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FD पर जो ब्याज दर बताते हैं, उसके हिसाब से उतनी रकम क्यों नहीं मिलती?

FD पर टैक्स कटौती के बाद मिलने वाला रिटर्न इसलिए कम हो जाता है क्योंकि एक FD से प्राप्त हुई आय पर 10% की दर से TDS की कटौती की जाती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आमतौर पर लोग बैंकों में FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट योजना को निवेश के सबसे सुरक्षित तरीकों में मानते है. कुछ समय पहले बैंकों द्वारा FD योजनाओं पर काफी अच्छा-खासा इंटरेस्ट रेट भी प्रदान किया जा रहा था जिससे इन योजनाओं में लोगों कि दिलचस्पी बढ़ती हुई नजर आ रही थी. लेकिन क्या आपको पता है कि FD योजनाओं पर टैक्स कटौती के बाद आपको जो इंटरेस्ट मिलता है, उसके आधार पर आपको बताई गई रकम आपको पूरी नहीं मिलती है। 

क्यों कम हो जाता है इंटरेस्ट रेट? 
FD पर टैक्स की कटौती के बाद मिलने वाला रिटर्न इसलिए कम हो जाता है क्योंकि एक FD योजना से प्राप्त हुई आय पर 10% की दर से TDS की कटौती की जाती है. किसी भी FD योजना से होने वाली कमाई को एक व्यक्ति की कुल आय में जोड़ा जाता है और व्यक्ति से संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार उस व्यक्ति की कमाई पर टैक्स की कटौती की जाती है. ऐसे में वह इन्वेस्टर्स जिनकी कमाई पर पहले से ही उच्च टैक्स लगाया जाता है, वह ITR फाइल करके TDS पर फिर से दावा नहीं कर सकते. इस वजह से FD योजनाओं पर टैक्स कटौती के बाद प्राप्त होने वाले रिटर्न कम हो जाते हैं. 

कितना ज्यादा है अंतर? 
भारत की सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म कंपनियों में से एक FundsIndia की Wealth Conversation Report May 2023 की मानें तो SBI, PNB, HDFC और ICICI जैसे बैंकों में 6 महीने की एक FD योजना पर आपको 5% का औसत बैंक रेट प्रदान किया जाता है, जो इन सभी बैंकों के बीच सामान्य है. लेकिन टैक्स की कटौती के बाद 5% का यह रिटर्न केवल 3.49% का ही रह जाता है. इसी तरह अगर इन बैंकों में 5 सालों की अवधि वाली एक FD योजना की बात करें तो आपको बैंकों द्वारा 6.75% का इंटरेस्ट रेट प्रदान किया जाता है लेकिन टैक्स की कटौती के बाद आपको केवल 4.9% का ही रिटर्न प्राप्त होता है. वहीं 3 सालों की FD योजना पर मिलने वाला औसत इंटरेस्ट रेट 6.88% है जबकि टैक्स के बाद आपको जो रिटर्न प्राप्त होता है वह मात्र 4.91% होता है. इसी तरह 2 सालों की अवधि वाली FD योजनाओं पर इन बैंकों द्वारा दिया जाने वाला औसत इंटरेस्ट रेट 6.98% है लेकिन टैक्स की कटौती के आपको लगभग 4.93% के रिटर्न ही प्राप्त होते हैं. 

FD के अलावा अन्य विकल्प
टैक्स की कटौती के बाद FD से मिलने वाले कम रिटर्न्स की वजह से भी एक्सपर्ट्स द्वारा इन्वेस्टर्स को सलाह दी जाती है कि उच्च रिटर्न्स के लिए वह अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में म्युचुअल फंड्स जैसे मार्केट से संबंधित प्रोडक्ट्स को शामिल करें. वैसे तो म्युचुअल फंड से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लगाया जाता है लेकिन लॉन्ग-टर्म में ऐसी योजनाओं से मिलने वाले रिटर्न्स ही आपकी कमाई में टैक्स की वजह से हुई कमी की भरपाई कर देते हैं. 

FD के फायदे
जिनके पास आय के विभिन्न स्त्रोत नहीं हैं और पुरानी एवं नई टैक्स व्यवस्थाओं के अंतर्गत भी उनकी कमाई टैक्स कटौती की सीमाओं के अन्दर है, ऐसे इन्वेस्टर्स के लिए FD योजनाओं के अपने अलग फायदे हैं. हाल ही में कई बैंकों द्वारा FD के इंटरेस्ट रेट्स में भी बढ़ोत्तरी की गयी है. अब वरिष्ठ नागरिकों को छोटे फाइनेंस बैंकों के साथ लगभग 9.6% जितना इंटरेस्ट प्राप्त हो सकता है जबकि अन्य लोगों को 9.1% जितना इंटरेस्ट रेट मिल सकता है.
 

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