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FM निर्मला सीतारमण के सामने हैं कौन- कौन सी चुनौतियां, क्‍या नतीजों से बढ़ गई है चुनौती? 

जॉब अपॉचुर्निटी ऐसा क्षेत्र है जहां सरकार पर तेजी से काम करने का दबाव होगा क्‍योंकि सहयोगी दलों भी ऐसा चाहते हैं. यही नहीं आने वाले दिनों में कई राज्‍यों में चुनाव हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

मोदी 3.0 में मंत्रालयों का बंटवारा होने के बाद ये साफ हो गया है कि इस बार पीएम मोदी ने कई मंत्रियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव नहीं किया है. इनमें वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर टॉप फोर कैबिनेट के उनके कई साथी हैं. लेकिन 400 सीटों की उम्‍मीद कर रहे एनडीए में बीजेपी जिस तरह 240 सीटों पर रूकी क्‍या उसका कोई असर नीतियों पर भी पड़ने वाला है. आखिर अब निर्मला सीतारमण के लिए दूसरे टर्म में बतौर मुख्‍यमंत्री क्‍या चुनौतियां रहने वाली हैं. 

वित्‍त मंत्री के सामने क्‍या हैं बड़ी चुनौतियां? 
वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण को भले ही अहम मंत्रालय फिर मिला हो लेकिन अगर नतीजों पर नजर डालें तो ये अपने आप में और चुनौतीपूर्ण मंत्रालय साबित होने वाला है. सबसे पहले वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण को अगले महीने बजट पेश करना है. उन्‍होंने चुनावों में जाने से पहले अंतरिम बजट पेश किया था. लेकिन अब उन्‍हें पूर्ण बजट पेश करना है. ये बजट सरकार की सोच और उसकी कार्यशैली की दिशा को दिखाने वाला होगा. यही नहीं जॉब अपॉर्चुनिटी को बढ़ाना भी निर्मला सीतारमण के लिए एक बार फिर चुनौती पैदा करने वाला रहने वाला है.

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इस बार चुनावों में जिस तरह से इस मुद्दे को विपक्ष ने उठाया है ऐसे में सरकार इस मुद्दे को लेकर तेजी से काम करना चाहेंगी. पीएम मोदी ने देश के लिए 5 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्‍य निर्धारित किया है. ऐसे में रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से लेकर कई एक्‍सपर्ट ये भी कह चुके हैं कि अगर हमें उस लक्ष्‍य तक पहुंचना है तो उसके लिए ग्रोथ रेट को लगातार 8 प्रतिशत तक बनाए रखना होगा. तभी ऐसे लक्ष्‍य को हासिल किया जा सकता है. यही नहीं  ऑनलाइन गेमिंग पर लगाए गए 28 प्रतिशत जीएसटी का मामला अभी तक लगातार बना हुआ है. माना जा रहा है कि सरकार इस पर समीक्षा कर सकती है. 

जॉब अपार्चुनिटी क्रिएट करने का होगा प्रेशर 
इकोनॉमिेक एक्‍सपर्ट आकाश जिंदल कहते हैं कि उनके सामने कई चैलेंज हैं उनमें पहला वित्तिय घाटे को कम करना, वो वित्‍तीय घाटे को कितना जल्‍दी और कितना ज्‍यादा कम कर सकती हैं. जीडीपी ग्रोथ अच्‍छी है लेकिन प्रति व्‍यक्ति आय में कितना इजाफा कर सकती हैं ये भी एक बड़ा चैलेंज है. तीसरी चुनौती डायरेक्‍ट टैक्‍स और जीएसटी कलेक्‍शन, फॉरेक्‍स रिजर्व, एफडीआई इन्‍फ्लो को कैसे बढ़ाया जाए, घरेलू बचत और राज्‍यों को कैसे ज्‍यादा फंड उपलब्‍ध कराया जाए. आकाश जिंदल कहते हैं कि उन्‍हें अगले महीने बजट पेश करना है तो ऐसे में ऑयल इंपोर्ट को कम करने की क्‍या प्‍लॉनिंग की जाए इस पर भी काम करना है,

एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर के लिए बड़ा पैकेज कैसे घोषणा की जाए, इसके साथ ही 80 करोड़ बीपीएल परिवारों को दिए जा रहे फ्री फूड के लिए कैसे पैसा जुटाया जाए. पर्सनल इनकम टैक्‍स में कैसे राहत दी जाए. हालांकि महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में है, इसे लेकर आरबीआई ने जो बैंड दी हुई है उसके दायरे में है. महंगाई इस वक्‍त दुनिया के स्‍तर पर है. जॉब अपॉर्चुनिटी क्रिएट करने के लिए सरकार पर काफी दबाव होगा, चाहे सरकार अकेले आती या अब सहयोगी दल हैं तो ऐसे में और ज्‍यादा दबाव होगा. आने वाले दिनों में राज्‍यों के चुनाव भी होने हैं, तो ऐसे में सरकार को करना होगा. 

आखिर कैसे पैदा होंगे नौकरी के ज्‍यादा अवसर? 
नौकरी के ज्‍यादा अवसर पैदा होने को लेकर आकाश जिंदल कहते हैं कि मौजूदा समय में हम देख रहे हैं कि चीन में काफी चुनौतियां हैं. ऐसे में सरकार एफडीआई को यहां लाया जाए, उससे बड़े प्‍लांट लगें जो 15000 लोगों को रोजगार दे सकें. मौजूदा समय में दुनिया की परिस्थितियों को देखें तो भारत इसमें बेस्‍ट पोजीशन में है, हम इस मामले में बैटिंग पिच पर है. सरकार मैन्‍युफैक्‍चरिंग से लेकर पहले से ही सरकार काम कर रही है. एफडीआई को लाने पर काम करेगी जिससे ज्‍यादा से ज्‍यादा नौकरियों के अवसर पैदा हो सकेंगे. 
 


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