना को समय-समय पर वेबसाइट पर तिमाही रिपोर्ट और प्रोजेक्ट स्टेटस सामने रखाना होगा. महाराष्ट्र रेरा के अध्यक्ष मनोज सौनिक ने कहा, वर्तमान में, महाराष्ट्र में 10,773 रियल एस्टेट परियोजनाएं लैप्स हो गई हैं, जिसके कारण कई घर खरीदारों का निवेश फंस गया है.
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