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क्या Real Estate और घर खरीददारों की उम्मीदें पूरी करेगा बजट 2025, जानें एक्सपर्ट्स की राय?

बीते साल यानी 2024 में रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया. खासकर 10 करोड़ से 80 करोड़ रुपये तक की प्रीमियम प्रॉपर्टी की बिक्री में जोरदार उछाल देखा गया.

रितु राणा 1 year ago

हर बार नया साल एक नई उमंग और उम्मीदें लेकर आता है. इसी तरह नए साल के आते ही लोगों को नए बजट से भी काफी उम्मीदें रहती हैं. कई बार बजट लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरता है, तो कई बार उन्हें निराश भी कर देता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण आने वाला है और हर किसी की नजरें उस पर टिकी हैं. खासकर रियल एस्टेट सेक्टर, जो भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. रियर एस्टेट सेक्टर के साथ ही घर खरीददार भी इस बार के बजट में बड़े बदलावों की उम्मीद कर रहे हैं. तो चलिए जानते हैं रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स बजट से क्या उम्मीदें रख रहे हैं  और इससे उनके साथ साथ घर खरीदारों को क्या फायदा होगा?

स्टांप ड्यूटी में कटौती की जरूरत: खरीदारों को मिलेगी राहत

क्रेडाई एनसीआर के अध्यक्ष और गौड़ ग्रुप (Gaur Group) के सीएमडी मनोज गौड़ का कहना है कि रियल एस्टेट देश की आर्थिक तरक्की का आईना है. हम उम्मीद करते हैं कि सरकार विकास की रफ्तार तेज करने के लिए जरूरी कदम उठाएगी. हमारी सबसे बड़ी मांगों में से एक है स्टांप ड्यूटी को कम करना, क्योंकि इसकी बढ़ती दरें खरीदारों पर बड़ा वित्तीय बोझ डाल रही हैं. साथ ही, सेक्शन 80 (सी) के तहत टैक्स छूट की सीमा को 1.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करना घर खरीदने की प्रक्रिया को और सरल बना सकता है. 

घर खरीदारों के लिए टैक्स राहत, हाउसिंग सेक्टर के लिए प्रोत्साहन 

बीपीटीपी (BPTP) के सीएफओ मानिक मलिक ने कहना है कि जैसे ही केंद्रीय बजट 2025-26 नजदीक आ रहा है, रियल एस्टेट क्षेत्र वृद्धि और स्थिरता को बढ़ावा देने वाले प्रभावी उपायों की प्रतीक्षा कर रहा है. विभिन्न स्थानों पर बढ़ती आवासीय मांग को देखते हुए, घर खरीदारों के लिए कर राहत और हाउसिंग सेक्टर के लिए प्रोत्साहन बेहद जरूरी हैं. स्थायी विकास और बुनियादी ढांचे के सुधार को बढ़ावा देने वाली नीतियां न केवल आर्थिक वृद्धि में सहायक होंगी, बल्कि आवासीय मांग को भी प्रोत्साहित करेंगी. इसके अलावा, पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेंस) के लाभों का विस्तार और पुनर्निवेश मानकों में अधिक लचीलापन प्रदान करके हाउसिंग सेक्टर में और अधिक निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकता है. इन उपायों के साथ एक दूरदर्शी नीतिगत ढांचा न केवल इस क्षेत्र की वृद्धि को तेज करेगा, बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार सृजन का भी समर्थन करेगा, जो भारत के आर्थिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

हाउसिंग लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जाए

सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) के फाउंडर और चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि अगर हाउसिंग लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी जाए, तो यह घर खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत होगी. इससे लाखों लोगों को अपना घर खरीदने का सपना पूरा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि रियल एस्टेट को इंडस्ट्री का दर्जा मिलने से 200 से ज्यादा जुड़े क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी. यह कदम रोजगार के नए अवसर और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगा. इसके अलावा, 1 करोड़ रुपये तक के हाउसिंग लोन पर 5 लाख रुपये की सब्सिडी से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी राहत मिलेगी.

