होम / पॉलिटिकल एनालिसिस / ‘थरूरिज्म’: शशि थरूर की भाषा, विचार और सभ्य राजनीति की पहचान

‘थरूरिज्म’: शशि थरूर की भाषा, विचार और सभ्य राजनीति की पहचान

70 वर्ष की उम्र में शशि थरूर ऐसी राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें विचार, अभिव्यक्ति और ऐतिहासिक दृष्टि को महत्व दिया जाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

9 मार्च को शशि थरूर का जन्मदिन सिर्फ एक और वर्ष के पूरे होने का जश्न नहीं था. यह अवसर उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व और राजनीति में उनकी अनूठी शैली, जिसे अनौपचारिक रूप से “थरूरिज्म” कहा जाता है, उसे याद करने का भी था. बौद्धिक संवाद, साहित्यिक अभिव्यक्ति और सभ्य राजनीतिक विमर्श पर आधारित यह शैली उन्हें भारतीय राजनीति में अलग पहचान देती है और आज भी विचारशील नेतृत्व की मिसाल बनकर उभरती है. दरअसल, “थरूरिज्म” यह पारंपरिक राजनीतिक अर्थों में कोई विचारधारा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में सोचने, बोलने और संवाद करने का एक अलग तरीका है.

संयुक्त राष्ट्र से भारतीय राजनीति तक का सफर

भारतीय राजनीति के सबसे पहचाने जाने वाले सांसदों में शामिल होने से पहले शशि थरूर ने लगभग तीन दशक तक संयुक्त राष्ट्र में काम किया. अपने कूटनीतिक करियर के दौरान वे अंडर-सेक्रेटरी-जनरल के पद तक पहुंचे. संयुक्त राष्ट्र में बिताए वर्षों ने उन्हें वैश्विक राजनीति, बहुपक्षीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संवाद की बारीकियों से परिचित कराया.

2009 में जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा चुनाव जीता, तो वे इस वैश्विक दृष्टिकोण को भारतीय घरेलू राजनीति की बहसों में भी लेकर आए.

राजनीति से परे बनी पहचान

कई राजनेताओं की पहचान जहां मुख्य रूप से पार्टी की लाइन से तय होती है, वहीं थरूर की प्रतिष्ठा लेखन, व्याख्यान और सार्वजनिक टिप्पणियों के माध्यम से भी बनी. उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों में अक्सर भारतीय मुद्दों को व्यापक ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में रखने की कोशिश दिखाई देती है. यही कारण है कि वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारक के रूप में भी देखे जाते हैं.

‘थरूरिज्म’ की अवधारणा

समय के साथ पर्यवेक्षकों ने उनकी विशिष्ट शैली को “थरूरिज्म” कहना शुरू कर दिया. इस शब्द में उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के तीन प्रमुख तत्व शामिल माने जाते हैं — बौद्धिक संवाद, साहित्यिक अभिव्यक्ति और सभ्य राजनीतिक विमर्श में विश्वास. व्यवहार में यह शैली नारेबाज़ी की जगह तर्क को, आक्रोश की जगह सूक्ष्मता को और क्षणिक राजनीतिक नाटकीयता की जगह ऐतिहासिक संदर्भ को महत्व देती है. उनके भाषणों में अक्सर साहित्य, औपनिवेशिक इतिहास और वैश्विक कूटनीति के संदर्भ देखने को मिलते हैं, जिससे वे पारंपरिक राजनीतिक भाषणों की तुलना में एक निबंध जैसे लगते हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनियन का चर्चित भाषण

इस शैली की झलक उनके सबसे चर्चित भाषणों में भी दिखाई देती है. ऑक्सफोर्ड यूनियन में दिया गया उनका भाषण, जिसमें उन्होंने औपनिवेशिक शासन के आर्थिक प्रभावों पर बात की थी, काफी व्यापक रूप से साझा किया गया.

इस भाषण में उन्होंने तर्क दिया था कि ब्रिटेन को भारत के प्रति नैतिक रूप से क्षतिपूर्ति करनी चाहिए. यह भाषण बहस के मंच से निकलकर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और उन्हें एक वायरल बौद्धिक आवाज के रूप में स्थापित कर दिया.

भाषा बनी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा

अगर “थरूरिज्म” की कोई खास पहचान है, तो वह है भाषा का इस्तेमाल. आज के दौर में राजनीतिक संवाद अक्सर छोटे और तीखे वाक्यों या वायरल साउंडबाइट्स पर आधारित होता है. इसके विपरीत थरूर जटिल और समृद्ध शब्दावली के लिए जाने जाते हैं.

उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कई अंग्रेजी शब्द जैसे “फरागो”, “रोडोमोंटेड” और चर्चित “फ्लॉक्सिनॉसिनिहिलिपिलिफिकेशन” सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन चुके हैं.

कुछ आलोचक इसे अभिजात्य शैली मानते हैं, जबकि उनके समर्थक इसे राजनीतिक संवाद को अधिक स्तरित और सभ्य बनाने का प्रयास मानते हैं. किसी भी दृष्टिकोण से देखें, भाषा उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.

