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क्या डिप्टी स्पीकर पर चलेगी INDIA की या NDA का झंडा ही रहेगा बुलंद?
लोकसभा स्पीकर के चयन के बाद अब सवाल यह उठता है कि डिप्टी स्पीकर के पद पर कौन बैठेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा के स्पीकर पद पर ओम बिरला (Om Birla) विराज चुके हैं. बिरला को भाजपा के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन ने अपना उम्मीदवार बनाया था. जबकि विपक्षी गठबंधन की तरफ से के. सुरेश उम्मीदवार थे. हालांकि, आखिरी वक्त पर कांग्रेस ने मतविभाजन का फैसला छोड़ दिया और बिरला को ध्वनिमत से स्पीकर चुन लिया गया. अब सवाल यह उठता है कि क्या डिप्टी स्पीकर की कुर्सी पर विपक्ष अपना उम्मीदवार बैठा पाएगा? लोकसभा में यह अघोषित परंपरा रही है कि सत्ता पक्ष सर्वसम्मति से स्पीकर पद अपने पास रखता है और डिप्टी स्पीकर की कुर्सी विपक्ष को दी जाती है. लेकिन जिस तरह से इस बार स्पीकर को लेकर खींचतान हुई है उससे लगता नहीं कि NDA विपक्ष को डिप्टी स्पीकर की कुर्सी सौंपेगा.
TDP को मिल सकता है पद
फिलहाल डिप्टी स्पीकर के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों खामोश हैं. हालांकि, माना जा रहा है कि कांग्रेस अपने 8 बार के सांसद के. सुरेश की दावेदारी के लिए जोर लगा सकती है. उधर, भाजपा भी इस मुद्दे पर बड़ा दांव खेल सकती है. यदि डिप्टी स्पीकर को लेकर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बनती है, तो भाजपा अपनी सहयोगी TDP के किसी सांसद को उम्मीदवार बना सकती है. TDP चद्रबाबू नायडू की पार्टी है और मोदी सरकार नायडू और नीतीश कुमार के सहयोग से ही खड़ी हुई है. ऐसे में डिप्टी स्पीकर की कुर्सी TDP के सहयोगी का तोहफा होगी.
स्पीकर का क्या होगा रुख?
17वीं लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली थी. विपक्ष द्वारा पद भरने की मांग लगातार अनसुनी की गई थी. हालांकि, इस बार स्थिति काफी अलग है. विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व कर रही कांग्रेस पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है. सामने आ रही खबरों के मुताबिक, भाजपा ने अभी तक इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों से चर्चा नहीं की है. पहले पार्टी अपने सहयोगियों के साथ एक राय कायम करेगी और फिर विपक्ष को सूचित किया जाएगा. वैसे, यह भी देखने वाली बात होगी कि लोकसभा अध्यक्ष का रुख क्या होता है. क्या वे इस बार डिप्टी स्पीकर रखने में रुचि दिखाएंगे या पिछली बार कि तरह बगैर डिप्टी स्पीकर काम करेंगे.
पिछली बार नहीं माने नियम
विपक्ष डिप्टी स्पीकर पद भरने को लेकर सरकार पर दबाव डाल सकता है. पार्टी लीडर जयराम रमेश का कहना है कि हम निश्चित रूप से उपसभापति पद के लिए दावा करेंगे. चाहे वह भाजपा का उम्मीदवार हो या उसके सहयोगी दलों का, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इस संबंध में संविधान के अनुच्छेद 93 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लोकसभा में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होना आवश्यक है. ये बात अलग है कि पिछली बार सरकार ने इस नियम का उल्लंघन किया, जो पूरी तरह से असंवैधानिक है. अनुच्छेद 93 में कहा गया है - ' लोकसभा यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगी. जब भी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त होगा, सदन किसी अन्य सदस्य को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के रूप में चुन सकेगा'.
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