होम / पॉलिटिकल एनालिसिस / AAP का बड़ा फैसला: राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी पद से हटाने की तैयारी
AAP का बड़ा फैसला: राघव चड्ढा को राज्यसभा डिप्टी पद से हटाने की तैयारी
AAP का यह फैसला पार्टी के अंदर रणनीतिक बदलाव का संकेत देता है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि राज्यसभा में इस बदलाव का पार्टी की राजनीतिक दिशा और प्रभाव पर क्या असर पड़ता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाने की मांग की है. इसके साथ ही पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें पार्टी कोटे से बोलने का समय न दिया जाए.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राघव चड्ढा की जगह पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाने का प्रस्ताव रखा है. AAP ने सचिवालय से इस बदलाव को जल्द लागू करने की मांग की है. फिलहाल पार्टी के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं, जिनमें 7 पंजाब और 3 दिल्ली से हैं.
रणनीति में बदलाव के संकेत
पार्टी का यह कदम राज्यसभा में अपनी रणनीति और फ्लोर मैनेजमेंट में बदलाव का संकेत माना जा रहा है. स्पीकिंग कोटा से हटाने की मांग इस बात की ओर इशारा करती है कि AAP संसद में अपनी भूमिका को नए तरीके से तय करना चाहती है.
राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर
पंजाब का प्रतिनिधित्व करने वाले राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी (AAP) के गठन के शुरुआती दिनों से ही जुड़े रहे हैं. उन्होंने 2012 में दिल्ली लोकपाल आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ काम करते हुए अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की. समय के साथ उन्होंने संगठन में तेजी से जगह बनाई, राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद सबसे युवा कोषाध्यक्ष बने.
उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव दक्षिण दिल्ली से लड़ा, लेकिन रमेश बिधूड़ी से हार गए. इसके बाद 2020 में उन्होंने वापसी करते हुए राजेंद्र नगर विधानसभा सीट जीती और बाद में दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष बने.
राज्यसभा में भूमिका
साल 2022 में राघव चड्ढा 33 साल की उम्र में राज्यसभा पहुंचे और उस समय सबसे युवा सदस्य बने. बाद में 2023 में उन्हें संजय सिंह की जगह राज्यसभा में पार्टी का नेता बनाया गया. संसद में उन्होंने कई सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों को उठाया. हाल ही में उन्होंने “सरपंच पति” जैसी प्रथा पर सवाल उठाते हुए महिलाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार देने की मांग की थी, जो 73वां संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप है.
टैग्स