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यूपी नगर निगम चुनाव: मेयर सीट पर बड़ा अपडेट, डार्कहोर्स की है तलाश
बताया जा रहा है कि केंद्रीय समिति ने जहां दिल्ली में एमसीडी के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों को सेलेक्शन पर कड़ा रुख अपनाया है.
अभिषेक मेहरोत्रा 3 years ago
उत्तर प्रदेश में इस साल होने वाले मेयर के चुनाव के लेकर चर्चाएं बहुत जोरों पर है. सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने नगर निगम चुनावों को लेकर कमर कस ली है. अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि प्रत्याशी चयन को लेकर अभी सिर्फ प्रारंभिक स्तर पर हर निगम के 5-6 नामों पर चर्चा हो रही है, लेकिन चुनाव प्रबंधन को लेकर लगातार बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है.
उत्तर प्रदेश में कुल 17 नगर निगम हैं. जिनमे आगरा,अलीगढ़,अयोध्या,बरेली,फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर,लखनऊ, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद,प्रयागराज,सहारनपुर, शाहजहांपुर और वाराणसी शामिल हैं.इनमें शाहजहांपुर को हाल ही में नगर निगम की श्रेणी में लाया गया है.इस बार शाहजहांपुर मे नगर निगम के लिए पहली बार वोट डाले जाएंगे.
17 नगर निगमों में मेयर की सीट के टिकट को लेकर स्थानीय पार्टी नेता से लेकर डॉक्टर, समाजसेवी से लेकर बड़े बिजनेसमेन, एजुकेशनिस्ट से लेकर प्रोफेसर तक कई शख्सियतों के नाम कई जिलों के समाजिक, राजनैतिक और व्यापारिक वॉट्सऐप ग्रुपों की चर्चा का विषय बने हुए हैं.
ऐसे में प्रदेश के कई गणमान्य भी कई जगह हो रहे परिसीमन बदलाव के चलते खुद को भी इस रेस में जोड़ने से पीछ नहीं हैं. पर इन सबके बीच दिल्ली और लखनऊ से मिल रही खबर कह रही है कि
पार्टी का ध्यान इस बार नगर निगमों की मेयर सीट पर कुछ ज्यादा ही है.
बताया जा रहा है कि केंद्रीय समिति ने जहां दिल्ली में एमसीडी के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों को सेलेक्शन पर कड़ा रुख अपनाया है, उसी तर्ज पर अब प्रदेश की कार्यसमिति को भी प्रत्याशी चयन पर बहुत सावधानी बरतने को कहा गया है.उत्तर प्रदेश में पार्टी और संघ के बीच के गठजोड़ में पुल का काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारी का भी मानना है कि इस बार कई नगर निगमों में मेयर के चेहरे को लेकर पहले से ज्यादा रस्साकसी दिख रही है.
हिमाचल और गुजरात के चुनावों में जीत के प्रति आशान्वित पार्टी दिल्ली नगर निगम को लेकर जिस तरह ऊहापोह में दिख रही है, उसी तरह का कुछ माहौल उत्तर प्रदेश में भी देखा जा रहा है. कई नगर निगमों से दशकों से बीजेपी का कब्जा है, पर वहां काम उस अनुरूप नहीं हुए हैं, जैसी की जनअपेक्षा थी. ऐसे में पार्टी के अंदरूनी सर्वे में भी जनता की नाराजगी की बात सामने आई है. इसलिए पार्टी सर्वे को गंभीरता से लेते हुए फैसले करेगा, ऐसा कयास है.
वैसे विधानसभा चुनावों के दौरान कई नेताओं को मेयर पद का आश्वाशन देकर पार्टी ने लॉलीपॉप दी थी, पर शायद अब ये लॉलीपॉप झुनझुना बनकर रह जाएगी.
RSS की कितनी भूमिका
वैसे इन चुनावों में बीजेपी की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी अहम बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि चूंकि विधानसभा चुनावों में संघ के पूरे सपोर्ट के चलते पार्टी ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी. ऐसे में कुछ निगमों में संघ के हस्तक्षेप को भी स्वीकार किए जाने की संभावना है. वैसे पुराने अधिकारियों के ट्रांसफर के चलते टिकट के नए खिलाड़ी फिलहाल नए अधिकारियों से जुगत लगाने में जुटे हैं.
पार्टी कार्यकर्ता को मिलेगी प्राथमिकता
सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी कई जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देकर ये मेसेज भी देना चाहती है कि विधानसभा चुनावों के दौरान मजबूरी में बाहरियों को पार्टी का हिस्सा जरूर बनाया गया है पर पार्टी की प्रायोरिटी अपनों को ही होगी. साथ ही यूपी के नगर निगम चुनाव को लिए प्रत्याशी चयन के लिए जिम्मेदार समिति के सदस्यों को ये भी बता दिया गया है कि उनका चयन परिवारवाद से दूर ही रहना चाहिए.
ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेता बता रहे हैं कि कुछ निगमों के परिसीमन के चलते अभी फाइनल नाम तो तय नहीं किया गया है, पर संभावनाआों के आधार पर अमुक परिसीमन हुआ तो कौन प्रबल उम्मीदवार होगा, इस आधार पर ऐसे नामों पर फोकस किया जा रहा है जो कि डार्कहोर्स हैं, चुपचाप काम कर रहे हैं, उनको चुनाव के लिए तैयार रहने का इशारा दिया जा चुका है. दो हफ्ते बाद औपचारिक नाम का एलान होना बाकी है.
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