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मन में चुनाव लेकर योग के लिए कश्मीर गए थे मोदी, BJP ने बनाई है खास रणनीति
जम्मू -कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं. भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर कश्मीर पहुंचे. PM मोदी ने यहां योग किया और उसके बाद लोगों के साथ फोटो भी खिंचवाई. खासकर महिलाओं में PM मोदी को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला. प्रधानमंत्री योग दिवस के मौके पर अलग-अलग जगह जाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने कश्मीर को चुना. दरअसल, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए मोदी का कश्मीर को चुनना उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है. लोकसभा चुनाव में विपक्षी इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन के मद्देनजर भाजपा घाटी को लेकर बेहद सतर्क हो गई है. पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए फुलप्रूफ रणनीति तैयार करने में जुटी है.
2014 में हुए थे चुनाव
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर PM मोदी ने कश्मीरी आवाम के बीच जाकर यह दिखाने का प्रयास किया है कि उन्हें कश्मीर के लोगों की फिक्र है. जम्मू-कश्मीर में चुनाव कब होंगे, ये अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन माना जा रहा है कि जल्द ही इसे लेकर तस्वीर साफ हो सकती है. जम्मू कश्मीर में आखिरी चुनाव 2014 में हुए थे. इस चुनाव में भाजपा ने 87 में से 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद राज्य में भाजपा और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) गठबंधन की सरकार बनी. यह सरकार करीब तीन साल तक चली. BJP के समर्थन वापस लेने के चलते महबूबा मुफ्ती की सरकार 19 जून 2018 को गिर गई. उसके बाद अब राज्य में विधानसभा चुनाव होंगे.
2 लोकसभा सीटों पर लड़ा चुनाव
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केवल हिंदू बहुल जम्मू और उधमपुर पर ही उम्मीदवार उतारे थे. राज्य की मुस्लिम बहुल तीन सीटों पर BJP ने खाली छोड़ दिया था. जिन 2 सीटों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा, वहां उसे जीत मिली. शेष तीन में से दो सीटें नेशनल कॉन्फ्रेंस और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई. इस चुनाव में BJP ने 24.36% वोट हासिल किए. नेशनल कॉन्फ्रेंस को 22.30%, कांग्रेस ने 19.38% और पीडीपी को 8.48% वोट मिले. 2019 के लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की छह सीटे थीं. जिनमें से तीन सीटें BJP और 3 नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जीती थीं.
ऐसे मिलेगी सत्ता
भाजपा राज्य में लोकसभा चुनाव के नतीजों से खुश है, लेकिन लगभग इसी रणनीति को विधानसभा चुनाव में भी लागू करेगी. कहने का मतलब है कि उसका पूरा ध्यान हिंदू बहुल जम्मू पर होगा. जबकि मुस्लिम बहुल सीटों के लिए वह निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दे सकती है और छोटे दलों से तालमेल कर सकती है. पार्टी राज्य की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने से बचेगी. भाजपा भी अच्छे से जानती है कि मुस्लिम बहुल सीटों पर उसकी जीत मुश्किल हो सकती है, इसलिए वो निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करके और छोटे दलों को साथ लाकर सत्ता तक पहुंच सकती है.
नतीजों से उत्साहित
लोकसभा चुनाव में राज्य के दो बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री एवं PDP लीडर महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस लीडर एवं पूर्व CM उमर अब्दुल्ला को हार का सामना करना पड़ा है. इससे यह संदेश जाता है कि राज्य की जनता इन दोनों से नाखुश है, भाजपा इसे के बड़े मौके के तौर पर देख रही है. हालांकि, यह भी सही है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग मुद्दों पर लड़ा जाता है. भाजपा आतंकवाद में कमी और राज्य के विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ेगी. वहीं, विपक्षी दल अनुच्छेद-370 हटाए जाने के वक्त सामने आई नाराजगी को भुनाने की कोशिश करेंगे. भाजपा अनुच्छेद-370 हटाने को राज्य के लिए ऐतिहासिक फैसला करार देती है, ऐसे में इस चुनाव में उसकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.
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