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सांसद कार्तिकेय शर्मा ने न्यायिक वेतन असमानता पर उठाया मुद्दा, तत्काल समीक्षा की मांग

सांसद ने कहा कि वेतन और सेवा शर्तों को मजबूत करना केवल वित्तीय मुद्दा नहीं बल्कि “न्याय में निवेश” है, जो न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका के वेतन और सेवा शर्तों की तत्काल और व्यापक समीक्षा की आवश्यकता जताई है. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के वेतन में वैश्विक मानकों और अन्य उच्च संवैधानिक पदों की तुलना में असमानताएं हैं.

न्यायाधीशों के वेतन में वैश्विक असमानता

राज्यसभा में स्पेशल मेंशन के जरिए यह मुद्दा उठाते हुए शर्मा ने कहा कि कई प्रमुख लोकतंत्रों में न्यायाधीशों को अपेक्षाकृत बेहतर पारिश्रमिक मिलता है, जबकि भारत में न्यायाधीशों का वेतन तुलनात्मक रूप से कम है. उन्होंने न्यायपालिका के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वेतन ढांचा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.

स्वतंत्रता और प्रतिभा को बनाए रखने की जरूरत

सांसद ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और बार से बेंच तक शीर्ष कानूनी प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी और सम्मानजनक वेतन अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि वर्तमान वेतन संरचना न्यायाधीशों पर बढ़ते कार्यभार और सार्वजनिक अपेक्षाओं के अनुपात में उनके दायित्वों को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करती है.

संवैधानिक पदों में असमानता

कार्तिकेय शर्मा ने भारत के अन्य संवैधानिक पदों के वेतन और न्यायिक वेतन के बीच असमानता को भी चिन्हित किया. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे असंतुलन संस्थागत क्षमता और दीर्घकालीन प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, “न्यायिक पारिश्रमिक को संस्थागत विश्वसनीयता का एक संरचनात्मक स्तंभ माना जाना चाहिए,” और जोड़े कि न्यायपालिका को बाहरी दबावों से मुक्त रखने और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए उचित सेवा शर्तें आवश्यक हैं.

न्याय में निवेश की भूमिका

सांसद ने आगे कहा कि वेतन और सेवा शर्तों को मजबूत करना केवल वित्तीय मुद्दा नहीं बल्कि “न्याय में निवेश” है, जो न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.

अंत में कार्तिकेय शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि न्यायिक वेतन की समीक्षा व्यापक, भविष्य-दृष्टि वाली और वैश्विक मानकों तथा संस्थागत समानता पर आधारित हो.


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