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एक जादूगर, जो पिता के साथ दिखाता था जादू; जानें कैसे बन गया CM
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहले एक जादूगर थे. उनका जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले में 3 मई, 1951 को हुआ था. उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी जादूगर थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इसपर रस्सा-कस्सी जारी है. कुछ दिन पहले तक राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नाम लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन सचिन पायलट के दिल्ली दौरे ने फिर से राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. हालांकि पार्टी के सूत्रों की तरफ से ये दावा किया जा रहा है कि गहलतो अभी भी प्रमुख रूप से पार्टी के अध्यक्ष पद की रेस में बने हुए हैं. गहलोत को राजनीति का मंझा हुआ खिलाड़ी माना जाता है, लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि राजनीति में आने से पहले गहलोत एक जादूगर थे?
एक जादूगर से बने राजनेता
जी हां, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहले एक जादूगर थे. उनका जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले में 3 मई, 1951 को हुआ था. उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी जादूगर थे. उन्होंने अपने पिता से जादू की कला सीखी थी और शुरुआती दिनों में वे पिता के साथ जादू दिखाने भी जाया करते थे. उन्होंने हांग कांग और टोकियो में भी अपनी जादू की कला दिखाई थी, लेकिन उनका मन इस काम में नहीं लगता था. उनका रूझान शुरुआत से ही राजनीति में था, इसलिए वे स्टूडेंट लाइफ से ही राजनीति में सक्रिय हो गए और NSUI का दामन थामा. राजनीतिक करियर में यह उनका पहल कदम था. गहलोत के बारे में एक और बात जो बहुत कम लोग जानते हैं, वो ये कि वे पेशे से वकील भी थे.
युवा नेता के तौर पर हमेशा सक्रिय रहे
गहलोत एक युवा नेता के तौर पर हमेशा सक्रिय रहते थे. पार्टी का कोई भी काम हो, गहलोत उसे पूरा करने के लिए सबसे आगे रहते थे. उनकी मेहनत 1979 में रंग लाई, जब उन्हें पहली बार कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला. उस वक्त उनके पास चुनाव लड़ने लायक पैसे नहीं थे, तो उन्होंने अपना स्कूटर बेच दिया. इसके बाद उनके सामने नई समस्या ऑफिस बनाने को लेकर आई तो उन्होंने अपने एक दोस्त के सैलून में ही कार्यालय बना लिया.
गहलोत की मेहनत रंग लाई
उनकी मेहनत रंग लाई और वे 28 साल की उम्र में ही राजस्थान के जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीत गए. वे पहले ऐसे जादूगर थे, जो सासंद बने थे. चुनाव जीतने में जादूगरी के रोल को लेकर जब उनसे पूछा गया था, तो उन्होंने जवाब दिया, "जादू किसी को करोड़पति बनने या फिर चुनाव जीतने में मदद नहीं करता. पर इसने मुझे लोगों को इकट्ठा करने में मदद किया. एक जादूगर होने के नाते ज्यादा से ज्यादा लोग मुझे सुनना चाहते थे. लोग ये सोचकर आते थे कि मैं उन्हें जादू दिखाऊंगा, लेकिन जब वे आ जाते थे, तब मैं उन्हें इंदिरा गांधी की पॉलिसीज को लेकर शिक्षित करता था. कभी-कभी लोग मुझसे जादू दिखाने की जिद कर देते थे, तो मैं उन्हें नाराज नहीं कर सकता था. कभी-कभी उन्हें जादू दिखा देता था और वे खुशी-खुशी घर जाते थे. "
29 साल की उम्र में बनें केंद्रीय मंत्री
अशोक गहलोत कामयाबी की एक सीढ़ी तब और चढ़े, जब वे पहली बार 29 साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री बने. ऐसा कहा जाता है कि स्व. राजीव गांधी ने ही राजस्थान की राजनीति में गहलोत को आगे बढ़ाने में काफी मदद की थी. उन्होंने ही गहलोत को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. ऐसा ये भी कहा जा रहा है कि यदि वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते हैं तो राजस्थान का मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे.
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