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क्या PM मोदी के प्रति बनारस के प्यार में आई कमी, इसलिए घट गया जीत का अंतर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपी की वाराणसी सीट से लगातार तीसरी बार जीत ज़रूर हासिल की है, लेकिन जीत का अंतर कम हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
इस लोकसभा चुनाव में बहुत कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को थी. जैसे भाजपा को बहुमत न मिलना, अयोध्या में भाजपा का हारना और नरेंद्र मोदी का काउंटिंग के दौरान कुछ देर के लिए पिछड़ना. अयोध्या में भाजपा की हार की प्रमुख वजह बाहरी व्यापारियों का 'कब्जा' और अधिग्रहण रही. लेकिन वाराणसी (बनारस) में ऐसा क्या हुआ कि PM मोदी कुछ देर के लिए पिछड़े और उनकी जीत का अंतर भी कम हो गया? ब्रिटिश ब्रॉडकास्ट कारपोरेशन यानी BBC ने अपनी रिपोर्ट में वाराणसी में PM मोदी की जीत के घटते अंतर के लिए स्थानीय लोगों की घटती इनकम को कारण बताया है. हालांकि, ये बात अलग है कि पैसों को लेकर उसकी खुद की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है. उस पर टैक्स चोरी के आरोप लग चुके हैं. पिछले साल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बीबीसी पर टैक्स सर्वे किया था, जिसमें 2016 से टैक्स चोरी पकड़ी गई. बीबीसी ने साल 2016 से लेकर 2022 तक के बीच 40 करोड़ रुपए कम टैक्स भरा था.
केवल इतने अंतर से मिली जीत
वाराणसी से इस बार नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर महज एक लाख 52 हजार वोटों का रहा. जबकि 2019 में उन्होंने लगभग चार लाख 80 हज़ार मतों के अंतर से इस सीट पर जीत हासिल की थी. चुनाव पूर्व माना जा रहा था कि वाराणसी से मोदी बड़े अंतर के साथ जीतेंगे. बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में पीएम मोदी की जीत के कम हुए अंतर का उत्तर देने की कोशिश की है. यह रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के कुछ फैसलों के चलते वाराणसी के लोगों की इनकम प्रभावित हुई, जिसका बदला उन्होंने भाजपा के खिलाफ वोट करके लिया.
पहले भरी रहती थीं नाव
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में बनारस के मल्लाहों की कमाई पर सुनियोजित तरीके से चोट पहुंचाई गई है. दरअसल, सरकार गंगा नदी में क्रूज चलवा रही है. क्रूज की टिकट ऑनलाइन बुक की जा सकती है. इस व्यवस्था से सरकार को टैक्स मिल रहा है. लेकिन क्रूज के गंगा में उतरने से मल्लाहों की कमाई न के बराबर रह गई है. अपनी नाव से उनके लिए क्रूज का मुकाबला संभव नहीं. गंगा घाट आने वाले भी क्रूज से गंगा की सैर करना ज्यादा पसंद करते हैं. जबकि पहले नाव सैलानियों से भरी रहती थीं.
क्रूज से ठप हो गई कमाई
उत्तर प्रदेश कीयोगी आदित्यनाथ ने 2018 में गंगा नदी में फाइव स्टार लग्ज़री क्रूज़ उतारा था. यह क्रूज गंगा की 82 घाटों की सैर कराता है. 30 मीटर लंबे डबल डेकर क्रूज में एक साथ 110 लोग बैठ सकते हैं और इसका किराया प्रति व्यक्ति 750 रुपए का है. क्रूज लाने के पीछे सरकार की सोच निश्चित तौर पर विकास से मेल खाती है, लेकिन इसने स्थानीय मल्लाहों की कमाई को बुरी तरह प्रभावित किया है. कभी-कभी तो उन्हें पूरे दिन के इंतजार के बाद भी कोई सवारी नहीं मिलती. ऐसे में उनके मन में भाजपा और उसके मुखिया को लेकर गुस्सा पनपने लगा था, जो वोटिंग के समय सामने आ गया.
दुकानदारों से छिना रोजगार
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि बात केवल क्रूज तक ही सीमित नहीं है. सरकार ने मणिकर्णिका घाट से बाबा विश्वनाथ मंदिर तक कॉरिडोर बनाया है. इससे मणिकर्णिका घाट के दुकानदार प्रभावित हुए हैं. खासतौर पर वो जो मछली बेचा करते थे. दुकान हटाते समय वादा किया गया था कि सभी प्रभावितों को कॉरोडिर बनने के बाद एक-एक नई दुकान मिलेगी. लेकिन दुकान तैयार होने के बाद एक दुकान के लिए 25 लाख रुपए की मांग की गई जो सामान्य दुकानदार के लिए देना नामुमकिन था. मणिकर्णिका घाट से गरीबों को बेदखल कर दिया गया और वहां ब्रैंडेड शोरूम बसाए गए. यहां आपको अमूल डेयरी का बूथ भी मिल जाएगा.
बुनकर भी हैं BJP से नाराज
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं, तो गंगा नदी में नाव चलाने की इजाजत नहीं दी जाती, लेकिन क्रूज चलता रहता है. स्थानीय बुनकरों में भी भाजपा को लेकर नाराज़गी है. उनका कहना है कि बनारसी साड़ी अब सूरत में तैयार होती है और वहीं से बनकर बनारस आती है. ऐसे में यहां के कारीगर बेकार हो गए हैं, उनके लिए पेट भरना भी मुश्किल हो गया है. रिपोर्ट के अनुसार, मोदी जब 2014 में वाराणसी से चुनाव लड़ने आए थे, तो उन्होंने बुनकरों की स्थिति सुधारने का वादा किया था. मोदी ने नौकरशाहों से कहा था कि हैंडलूम को फैशन से जोड़ने का कोई तरीका निकालें. लेकिन आज तक ऐसा नहीं ही पाया है.
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