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राष्ट्रपति तक पहुंची रिश्वत के आरोप में लंबित 136 सांसदों की शपथ पर रोक लगाने की याचिका
कांग्रेस पार्टी की खटाखट स्कीम के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के एक वकील विभोर आनंद ने विपक्षी सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
रिश्वत के आरोप में कांग्रेस (Congress) और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसदों (Member Of parliament) को अयोग्य ठहराने की याचिका राष्ट्रपति (Droupadi Murmu) के पास लंबित है, जिन्होंने आरोपों पर कानूनी राय मांगी है. अयोग्यता याचिका लंबित रहने तक एक वकील ने राष्ट्रपति से इन सभी 136 सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने की मांग की है.
विपक्षी पार्टी के सांसदों की शपथ पर रोक के लिए राष्ट्रपति को लिखा पत्र
कांग्रेस पार्टी की खटाखट स्कीम विपक्षी पार्टी के संसद सदस्यों (सांसदों) के लिए ये अभिशाप साबित हो सकती है. दरअसल, राहुल गांधी ने इस स्कीम के तहत महिला मतदाताओं को 8500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया था. ऐसे में अब गांधी परिवार के सदस्यों और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप लगाने वाले दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट के वकील विभोर आनंद ने अब विपक्षी सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखा है. आपको बता दें, राष्ट्रपति ने 24 जून, 2024 को निचले सदन (लोकसभा) को बुलाया है, जिसमें नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जाएगी.
कांग्रेस पर कैश फॉर वोट घोटाले का आरोप
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस के 99 सांसदों और समाजवादी पार्टी (सपा) के 37 सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि उनकी अयोग्यता की याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है. इससे पहले, जिस सप्ताह 4 जून को चुनाव परिणाम घोषित हुए थे, उस दौरान आनंद ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कांग्रेस और सपा के सभी 136 सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी. आनंद ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी कैश फॉर वोट घोटाले के वादे में शामिल हो गई है. उन्होंने मतदाताओं को पैसों का लालच देकर वोट हासिल किए हैं.
गारंटी कार्ड का वितरण मतदाताओं को रिश्वत देना
वकील के अनुसार खटाखट योजना और कांग्रेस द्वारा गारंटी कार्ड का वितरण मतदाताओं को रिश्वत देना था. उन्होंने एक पत्र में राष्ट्रपति मुर्मू को बताया कि कांग्रेस ने हाल ही में संपन्न आम चुनावों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 (1) के तहत अपराध किया है, जो मतदाताओं को रिश्वत देने के एकमात्र इरादे से घोर भ्रष्ट आचरण है. राष्ट्रपति ने पत्र को कानूनी राय के लिए भेजा है.
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वोट के बदले पैसे देने का आरोप
चुनाव प्रचार के आखिरी कुछ हफ्तों के दौरान, राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका दोनों को 'खटाखट योजना' का प्रचार करते देखा गया, जिसमें कांग्रेस को वोट देने पर महिला मतदाताओं के खातों में हर महीने 8500 रुपये और हर साल 1 लाख रुपये ट्रांसफर करने का वादा किया गया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2019 में सत्ता में आने के लिए हर गरीब परिवार की महिला मुखिया को हर साल 1 लाख रुपये देने का वादा करते हुए कई परिवारों को 'गारंटी कार्ड' या वचन पत्र वितरित किए थे, जिसके बाद भी वह अपने पारिवारिक गढ़ अमेठी से हार गए थे. वहीं, इस बार खटाखट योजना के दम पर राहुल गांधी रायबरेली और केरल के वायनाड, इन दोनों सीटों पर जीतने में कामयाब रहे.
कांग्रेस ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का किया उल्लंघन
राष्ट्रपति को लिखे पत्र में आनंद ने बताया कि भारत में चुनाव जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act), 1951 के तहत शासित होते हैं. आरपी अधिनियम की धारा 123 के अनुसार चुनाव के दौरान उम्मीदवार या उसके एजेंट द्वारा लोगों को दिया गया कोई उपहार, प्रस्ताव या वादा, भ्रष्ट आचरण या रिश्वत से संबंधित है. सीधे शब्दों में कहें तो, राहुल गांधी का कांग्रेस पार्टी के पक्ष में मतदान करने पर मतदाताओं को सीधे उनके खाते में 1 लाख रुपये देने का वादा और इस तरह के गारंटी कार्ड का वितरण, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धाराओं के तहत रिश्वत के बराबर है.
कांग्रेस के खिलाफ ठोस कदम उठाने की जरूरत
राष्ट्रपति से आनंद की नवीनतम अपील में कहा गया कि आज देश की लाखों महिलाएं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं और सदस्यों द्वारा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, जिन्होंने उन्हें प्रति माह 8500 रुपये का भुगतान करने की गारंटी दी थी. ऐसे अपराधियों को रोकने के लिए महामहिम की ओर से कठोर कदम उठाने की जरूरत है, जिससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास बना रहे.
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