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भाजपा की नई मुश्किल: दिल्ली में बन रही सरकार, महाराष्ट्र में सरकार पर संकट!
महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है. शरद पवार गुट की तरफ से एक बड़ा दावा किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
लोकसभा चुनाव में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन से केवल केंद्र ही नहीं महाराष्ट्र की राजनीति भी प्रभावित होती नजर आ रही है. पहले अजित पवार का NDA की बैठक में शामिल न होना, फिर उनके कुछ विधायकों के टूटने की खबरों का सामने आना, राज्य में बड़े सियासी तूफान की आहट प्रतीत हो रहा है. लोकसभा चुनाव में भाजपा और सहयोगी महाराष्ट्र में असरहीन नजर आए हैं. जबकि विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाडी (MVA) ने 30 सीटों पर जीत हासिल की है. सबसे बुरा हाल जूनियर पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का हुआ है. इस वजह से एनसीपी खेमे में उथल-पुथल मची है.
शरद पवार ही असली चाणक्य
अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से उनकी पार्टी NCP छीनकर राज्य की महायुति सरकार में शामिल हो गए थे. अजित को पूरा विश्वास था कि मोदी की लोकप्रियता के चलते लोकसभा चुनाव में उन्हें सफलता मिलेगी. लेकिन हुआ इसके एकदम उलट. अजित पवार के नेतृत्व में NCP केवल एक ही सीट जीत पाई. वहीं, शरद पवार ने नई पार्टी और नए सिंबल के साथ भी अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने 10 सीटों पर चुनाव लड़ा और 8 पर जीत हासिल की. इससे पुन: यह साबित हो गया है कि शरद पवार ही महाराष्ट्र की सियासत के असली चाणक्य है. शरद पवार के पोते रोहित पवार ने दावा किया है कि सियासी उथल-पुथल के बीच अजित पवार के 15 से अधिक विधायक हमारे संपर्क में हैं.
क्या है राज्य का समीकरण?
महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में महायुति की सरकार है. शिंदे ने उद्धव ठाकरे से उनकी शिवसेना छीनकर भाजपा के साथ गठबंधन बनाया था. महायुति की सरकार में बीजेपी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी शामिल हैं. इन सभी पार्टियों का लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन काफी खराब रहा है. वहीं, महाविकास अघाड़ी में शामिल उद्धव ठाकरे की शिव सेना, कांग्रेस और शरद पवार की नई पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया है. यदि NCP के विधायक वापस शरद पवार का दामन थामते हैं तो राज्य में सियासी संकट खड़ा हो सकता है. महाराष्ट्र विधानसभा में BJP के पास 103 विधायक हैं, शिंदे की शिवसेना के पास 40 और अजित पवार की एनसीपी के भी 40 विधायक हैं. 288 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 145 सीटों की ज़रूरत होती है.
यह भी है एक संभावना
अजित पवार गुट के 15 से ज्यादा विधायकों के शरद पवार के संपर्क में होने का दावा किया जा रहा है. इन 15 MLA के फिर से पाला बदलने के बाद भी महायुति की सरकार के पास बहुमत के लिए ज़रूरी आंकड़ा रहेगा, लेकिन केवल 15 ही 'घर' वापसी करेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती. यह भी संभव है कि एकनाथ शिंदे के साथ खड़े विधायक वापस उद्धव ठाकरे की शिवसेना का हिस्सा बन जाएं. लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को 9 सीटों पर जीत मिली है. जबकि एकनाथ शिंदे की पार्टी को 7 सीटों पर संतोष करना पड़ा है. विधायकों के पाला बदलने का सिलसिला यदि एक बार शुरू होता है, तो फिर भाजपा और शिंदे के लिए महाराष्ट्र की सरकार बचाना मुश्किल हो जाएगा.
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