BW बिजनेसवर्ल्ड का लेटेस्ट एडिशन 8वें सालाना BW Disrupt YEA (Young Entrepreneur & Enterprise Awards) स्पेशल को प्रदर्शित करता है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
कीमतों में कटौती, बड़ी-बड़ी छंटनी और बंदिशों के चलते पिछ्ला साल भारतीय स्टार्टअप्स के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. लेकिन बहुत से नौजवान उद्यमी (Young Entrepreneurs) इस स्थिति में भी मजबूती से डटे रहे, अपनी कमाई से कई बंदिशों को पार किया और इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला.
सभी इंडस्ट्रीज से आए नामांकन
BW बिजनेसवर्ल्ड (BW BusinessWorld) का लेटेस्ट एडिशन 8वें सालाना BW Disrupt YEA (Young Entrepreneur & Enterprise Awards) स्पेशल पर केंद्रित है. फाइनल नतीजों पर पहुंचने के लिए एक विशेष स्क्रीनिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया था. ब्यूटी एंड पर्सनल केयर, अपैरल, लॉजिस्टिक्स, फूड, हेल्थटेक, फिनटेक, ई-कॉमर्स और सोशल एंटरप्राइज जैसी विभिन्न इंडस्ट्रीयों के उद्यमी और एंटरप्राइजों द्वारा इस सेगमेंट में नामांकन दर्ज किये गए थे. जिसके बाद इस शानदार लिस्ट से एक समारोह के दौरान पर्दा उठाया गया था. इस समारोह में भविष्य के 15 लीडर्स को उनके विश्लेषण के तरीकों और मैनेजमेंट के लिए सम्मानित किया गया.
2023 के लिए यह था जूरी पैनल
BW Disrupt YEA के 8वें एडिशन की जूरी में इंडस्ट्री के प्रमुख लीडर्स शामिल थे. इस साल की जूरी लिस्ट में इन प्रमुख नामों को शामिल किया गया था:
अंकित अग्रवाल, डायरेक्टर- Venture Debt और Lighthouse Canton
संबित दाश, पार्टनर - RPSG Capital Ventures
बाला C. देशपांडे, फाउंडर और पार्टनर - MegaDelta Capital
अर्पित अग्रवाल, डायरेक्टर - Blume Ventures
निनाद कापडे, पार्टनर - 100X.VC
अंकित केडिया, फाउंडर - Capital A
उमा शंकर भारद्वाज, फाउंडर और CEO - iAvatarZ Digital
आदित्य प्रकाश गुप्ता, पार्टनर - GEMs
भविष्य के उभरते सितारे
BW बिजनेसवर्ल्ड के कवर पेज पर 15 सबसे टैलेंटेड उद्यमियों को शामिल किया गया है. ये 15 होनहार और टैलेंटेड उद्यमी इस प्रकार से हैं:
आकृति रावल, को-फाउंडर & CEO - House Of Chikankari
अजय लाखोटिया, फाउंडर & CEO - StockGro
अंकित फतेहपुरिया, फाउंडर - Zetwerk Manufacturing
भरत बंसल, को-फाउंडर & CEO – Nirmalaya Wellness
दिविज बजाज, फाउंडर & CEO – Power Gummies
प्रीत पाल ठाकुर, को-फाउंडर – Glamyo Health
कार्तिक हजेला, को-फाउंडर & CEO – Log9 Materials
किशन करुणाकरण, CEO – BuyoFuel
पल्लवी श्रीवास्तव, को-फाउंडर & डायरेक्टर – Pragcap
पारुल शर्मा, फाउंडर & CEO – Gladful Foods
प्रणव बजाज, को-फाउंडर – Medulance
संदीप देवगन, CEO – Stonefield Flavours
सौरभ कुमार अग्रवाल, फाउंडर & CTO – Reshamandi
शोभित राज, डायरेक्टर & को-फाउंडर – Prozeal Infra Engineering
विवेक सिंह, को-फाउंडर & CEO – Anveya Living
.jpeg)
इस तरह की गयी थी जांच
अंतिम नतीजे प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से अनुशासित एक प्रक्रिया को अपनाया गया था. इस प्रक्रिया के पहले फेज में विभिन्न बिजनेस मॉडल्स और क्षेत्रों से प्राप्त हुए 150 से ज्यादा नामांकनों की स्क्रीनिंग की गयी. दूसरे फेज में 50 लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया और उन्हें जूरी के सामने पेश करने के लिए तैयार किया गया. फाउंडर के विजन, मार्केट के साइज, फाइनेंशियल वृद्धि, सामाजिक प्रभाव की गुंजाइश, और लॉन्ग-टर्म में बिजनेस के संभावित लक्ष्यों जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर दर्ज किये गए नामांकनों का प्रमुख रूप से मूल्यांकन किया गया. सभी नौजवान उद्यमियों की उम्र 35 साल ही हो और उनकी अपनी इंडस्ट्रीज में उनकी एंटरप्राइज को सात सालों से ज्यादा का समय न हुआ, इस बात की जांच करना नामांकनों का एक अन्य महत्त्वपूर्ण पहलू था. इसके साथ ही इस प्रक्रिया में प्रमुख रूप से स्टार्टअप सेक्टर और इंडस्ट्री के सर्वश्रेष्ठ अध्यक्षों की जांच पर जोर दिया गया.
