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क्या होती है सिंगल प्रीमियम पॉलिसी, आखिर क्यों हो रही है इतनी मशहूर?

प्राइवेट कंपनियों द्वारा शानदार परफॉरमेंस देखने को मिली है लेकिन सरकारी कंपनी LIC यानी जीवन बीमा निगम द्वारा काफी कमजोर परफॉरमेंस देखने को मिली.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत में जीवन बीमा का बिजनेस बहुत ही तेजी से आगे बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2023 में इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा इकट्ठा किए गए प्रीमियम में 20% की बढ़ोत्तरी देखने को मिली थी. वित्त वर्ष के आखिरी महीनों के दौरान जीवन बीमा पॉलिसी की मांग में वृद्धि देखने को मिली थी और प्राइवेट कंपनियों को इससे मुख्य तौर पर फायदा हुआ था. 

LIC की परफॉरमेंस
जहां एक तरफ प्राइवेट कंपनियों द्वारा शानदार परफॉरमेंस देखने को मिली है वहीं सरकारी जीवन बीमा कंपनी LIC यानी जीवन बीमा निगम द्वारा काफी कमजोर परफॉरमेंस देखने को मिली. मार्च 2023 में देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी द्वारा इकट्ठा किए गए प्रीमियम में 32% की कमी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2023 के दौरान कंपनी द्वारा इकट्ठा किए गए प्रीमियम में मात्र 17% की वृद्धि देखने को मिली थी. नए बिजनेस प्रीमियम में LIC की हिस्सेदारी में भी लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. वित्त वर्ष 2023 के दौरान भी यह 63% पर स्थिर बना रहा.

क्यों पसंद की जा रही है सिंगल प्रीमियम पॉलिसी
जीवन बीमा कंपनियों के बिजनेस में सिंगल प्रीमियम पॉलिसी का योगदान काफी प्रमुख रहा है. अलग-अलग समय पर अलग-अलग रोजगार करने वाले लोगों और बिजनेस करने वाले लोगों द्वारा प्रमुख रूप से इस पॉलिसी का चयन किया जा रहा है. ऐसे लोगों को यह नहीं पता होता कि भविष्य में नियमित तौर से प्रीमियम भरने के लिए उनके पास पर्याप्त रकम होगी या फिर नहीं और इसीलिए सिंगल प्रीमियम पॉलिसी की मांग में प्रमुख रूप से वृद्धि देखने को मिल रही है.

सिंगल प्रीमियम पॉलिसी के फायदे
एक सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में आपको नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान नहीं करना होता. आप सिर्फ एक बार प्रीमियम का भुगतान करते हैं और फिर आपकी झंझट खत्म हो जाती है. पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट जीतेन्द्र सोलंकी कहते हैं कि एक सिंगल प्रीमियम पॉलिसी सिर्फ एक बार एकमुश्त राशि का भुगतान करके आपको पूरे जीवनकाल के लिए कवरेज का विकल्प प्रदान करती है. कस्टमर्स को 10 से 15 सालों तक प्रीमियम के भुगतान को लेकर परेशान नहीं होना पड़ता. 

क्या है टैक्स का नियम?
जब आप एक सिंगल प्रीमियम पॉलिसी के लिए भुगतान करते हैं तो आपको इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स कटौती का सामना करना पड़ता है. इनकम टैक्स के इस सेक्शन के अंतर्गत आपको 1.5 लाख तक की इन्वेस्टमेंट पर टैक्स कि छूट मिलती है लेकिन यह फायदा केवल एक बार के लिए ही उपलब्ध होता है. पॉलिसी के मैच्योर होने पर आपको जो राशि प्राप्त होती है वह सेक्शन 10D के अंतर्गत पूरी तरह टैक्स से मुक्त होती है. हालांकि आपको दो बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए. पहला, 2012 के बाद जारी की गई पॉलिसी के लिए टैक्स से मुक्ति तभी मिलेगी जब किसी वित्त वर्ष के दौरान भुगतान किया गया प्रीमियम प्राप्त होने वाली कुल रकम के 10% से ज्यादा न हो और दूसरा, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी गई नॉन-ULIP पॉलिसी में भुगतान किया गया प्रीमियम अगर 5 लाख से ज्यादा है तो पॉलिसी की मैच्योरिटी पर किसी प्रकार की टैक्स माफी नहीं मिलेगी. 
 

यह भी पढ़ें: हाल ही में जारी हुए IPO को किया गया ‘Over Subscribe’, जानिये क्या करती है कंपनी?

 


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