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डब्बावालों से इंस्पायर है लंदन की DabbaDrop, जानें इस फूड डिलीवरी सिस्टम की पूरी कहानी 

आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर लंदन की एक कंपनी का वीडियो शेयर किया है, जो मुंबई के डब्बावालों की तरह खाना डिलीवर करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

आप मुंबई में रहे हों या नहीं, लेकिन मुंबई के डब्बावाला (Dabbawalas) के बारे में जरूर सुना होगा. फूड डिलीवरी का ये सिस्टम पूरी दुनिया में मशहूर है. अपने काम के लिए पूरी तरह से समर्पित डब्बावालों की तारीफ ब्रिटेन का राजघराना भी कर चुका है. अब मुंबई के डब्बावालों से प्रेरित होकर लंदन की एक कंपनी के डिब्बों में खाना भरकर बेचने की खबर सामने आई है. खास बात ये है कि इसके लिए डिब्बे भी काफी हद तक वैसे ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जैसे ही मुंबई के डिब्बावाले करते हैं. महिंद्रा एंड महिंदा के फाउंडर आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है.  

ये हैं DabbaDrop की फाउंडर
आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने लंदन की कंपनी का वीडियो शेयर करते हुए इसे उल्टा साम्राज्यवाद बताया है. वीडियो में दिखाया गया है कि कुछ लोग डिब्बे में खाना भरकर विभिन्न इलाकों में पहुंचा रहे हैं. इस विदेशी कंपनी ने खाना घर-घर पहुंचाने के लिए मुंबई के डिब्बेवालों का सिस्टम अपनाया है और डिब्बे भी काफी हद तक वैसे ही हैं. DabbaDrop नाम की यह कंपनी लंदन में रजिस्टर्ड है. इसकी शुरुआत Renee और Anshu ने की थी. कंपनी के मेनू में पंजाबी, दिल्ली, गोवा, हैदराबाद के साथ-साथ पाकिस्तान के मशहूर व्यंजन हैं. 

100% प्लास्टिक फ्री पैकेजिंग 
DabbaDrop खाने की डिलीवरी स्टील के डिब्बों में करती है. कंपनी लंदन के 1 से 3 तक सभी जोन में डिलीवरी करती है और अब तक 169,000 डिब्बे पहुंचा चुकी है. कंपनी का कहना है कि 100% प्लास्टिक पैकेजिंग के चलते उसका खाना पूरी तरह से सुरक्षित है और पर्यावरण के भी अनुकूल है. कंपनी की वेबसाइट पर साफ तौर पर लिखा हुआ है कि उनका बिजनेस मुंबई के डब्बावालों से प्रेरित है. DabbaDrop बड़ों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी डिब्बा पहुंचाती है. उसमे मेनू में समौसे से लेकर मिठाई तक बहुत कुछ शामिल है.

इन कंपनियों ने बिगाड़ा गणित
अब मुंबई के डब्बावालों की बात करें, तो वह लगभग 130 सालों से मुंबई की पहचान बने हुए हैं. ये मुंबई में काम करने वाले सैकड़ों सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों को खाने का डब्बा पहुंचाने का काम करते हैं. कुछ वक्त पहले तक मुंबई में डब्बा वाले संघ से 5000 से ज्यादा लोग जुड़े हुए थे और हर दिन ये लगभग दो लाख से ज्यादा डब्बा पहुंचाए जा रहे थे. लेकिन Zomato जैसी कंपनियों के आने के बाद उनका बिजनेस प्रभावित हुआ है. बताया जाता है कि साल 1890 में Mahadu Havji Bache द्वारा इसकी शुरुआत की गई थी. पहले केवल 100 लोगों को ही डिब्बा पहुंचाया जाता था, लेकिन मुंबई के विस्तार के साथ इसका भी विस्तार होता गया. 

ब्रिटिश राज घराने से खास जुड़ाव
मुंबई के डब्बावाले बाकायदा एक खास यूनिफॉर्म पहनते हैं. इन्हें आमतौर पर सफेद रंग का कुर्ता-पायजामा, सिर पर गांधी टोपी और पैरों में कोल्हापुरी चप्पल पहने देखा जा सकता है. आंधी आए या तूफान इनकी डिलीवरी हमेशा समय पर ही होती है. ब्रिटिश राजघराने का मुंबई डब्बावाला संगठन से खास जुड़ाव रहा है. दरअसल, 2003 में जब किंग चार्ल्स बतौर प्रिंस भारत दौरे पर आए थे, तब उन्होंने मुंबई के डिब्बावालों से मुलाकात की थी. अप्रैल 2005 में लंदन में प्रिंस चार्ल्स और कैमिला पार्कर के विवाह समारोह में डब्बावाला संघ के दो सदस्यों को आमंत्रित भी किया गया था. ब्रिटेन का शाही परिवार लाओ मौकों पर डिब्बावालों के काम की तारीफ कर चुका है. 

संकट में 130 साल पुराना पेशा 
डिब्बावालों के बिजनेस सिस्टम आज भी बेहद फेमस है, लेकिन उनका कारोबार अब पहले जैसा नहीं रहा है. पिछले साल आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले करीब 5000 डिब्बावाले थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 2000 से 1500 के पास रह गई है. दरअसल, ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियां 130 साल पुराने इस पेशे के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर आई हैं. ग्राहकों की संख्या में कमी आने से डब्बावालों का काम कम हो गया है और ऐसे में कुछ को पार्टटाइम नौकरी भी करनी पड़ रही है. हालांकि, इस चुनौती से निपटने की कोशिश भी हो रही है. मुंबई टिफिन बॉक्स सप्लाई ट्रस्ट की ओर से पिछले साल बताया गया था कि उसकी एक सेंट्रल किचन शुरू करने की योजना है. इसके तहत जो महिलाएं घर से खाना बना रही हैं, उनके खाने की डब्बावालों के जरिए डिलीवरी कराई जाएगी. इससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा और डब्बेवालों को भी.


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