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Raebareli कैसे बनी गांधी परिवार का गढ़, जानें इस हॉट लोकसभा सीट की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट का इतिहास कांग्रेस के पक्ष में जाता है. यहां से 16 बार कांग्रेस को जीत मिली है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) केरल के वायनाड के साथ ही उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट (Raebareli Lok Sabha Seat) से चुनाव लड़ रहे हैं. इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और आंकड़े इसकी गवाही भी देते हैं. किसी जमाने में यूपी में कांग्रेस का 'हाथ' मजबूत था, लेकिन पिछले चुनाव में एकमात्र रायबरेली में ही पार्टी को जीत नसीब हुई थी. ऐसे में रायबरेली यूपी में कांग्रेस का अंतिम किला है, जिसे बचाने की चुनौती अब राहुल गांधी पर होगी. 

इन्हें मिली थी पहली जीत 
राहुल गांधी का मुकाबला यहां BJP के दिनेश प्रताप सिंह से है. दिनेश 2019 में भी भाजपा की टिकट पर रायबरेली से चुनाव लड़े थे, लेकिन सोनिया गांधी के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इस बार उनके सामने सोनिया के बेटे राहुल गांधी हैं. रायबरेली लोकसभा सीट के इतिहास बेहद रोचक रहा है. 1951-52 के आम चुनाव में रायबरेली और प्रतापगढ़ दोनों को मिलाकर एक लोकसभा सीट हुआ करती थी. तब यहां से सबसे पहले फिरोज गांधी ने चुनाव जीता था. बाद में जब रायबरेली सीट अस्तित्व में आई, तब भी 1958 में फिरोज गांधी को ही जीत मिली. उनके निधन के बाद 1967 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने इस सीट से मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की.

इंदिरा ने 4 बार लड़ा चुनाव 
इंदिरा गांधी ने इस सीट से 4 बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था. एक रिपोर्ट के अनुसार, 1971 के चुनाव में रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी के सामने सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण थे. जब चुनावी नतीजों में इंदिरा को विजयी घोषित किया गया, तो राजनारायण ने सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इलाहबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. राजनारायण की याचिका पर हाईकोर्ट ने इंदिरा के निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इंदिरा गांधी सुप्रीम कोर्ट गईं. कहा जाता है कि इसी घटना के चलते इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लागू करने फैसला लिया था. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी का सामना फिर राजनारायण से हुआ. भारतीय लोक दल (बीएलडी) की टिकट पर राजनारायण ने यहां से जीत हासिल की और वह रायबरेली सीट से जीत हासिल करने वाले पहले गैर कांग्रेसी सांसद बने.   

3 बार गैर-कांग्रेसी जीते
अस्तित्व में आने के बाद से यह सीट कांग्रेस की विरासत बनी हुई है. 2004 में इंदिरा गांधी की बहू यानी सोनिया गांधी ने रायबरेली से चुनाव लड़ा और पांच बार सांसद चुनी गईं. अब सोनिया के बेटे राहुल गांधी अपने परिवार की विरासत संभालने के लिए मैदान में उतरे हैं. इस सीट से चुनाव-उपचुनाव मिलाकर कुल 16 बार कांग्रेस नी जीत हासिल की है. गैर-कांग्रेसी उम्मीदवारों को यहां से महज तीन बार ही विजय नसीब हुई है. 2019 में दिनेश प्रताप सिंह ने सोनिया गांधी के सामने चुनाव लड़ा था. सोनिया गांधी को चुनाव में 5,31,918 वोट मिले थे. जबकि भाजपा उम्मीदवार दिनेश प्रताप सिंह को 3,67,740 मत मिले. इस तरह, दिनेश 1,64,178 मतों से चुनाव हार गए थे. बता दें कि 2018 में दिनेश प्रताप सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे.

रायबरेली से कब, कौन जीता? 
1952- फिरोज गांधी (कांग्रेस), 1958- फिरोज गांधी (कांग्रेस), 1962- ब्रजलाल (कांग्रेस), 1967- इंदिरा गांधी (कांग्रेस), 1971- इंदिरा गांधी (कांग्रेस), 1977- राजनारायण (बीकेडी), 1980- इंदिरा गांधी (कांग्रेस), 1981- अरुण नेहरू (कांग्रेस) उपचुनाव, 1984- अरुण नेहरू (कांग्रेस), 1989- शीला कौल (कांग्रेस), 1991- शीला कौल (कांग्रेस), 1996- अशोक सिंह (भाजपा), 1998- अशोक सिंह (भाजपा), 1999- कैप्टन सतीश शर्मा (कांग्रेस), 2004- सोनिया गांधी (कांग्रेस), 2006-सोनिया गांधी (कांग्रेस) उपचुनाव, 2009- सोनिया गांधी (कांग्रेस), 2014-सोनिया गांधी (कांग्रेस), 2019-सोनिया गांधी (कांग्रेस).


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