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सरकार का बड़ा फैसला: 94 साल बाद होगी जातिगत जनगणना, प्रक्रिया होगी पारदर्शी
केंद्र सरकार द्वारा अगली जनगणना में जाति आधारित गणना को शामिल करने का निर्णय सामाजिक न्याय और डेटा आधारित नीति निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
केंद्र सरकार ने अगली जनगणना के साथ-साथ देश में जाति आधारित गणना करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है. बुधवार को हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में इस निर्णय पर मुहर लगाई गई. सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया जाएगा, जिससे समाज के विविध वर्गों के बारे में विस्तृत और सटीक आंकड़े मिल सकेंगे.
1931 के बाद पहली बार होगी व्यापक जातिगत गणना
भारत में अंतिम बार जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी, जिसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया था. इसके बाद 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जाति आधारित सर्वेक्षण (SECC) के तहत आंकड़े इकट्ठे किए गए थे, लेकिन वह विवरण कभी सार्वजनिक नहीं किया गया.
जनगणना केंद्र सरकार का विषय
इस फैसले की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह निर्णय राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा लिया गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत जनगणना एक केंद्रीय विषय है, जो संघ सूची में शामिल है. कुछ राज्यों ने पहले इसे सर्वेक्षण के रूप में अपनाया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए थे. वैष्णव ने कहा कि "जाति गणना को अब एक अलग सर्वेक्षण के बजाय मुख्य जनगणना में ही शामिल किया जाएगा. इससे प्रक्रिया की वैधता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी, और समाज आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनेगा."
सरकार व विपक्ष ने भी फैसले का किया स्वागत
केंद्रीय मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, एनडीए के घटक दल तेदेपा और जदयू, साथ ही बीजू जनता दल ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया है. वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की मांग की है. राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने इस पर कहा कि 2001 में एनडीए सरकार भी जातिगत गणना नहीं करा सकी थी. उधर, राहुल गांधी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि "सरकार ने देर से सही, पर सही निर्णय लिया है. अब यह जरूरी है कि जातिगत गणना समयबद्ध तरीके से हो."
यूपीए सरकार पर साधा निशाना
सरकार ने इस मौके पर 2011 में जातिगत गणना को ठीक से लागू न करने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने बताया कि उस समय मंत्रियों का समूह तो बनाया गया था लेकिन गणना के बजाय सर्वेक्षण का रास्ता चुना गया.
गन्ने का एफआरपी बढ़ाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गन्ना किसानों को राहत देते हुए वर्ष 2025-26 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 4.41% बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. वर्तमान में यह दर 340 रुपये प्रति क्विंटल है. एफआरपी वह न्यूनतम मूल्य है, जिसे चीनी मिलों द्वारा किसानों को देना कानूनी रूप से अनिवार्य है.
शिलॉन्ग-सिलचर हाईवे को मिली मंजूरी
कैबिनेट ने मेघालय के मावलिंगखुंग से असम के पंचग्राम तक एक 166.80 किलोमीटर लंबी राजमार्ग परियोजना को भी मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट 22,864 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा. इसमें 144.80 किमी हिस्सा मेघालय और 22 किमी हिस्सा असम में होगा. यह निर्णय भी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकनॉमिक अफेयर्स में लिया गया.
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