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AAP ने अशोक मित्तल को राज्यसभा डिप्टी नेता बनाया, राघव चड्ढा को हटाया
अधिकारिक नोटिफिकेशन के माध्यम से बदलाव, राघव चड्ढा की बोलने की भूमिका सीमित
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुरुवार को राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया कि अशोक मित्तल अब पार्टी के उपनेता के रूप में कार्यभार संभालेंगे और राघव चड्ढा का स्थान लेंगे. साथ ही पार्टी ने यह भी कहा कि चड्ढा को अब पार्टी के कोटा से बोलने का समय नहीं दिया जाएगा, जो AAP की फ्लोर मैनेजमेंट रणनीति में बदलाव को दर्शाता है. पार्टी के वर्तमान में राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं, जिनमें सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार.
अशोक मित्तल का राजनीतिक सफर
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल ने 2022 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और उसी वर्ष राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए. इसके बाद वे कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों का हिस्सा रहे, जिनमें रक्षा समिति और वित्त समिति शामिल हैं. फरवरी 2026 में उन्हें भारत–यूएसए संसदीय मित्रता समूह में शामिल किया गया.
अशोक मित्तल कनिमोझी के नेतृत्व वाली बहु-पार्टी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा भी रहे, जिसने पिछले साल के पहलगाम आतंक हमले के बाद रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन का दौरा किया.
संसद में शामिल होने के बाद, मित्तल ने शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर चर्चा में सक्रिय भूमिका निभाई है. उनका शांत और व्यावहारिक दृष्टिकोण पार्टी की संसदीय कार्रवाइयों को मजबूत करने में मदद करेगा और राजनीतिक निर्णयों में विशेषज्ञता पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है.
राघव चड्ढा की भूमिका और कार्य
राघव चड्ढा भी अप्रैल 2022 से राज्यसभा सांसद हैं और संसद में AAP की प्रमुख आवाज़ों में शामिल रहे हैं. उन्होंने अक्सर सार्वजनिक मुद्दों को उठाया है.
पिछले महीने उन्होंने “सरपंच पति” या “पंचायत पति” प्रथा पर ध्यान आकर्षित किया, जहां आरक्षित पंचायत सीटों पर चुनी गई महिलाएं केवल नाममात्र प्रतिनिधि बनी रहती हैं, जबकि पुरुष रिश्तेदार वास्तविक शक्ति का प्रयोग करते हैं. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से अधिकार प्रयोग करने का अवसर दिया जाए, जो 73वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप है.
इसके अलावा, चड्ढा ने संसद में मासिक धर्म स्वच्छता पर भी चर्चा की, इसे स्वास्थ्य, शिक्षा और समानता का मुद्दा बताया, जो 35 करोड़ से अधिक महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करता है. उन्होंने कहा कि यदि कोई लड़की स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि वहाँ सैनिटरी पैड, पानी और गोपनीयता नहीं है, तो यह उसका व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सामाजिक विफलता है. उन्होंने यह भी कहा कि समाज ने एक जैविक तथ्य को सामाजिक वर्जना में बदल दिया है.
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