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घर के रहेंगे न घाट के: चाचा का साथ छोड़ने वाले अजित को BJP भी छोड़ देगी अकेला?

महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है. भाजपा अजित पवार से दूरी बनाने की सोच रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

लोकसभा चुनाव के नतीजे आम होते ही महाराष्ट्र की सियासत में उथल-पुथल मची हुई है. अपने चाचा की पार्टी तोड़ने वाले अजित पवार (Ajit Pawar) के बुरे दिनों की शुरुआत होने की प्रबल संभावना बनती नजर आ रही है. माना जा रहा है कि कमजोर प्रदर्शन वाले अजित को भाजपा ज़ोरदार झटका देने की तैयारी में है. भाजपा लोकसभा चुनाव में महज एक सीट जीतने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को महायुति से बाहर कर सकती है. यदि ऐसा होता है, तो अजित पवार न घर के रहेंगे और न घाट के.     

पहले ही जताई थी आशंका
अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार का साथ छोड़कर भाजपा से हाथ मिलाया थमा था. उन्होंने सीनियर पवार की पार्टी NCP पर भी कब्जा कर लिया था. शरद गुट के कई विधायकों ने उस वक्त अजित का साथ दिया था. अजित और उद्धव ठाकरे की शिवसेना तोड़ने वाले एकनाथ शिंदे के साथ मिलाकर भाजपा ने महाराष्ट्र में महायुति (ग्रैंड अलांयस) की सरकार बनाई. हालांकि, भाजपा के कई नेता अजित के साथ आने से खफा थे. उन्होंने आशंका भी व्यक्त की थी कि अजित का साथ पार्टी को भारी पड़ सकता है. अब जब लोकसभा चुनाव में भाजपा को झटका लगा है, तो आलाकमान को भी अहसास होने लगा है कि अजित को दूर करने में ही भलाई है.

RSS भी नहीं है खुश 
माना जा रहा है कि बीजेपी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले अजित पवार से नाता तोड़ सकती है. पार्टी एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के साथ राज्य की 288 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में छपे लेख में भी महाराष्ट्र में बीजेपी की हार के लिए अजित पवार से गठबंधन को प्रमुख कारण बताया गया है. इसके बाद संभावना बढ़ गई है कि भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले अजित गुट वाली एनसीपी से नाता तोड़ ले. 

भाजपा की छवि हुई प्रभावित 
ऑर्गनाइजर में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि अजित के साथ गठबंधन से भाजपा की ब्रैंड वैल्यू कम हुई है. क्यों अजित के आने से पार्टी भ्रष्टाचार के मोर्चे पर मुखर नहीं हो पाई. कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि RSS अजित और भाजपा गठजोड़ से नाराज था. इसी वजह से संघ का एक बड़ा कैडर लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए नहीं निकला. खासतौर पर एनसीपी वाली सीटों पर यह स्पष्ट तौर पर देखने को मिला. ऐसे में यदि BJP विधानसभा चुनाव में भी अजित को अपने साथ रखती है, तो उसके कुछ नेताओं के साथ-साथ संघ कार्यकर्ता निष्क्रिय बने रह सकते हैं और इसका पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है.

अजित के खिलाफ लोगों में गुस्सा
अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को लोकसभा चुनाव में केवल एक सीट पर जीत मिली है. अजित की पत्नी सुनेत्रा पवार भी चुनाव हारी हैं. बात केवल इतनी ही नहीं है, अजित पवार जिस बारामती विधानसभा क्षेत्र से पिछले 33 साल से विधायक हैं. वहां उसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अजित को लेकर लोगों में कितना गुस्सा है. ऐसे में अगर भाजपा उन्हें अपने साथ बनाए रखती है, तो यह गुस्सा उसकी तरफ भी डायवर्ट हो सकता है. 


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