रियल एस्टेट को 'इंडस्ट्री' का दर्जा मिले
एसकेए ग्रुप (SKA Group)  के डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा कि रियल एस्टेट देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले सेक्टरों में से एक है. अगर इसे इंडस्ट्री का दर्जा मिल जाए, तो इससे इस सेक्टर को और मजबूती मिलेगी. साथ ही, 'सभी के लिए घर' का सपना भी जल्दी पूरा होगा. ट्राईसोल रेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन शर्मा के अनुसार रियल एस्टेट को 'इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस' देने से सेक्टर में बड़ा बदलाव आ सकता है. इससे सस्ते और लंबे समय के लोन आसानी से मिल पाएंगे, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहेगा. उधर, स्पेक्ट्रम मेट्रो के वाइस प्रेजीडेप्रेजीडेंट सेल्स एंड मार्केटिंग अजेंद्र सिंह ने कहा, “2024 में वाणिज्यिक रियल एस्टेट में तेजी से वृद्धि हुई और इस साल भी बढ़ने की उम्मीद है. बजट 2025 से पहले, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार इस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देगी और स्वीकृतियों को सुव्यवस्थित करने के लिए एकल-खिड़की निकासी प्रणाली लागू करेगी.

टैक्स राहत, वित्त तक बेहतर पहुंच और बाजार में तरलता बढ़ाई जाए

कॉन्शियंट के बिजनेस हेड मोहित अग्रवाल ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि आगामी बजट में आवासीय रियल एस्टेट बाजार में मांग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की जाएगी, जो भारत की आर्थिक वृद्धि के एक अहम स्तंभ के रूप में कार्य करेगा. रियल एस्टेट क्षेत्र जो देश के जीडीपी में लगभग 8% का योगदान करता है, रोजगार सृजन और कई अन्य उद्योगों में विकास को प्रोत्साहित करता है. इस सकारात्मक विकास को बनाए रखने के लिए, सरकार द्वारा घर खरीदने वालों और डेवलपर्स के सामने आने वाली वित्तीय चुनौतियों को दूर करने के लिए कारगर उपायों की जरूरत है. इसमें टैक्स राहत, वित्त तक बेहतर पहुंच और बाजार में तरलता को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन शामिल हो सकते हैं. इन उपायों पर ध्यान केंद्रित करके, 2025-26 का बजट रियल एस्टेट क्षेत्र के योगदान को और बढ़ा सकता है, जो न केवल भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि में मदद करेगा, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और विकास को भी सुनिश्चित करेगा.

सिंगल विंडो क्लीयरेंस से आसान होगी प्रोजेक्ट मंजूरी
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने कहा कि अगर सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू होता है, तो डेवलपर्स को मंजूरी लेने में कम समय लगेगा. इससे प्रोजेक्ट्स जल्दी पूरे होंगे और घर खरीदने वालों को जल्दी घर मिल सकेंगे। HCBS डिवेलपमेंट्स के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ सहारण ने कहा कि आगामी बजट से हमारी सबसे बड़ी उम्मीद है कि रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा मिले. यह कदम खासकर मजदूरों के लिए रोजगार के नए मौके पैदा करेगा और सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाएगा. साथ ही, सिंगल विंडो क्लियरेन्स  सिस्टम लागू हो और ऐसी नीतियां आएं जो घर खरीदना आम लोगों के लिए और आसान बनाएं.


टिकाऊ विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली नीतियों की जरूरत

नियोलिव के संस्थापक और सीईओ मोहित मल्होत्रा का कहना है कि जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2025-26 नजदीक आ रहा है, रियल एस्टेट सेक्टर उन नीतिगत घोषणाओं का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, जो विकास, प्रगति और सामर्थ्य को बढ़ावा दे सकती हैं. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आवासीय मांग में वृद्धि की संभावना को देखते हुए हमारा मानना है कि घर खरीदने वालों को लक्षित कर राहत और हाउसिंग सेक्टर के लिए प्रोत्साहन जरूरी हैं. साथ ही, टिकाऊ शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली नीतियों की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है. एक ऐसा संतुलित बजट, जो विशेष रूप से उभरते टियर-2 शहरों में निवेश को बढ़ावा दे और सामर्थ्य को सुनिश्चित करे, आर्थिक वृद्धि को तेज कर सकता है और आवासीय मांग में बड़ा उछाल ला सकता है. सही कदमों के साथ, यह बजट मध्यम वर्ग को घर खरीदने की नई उम्मीद दे सकता है.

