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मोदी सरकार की नीतियों को कितना प्रभावित कर सकते हैं उपचुनाव के नतीजे?
सात राज्यों की कुल 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा है. जबकि इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा चुनाव में उम्मीद अनुरूप परिणाम हासिल करने में नाकाम रही भाजपा को फिर झटका लगा है. सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी को केवल 2 पर जीत मिली है. जबकि इंडिया गठबंधन 10 सीटों पर जीत गया है. बिहार की सीट निर्दलीय प्रत्याशी के खाते में गई है. इस परिणाम का सीधा मतलब है कि जनता में भाजपा के प्रति नाराज़गी है. महंगाई, बेरोज़गारी जैसे आम आदमी से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ निजीकरण पर सरकार के रुख के खिलाफ लोगों का गुस्सा पहले भी सामने आता रहा है. ये बात अलग है कि सरकार और भाजपा इसे अनदेखा करते रहे. पहले लोकसभा और अब विधानसभा उप चुनाव के नतीजे यह स्पष्ट इशारा कर रहे हैं कि इन मुद्दों की अनदेखी आगे भाजपा के लिए बड़ा संकट बन सकती है.
आम का रखना होगा खास ध्यान
उपचुनाव के नतीजों का असर सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी देखने को मिल सकता है. जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव परिणाम सीधे तौर पर केंद्र के कामकाज को भले ही प्रभावित न करें, लेकिन आवाम के मिजाज को तो दर्शाते ही हैं. 7 राज्यों की 13 सीटों में से भाजपा केवल 2 पर जीत हासिल कर पाई है. यदि कुछ साल पहले की बात करें, तो इस तरह के टेस्ट में भाजपा शत प्रतिशत से पास होती आई है. लिहाजा, इस बार प्रदर्शन में गिरावट पार्टी के लिए मंथन का समय है. साथ ही सरकार के लिए भी संकेत है कि उसे आमजन को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनानी होंगी. ऐसे में सरकार के लिए अब कड़े आर्थिक फैसले लेना और मुश्किल हो सकता है.
बजट पर ऐसा हो सकता है असर
23 जुलाई को पेश होने वाले बजट पर क्या इन नतीजों का कोई असर पड़ेगा? जानकारों का मानना है कि इससे पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता. सरकार को हर हाल में जनता के बीच व्याप्त नाराज़गी को दूर करना होगा और बजट इसका सबसे बेहतरीन माध्यम हो सकता है. संभावना है कि बजट में महंगाई को नियंत्रित करने और रोज़गार के अवसर बढ़ाने को लेकर कोई घोषणा हो. साथ ही इसकी भी संभावना है कि वित्तमंत्री निजीकरण को लेकर कोई बात न कहें. क्योंकि निजीकरण के एजेंडे ने देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को मोदी सरकार से दूर करने का काम किया है.
नीतीश कुमार को भी मिला संकेत
मोदी सरकार में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू प्रमुख सहयोगी हैं. बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी JDU के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है. रुपौली सीट पर ही उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह जीत गए हैं. भले ही बात केवल एक सीट की है, लेकिन नीतीश कुमार को अब इसका ज्यादा ख्याल रखना होगा कि वो आमजन को नाराज करने वाले मोदी सरकार के फैसलों पर सहमत नजर न आएं. बता दें कि सात राज्यों की इन 13 सीटों पर उपचुनाव इसलिए कराने पड़े हैं क्योंकि ये सीटें विधायकों के निधन या उनके इस्तीफे के चलते खाली हुई थीं.
ऐसा है रहा है चुनाव का परिणाम
भाजपा उत्तराखंड की बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हार गई है, अयोध्या के बाद यह उसके लिए दूसरा सबसे बड़ा झटका है. यहां से कांग्रेस उम्मीदवार लखपत सिंह बुटोला जीते हैं. उत्तराखंड की दूसरी सीट भी कांग्रेस के खाते में गई है. हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को तीन में से दो सीटों पर जीत मिली है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की TMC ने चारों सीटें अपने नाम कर ली हैं. पंजाब की जालंधर वेस्ट सीट से आम आदमी पार्टी को जीत मिली है. इसी तरह तमिलनाडु की एकमात्र सीट DMK के पास चली गई है. भाजपा को केवल मध्य प्रदेश की अमरवाडा सीट पर हुए उपचुनाव और हिमाचल की हमीरपुर सीट पर जीत मिली है.
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