राजनीति से आगे का सांस्कृतिक प्रभाव

थरूरिज्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू उसका सांस्कृतिक प्रभाव है. संसद से बाहर भी शशि थरूर एक सक्रिय लेखक हैं. उनकी किताबें राजनीतिक विश्लेषण से लेकर इतिहास और भारतीय पहचान जैसे विषयों को समेटती हैं.

उनका लेखन औपनिवेशिक विरासत, भारतीय पहचान और वैश्वीकरण जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहता है, जिससे वे अकादमिक विमर्श और राजनीति के बीच एक पुल का काम करते हैं.

सोशल मीडिया से और मजबूत हुई छवि

सोशल मीडिया ने भी उनकी इस बहुआयामी पहचान को और मजबूत किया है. उनके पोस्ट में राजनीतिक टिप्पणियों के साथ साहित्यिक संदर्भ, क्रिकेट पर राय और कभी-कभी हल्का हास्य भी देखने को मिलता है.

इससे उनकी सार्वजनिक छवि सिर्फ एक राजनेता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि एक विचारशील और बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में सामने आती है.

विचार और संवाद की राजनीति

70 वर्ष की उम्र में शशि थरूर ऐसी राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें विचार, अभिव्यक्ति और ऐतिहासिक दृष्टि को महत्व दिया जाता है.

“थरूरिज्म” किसी चुनावी रणनीति या राजनीतिक सिद्धांत का नाम नहीं है. यह इस विश्वास का प्रतीक है कि सार्वजनिक जीवन को अभी भी विचारों, भाषा और सभ्य संवाद के माध्यम से आकार दिया जा सकता है.

आज जब राजनीतिक संदेश अक्सर सरलता और तीव्रता को प्राथमिकता देते हैं, ऐसे समय में थरूर की लोकप्रियता यह संकेत देती है कि विचारशील और गहराई से बात करने वाले नेताओं के लिए भी समाज में जगह बनी हुई है.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

मोदी @76: वडनगर से दिल्ली तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष, संगठन और नेतृत्व के 25 साल का सफर

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर BJP देशभर में महीने भर चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी.

6 days ago

शंघाई सहयोग संगठन में मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात, ईरान के साथ भारत की कूटनीति पर टिकी नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की.

31-August-2026

‘जायंट किलर’ स्मृति ईरानी की BJP में दमदार वापसी, राष्ट्रीय महामंत्री की मिली बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नबीन की टीम में 8 राष्ट्रीय महामंत्रियों में शामिल स्मृति ईरानी, 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अहम भूमिका में नजर आएंगी

18-August-2026

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान, वसुंधरा राजे-स्मृति ईरानी समेत इन नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नवीन ने की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई टीम की घोषणा, 13 उपाध्यक्ष और 8 महासचिव शामिल

17-August-2026

शहजाद पूनावाला के X बायो में बदलाव, BJP छोड़ने की अटकलों ने पकड़ा जोर

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार को अपने X प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें उनके बायो से 'नेशनल स्पोक्सपर्सन, BJP' हट चुका था.

31-July-2026


बड़ी खबरें

अडानी ग्रुप की 5 कंपनियों ने सेबी के साथ निपटाया मामला, चुकाए 1.5 करोड़ रुपये

सेबी के मौजूदा निपटान आदेश में जिन मामलों का निपटारा किया गया है, वे संबंधित पक्ष लेनदेन के खुलासे और ऑडिट रिपोर्ट से जुड़े कथित अनुपालन उल्लंघनों पर केंद्रित हैं.

3 hours ago

PhonePe को UAE में दो पेमेंट लाइसेंस के लिए सैद्धांतिक मंजूरी, अंतरराष्ट्रीय विस्तार की ओर बढ़ी कंपनी

UAE के सेंट्रल बैंक ने रिटेल पेमेंट सर्विसेज और कार्ड स्कीम्स तथा स्टोर्ड वैल्यू फैसिलिटीज के लिए दी इन-प्रिंसिपल अप्रूवल; कारोबार शुरू करने से पहले लेनी होगी अंतिम मंजूरी

11 minutes ago

HDFC बैंक के मुनाफे की राह में फंडिंग कॉस्ट बनी चुनौती, CASA में Axis बैंक से 600 बेसिस पॉइंट पीछे

ICICI सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, डिपॉजिट जुटाने की लागत अब बैंकों के लिए बड़ा अंतर पैदा करने वाला कारक बन रही है. कम फंडिंग कॉस्ट से बैंकों को मार्जिन बनाए रखने और कर्ज कारोबार बढ़ाने में मदद मिलती है

1 hour ago

सिर्फ कॉल-SMS चाहिए तो नहीं देना होगा डेटा का पैसा, TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों को दिया नया निर्देश

30 दिन तक की वैधता वाले वॉइस और SMS-ओनली प्लान लाना होगा, कम डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों और दूसरी सिम रखने वालों को मिल सकता है फायदा

1 hour ago

भारत की आर्थिक रफ्तार ने बढ़ाया भरोसा, WEF सर्वे में 74% मुख्य अर्थशास्त्रियों को मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

WEF के अनुसार, सर्वे में शामिल 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों को अगले एक साल में भारत में औसत या उससे बेहतर आर्थिक वृद्धि की उम्मीद है.

3 hours ago