घर खरीदने के लिए प्रोत्साहन और ब्याज दरों पर कंट्रोल
रहेजा डेवलपर्स के वाइस प्रेसिडेंट मोहित कालिया ने कहा कि सस्ते घरों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. अगर इनकम टैक्स में छूट बढ़ाई जाए, तो लोग ज्यादा घर खरीदने के लिए प्रेरित होंगे. ग्रुप 108 के एमडी संचित भूटानी ने कहा कि सेक्शन 80C के तहत REIT निवेशकों को टैक्स इंसेंटिव देना और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू करना भी इस क्षेत्र की स्थिर ग्रोथ के लिए जरूरी कदम होंगे. अगर सिंगल विंडो क्लियरेन्स सिस्टम लागू किया जाए, तो कामकाज में आसानी होगी और प्रोजेक्ट जल्दी पूरे होंगे.


सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम का प्रावधान समय की मांग

रॉयल ग्रीन रियल्टी के प्रबंध निदेशक यशांक वासन ने कहा है कि आगामी बजट 2025-26 रियल एस्टेट उद्योग, विशेषकर टियर-2 शहरों में, नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत करता है. इंदौर, बहादुरगढ़, सोनीपत जैसे शहरों में निवेश को प्रोत्साहित करने और शहरीकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता है, जो आवासीय और वाणिज्यिक दोनों खंडों के विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी को बढ़ावा दें. हम आवास सामर्थ्य में सुधार के लिए गृह ऋण ब्याज पर उच्च कर कटौती और सभी क्षेत्रों में सुव्यवस्थित जीएसटी दरों जैसी नीतियों की आशा करते हैं. साथ ही, परियोजनाओं में देरी और अतिरिक्त लागतों को कम करने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम का प्रावधान समय की मांग है. अगर इन लक्ष्यों को प्राथमिकता दी जाती है, तो टियर-2 शहर न केवल आर्थिक विकास के हब बन सकते हैं, बल्कि यह रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास को भी मजबूती प्रदान करेगा. इस प्रकार, यह बजट भारत के शहरी परिवर्तन को गति देने के साथ-साथ रोजगार और बेहतर जीवन स्तर की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगा.

कंस्ट्रक्शन के सामान पर कम हो जीएसटी

क्रीवा और कनोडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. गौतम कनोडिया का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है, और हमें उम्मीद है कि आने वाला बजट ऐसे सुधार लाएगा, जो बाजार में पैसों की कमी को दूर करेंगे. सरकार को टैक्स में राहत देने और कंस्ट्रक्शन के सामान पर जीएसटी कम करने पर ध्यान देना चाहिए. रॉयल एस्टेट ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पीयूष कंसल का कहना है कि 2024 में लग्जरी रियल एस्टेट ने पूरे सेक्टर में अच्छी बढ़त दिलाई। 2025 में भी यह रफ्तार जारी रहने की उम्मीद है. हमें इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं. 

2024 में ऐसा थी बाजार की स्थिति
बीते साल, रियल एस्टेट सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया, खासकर प्रीमियम सेगमेंट की ब्रिकी अधिक हुई. जानकारी के अनुसार 10 करोड़ से 80 करोड़ रुपये तक की प्रॉपर्टी की बिक्री में जोरदार उछाल देखा गया. वहीं, मिड और लोअर मिड सेगमेंट के लिए सप्लाई में कमी एक बड़ी चिंता बनी रही. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2025 में इस असंतुलन को दूर करने के लिए ठोस नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार सेक्टर के सुधारों पर ध्यान दे, तो रियल एस्टेट बाजार में व्यापक बदलाव हो सकता है. रियल एस्टेट सेक्टर न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ है, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और निवेश का प्रमुख साधन भी है. बजट 2025 से इस क्षेत्र को नई दिशा देने की पूरी उम्मीद है.


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