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सीरिया में हुआ तख्तापलट, आखिर कैसे इतने बिगड़ गए हालात, भारत पर इसका क्या होगा असर?

सीरिया (Syria) में सरकार और विद्रोहियों के बीच लंबे संघर्ष के बाद विद्रोहियों ने देश पर कब्जा कर लिया है. राष्ट्रपति बशर अल असद का मजबूत किला दमिश्क भी ढह गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सीरिया में 50 साल पुरानी असद परिवार की सत्ता एक झटके में ढह गई, राष्ट्रपति बशर अल असद को देश छोड़कर भागना पड़ा और रूस में राजनीतिक शरण लेनी पड़ी. वैसे तो सीरिया में विद्रोह का दौर और गृह युद्ध पिछले 13 साल से चल रहा है, लेकिन पिछले 13 दिन में हालात इतनी तेजी से बदले की असद सरकार उसे संभाल नहीं पाई. विद्रोहियों ने अचानक हमला तेज कर दिया और देखते ही देखते सीरिया के बड़े शहरों के साथ-साथ राजधानी दमिश्क पर भी कब्जा कर लिया. ऐसे में सवाल ये है कि 13 साल से चल रहे विद्रोह के बीच अचानक ऐसा क्या हुआ कि 13 दिन में ही तख्तापलट हो गया, आइए जानते हैं असद शासन के पतन की पूरी कहानी.

सत्ता पर पकड़ ढीली

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 13 साल के गृहयुद्ध के बाद, सीरिया के विपक्षी मिलिशिया को राष्ट्रपति बशर अल-असद की सत्ता पर पकड़ ढीली करने का मौका मिला. लगभग छह महीने पहले उन्होंने तुर्की को एक बड़े हमले की योजना के बारे में बताया और महसूस किया कि उन्हें तुर्की की मौन स्वीकृति मिल गई है. योजना के बारे में जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने एजेंसी को बताया. तकरीबन दो हफ़्ते पहले शुरू किए गए इस अभियान का शुरुआती लक्ष्य था, सीरिया के दूसरे शहर अलेप्पो पर कब्जा करना, जिसमें विद्रोहियों तेज़ी से सफलता मिल गई और इसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. वहां से, लगभग एक हफ्ते से भी कम समय में विद्रोही गठबंधन दमिश्क तक पहुंच गया और असद परिवार के पांच दशकों के शासन को समाप्त कर दिया. 

सीरिया में कैसे हुआ तख्तापलट?

•    27 नवंबर को सीरियाई सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई.
•    1 दिसंबर को विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम यानी HTS ने यहां के सबसे बड़े शहर अलेप्पो पर कब्जा कर लिया.
•    5 दिसंबर को HTS ने सीरिया के हमा शहर को अपने कब्जे में लिया.
•    6 दिसंबर को दारा और 7 दिसंबर को होम्स शहर पर कब्जा हो गया.
•    8 दिसंबर को विद्रोही गुट राजधानी दमिश्क की ओर बढ़ने लगे. इसी दौरान राष्ट्रपति असद ने अपने परिवार के साथ देश छोड़ दिया.
•    इसी दिन विद्रोही राष्ट्रपति भवन और संसद भवन में घुस आए. जमकर लूटपाट की. वहां का सामान लूटकर अपने घर ले गए.
•    सीरिया में विद्रोहियों ने सड़कों पर बंदूकें लेकर जश्न मनाया. विद्रोही महिलाओं ने भी सड़कों पर जश्न मनाया.
•    तख्तापलट के बाद हजारों लोग देश छोड़कर भागते दिखे. गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं.
•    इस दौरान दमिश्क में ईरानी दूतावास पर भी विद्रोहियों ने हमले किए.

अल-असद कहां है?

अभी तक कोई नहीं जानता कि अल-असद कहां है. सीरियाई प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी अल-जलाली के अनुसार, वे और उनके रक्षा मंत्री अली अब्बास दोनों अज्ञात स्थानों पर हैं, जिन्होंने अल अरबिया समाचार वेबसाइट को बताया कि शनिवार रात को उनका संचार टूट गया था. एसओएचआर प्रमुख रामी अब्देल रहमान के अनुसार, अल-असद सेना द्वारा सुरक्षित किए जाने के दौरान दमिश्क अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के माध्यम से सीरिया से चले गए. इसके बाद सैनिकों ने भी हवाई अड्डे को छोड़ दिया और विद्रोहियों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया. वहीं, प्रधानमंत्री अल-जलाली रुके हुए हैं, उन्होंने रविवार को सुबह प्रेस से बात करते हुए कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए रुके हुए हैं कि चीजें चलती रहें.

भारत पर क्या पड़ सकता है असर? 

असद के पतन और उसके बाद की अनिश्चितता ने भारत के राजनीतिक और आर्थिक हितों के लिए चिंता पैदा कर दी है. सबसे बड़ा खतरा हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) का है. एचटीएस एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है, जिसे कई देशों ने आतंकी संगठन भी घोषित कर रखा है. एचटीएस का जुड़ाव अल-कायदा से भी रहा है. एचटीएस के उभार से अब सीरिया में इस्लामिक स्टेट के फिर से पनपने का खतरा भी बढ़ गया है. सीरिया के ऑयल सेक्टर में भारत के दो बड़े निवेश हैं. पहला 2004 में हुआ ONGC और IPR इंटरनेशनल के बीच हुआ समझौता. दूसरा- सीरिया में कनाडियन फर्म में ONGC और चीन की CNPC की 37% हिस्सेदारी. सीरिया में तिशरीन थर्मल पावर प्लांट के रिस्ट्रक्चर के लिए भारत ने 24 करोड़ डॉलर का क्रेडिट भी दिया था. 

इतना ही नहीं, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर में भी भारत भारी निवेश करने की तैयारी कर रहा था. इस प्रोजेक्ट में सीरिया भी शामिल है. अब सीरिया में काफी कुछ बदल जाएगा. सीरिया में विद्रोही गुटों के साथ तुर्की का था. जाहिर है कि वहां की सियासत में अब तुर्की का अच्छा-खासा दखल होगा. तुर्की और भारत के संबंध हाल ही में थोड़े नरम होने शुरू हुए थे. लेकिन अब सीरिया में राजनीतिक परिवर्तन से मध्य पूर्व में भारत के संबंध प्रभावित हो सकते हैं. सीरिया के मौजूदा हालात पर भारत ने बयान जारी किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर सीरिया में सत्ता हस्तांतरण की 'शांतिपूर्ण' और 'समावेशी' प्रक्रिया का आह्वान किया है.
 


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