House Of Chikankari और Anveya Living का भविष्य
BW बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत के दौरान House Of Chikankari की को-फाउंडर और CEO आकृति अग्रवाल ने कहा, भविष्य को देखते हुए हम अपने विकास और वृद्धि के प्लान्स की तरफ प्रतिबद्ध हैं. हमारा ध्यान पूरी तरह से कस्टमर्स के अनुभव को बेहतर बनाने, अपने काम करने के तरीके को डिजिटलाईज करने और कस्टमर्स को ज्यादा से ज्यादा आकर्षित करने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग करने पर है. मेन्स-वियर में अपनी मौजूदगी को बढ़ाकर और नई मार्केटों को एक्स्प्लोर करके हमने वापसी की है. दूसरी तरफ अपने बिजनेस के विकास में काफी मुसीबतों का सामना कर चुके Anveya Living के को-फाउंडर & CEO विवेक सिंह ने कहा, हालांकि किसी और समय पर चीजें बेहतर हो सकती थीं, लेकिन मुझे लगता है कि मुश्किल समय में बनायी गयी या जन्म लेने वाली कंपनियां ज्यादा लचीली होती हैं और लॉन्ग-टर्म में यह जीत प्राप्त करती हैं.
Power Gummies और Nirmalaya Wellness का भविष्य
भविष्य को लेकर अपने प्लान्स और लक्ष्यों के बारे में BW बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत करते हुए Power Gummies के फाउंडर & CEO दिविज बजाज ने कहा, 2023 में हम बच्चों के लिए Gummies के साथ-साथ जनरिक वेलनेस में नए वैरिएंट्स को लॉन्च करने के बारे में विचार कर रहे हैं. हम अपनी प्रोडक्ट लाइन को बड़ा बनाना चाहते हैं ताकि हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच पायें और विकसित होते मार्केट के एक सेगमेंट में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा पाएं. Nirmalaya Wellness के को-फाउंडर और CEO भरत बंसल ने कहा, 2023 में हम अपने बिजनेस को 3 से 4 गुना बढ़ाने के बारे में प्लान कर रहे हैं. अब हमारा ध्यान भारत में अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने और एक्सपोर्ट्स पर है. हम अमेरिका में अपने प्रोडक्ट्स लॉन्च करने वाले हैं और उसके बाद हम पांच या पांच से ज्यादा अन्य देशों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाएंगे.
Glamyo Health और Medulance का भविष्य
इमरजेंसी हेल्थकेयर सेक्टर के बारे में बातचीत करते हुए Glamyo Health के को-फाउंडर प्रीत पाल ठाकुर ने कहा, हमारा ध्यान मरीजों को सच में पीड़ा देने वाले विषयों को सॉल्व करने पर है. इसके साथ ही हमारा ध्यान डेंटल जैसे नए वर्टिकल्स के विकास के बारे में भी है. डेंटल एक ऐसा सेक्टर है जो बहुत ही बड़ा है और पिछले कुछ समय में प्रॉफिटेबल विकास के साथ-साथ इस क्षेत्र की कीमतों में भी काफी कसाव देखने को मिला है. दूसरी तरफ Medulance के को-फाउंडर प्रणव बजाज ने कहा, हमारा मानना है कि असिस्टेंस तब उपलब्ध करवाई जानी चाहिए जब उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो. हम पूरी तरह से एक टिकाऊ और प्रभावशाली बिजनेस बनाना चाहते हैं.
StoneField Flavours और Gladful Foods States का भविष्य
F&B (फूड और बेवरेज) इंडस्ट्री एक ऐसी मार्केट है जिसमें कम्पटीशन बहुत ही ज्यादा है. कोविड से पहले और बाद के समय में विभिन्न कारकों और क्षेत्रों के बारे में बात करते हुए StoneField Flavours के CEO संदीप देवगन ने कहा, हमें सफलता इसलिए मिली है क्योंकि हमने बदलावों को बहुत ही जल्द अपना लिया, खासकर महामारी के दौरान. 2022-23 का साल हमारे लिए काफी अच्छा रहा है और हम बदलाव को प्रेरित करने और अन्य लोगों को खुश करने के अपने विजन के साथ पूरी सच्चाई से बने रहे. Gladful Foods States की फाउंडर और CEO पारुल शर्मा ने कहा, हमारी कंपनी का विजन भारत में प्रोटीन और अन्य तरह के पोषण की कमियों को दूर करना है. हम अपने कंज्यूमर्स के द्वारा दिए गए फीडबैक के आधार पर जल्द बदलाव को अपना लेते हैं. हमें हर महीने Whatsapp, ई-मेल और फोन कॉल्स के माध्यम से लगभग 20,000 कंज्यूमर्स के फीडबैक प्राप्त होते हैं.
StockGro और Progcap का भविष्य
अगर फिनटेक इंडस्ट्री की बात करें तो StockGro के फाउंडर और CEO अजय लखोटिया ने BW बिजनेसवर्ल्ड से बातचीत के दौरान कहा, सोशल मीडिया के माध्यम से टारगेट ऑडियंस तक पहुंचने और उन्हें अपना सन्देश देने में हमारे ब्रैंड के कैम्पेन्स काफी आगे हैं. हमने अपनी ऑफलाइन पहलों और ऑन-ग्राउंड एन्गेजमेंट को लगभग दोगुना कर लिया है. Progcap की डायरेक्टर और को-फाउंडर पल्लवी श्रीवास्तव ने कहा, मुसीबतों का सामना करने के बावजूद हमारा ध्यान अभी भी अपने लोगों और कस्टमर्स की वृद्धि पर है.
Prozeal Infra और Zetwerk का भविष्य
बढ़ते हुए बिजनेसों पर बात करते हुए Prozeal Infra Engineering के डायरेक्टर और को-फाउंडर शोभित राय ने खुलासा करते हुए कहा – अगर बिजनेस के विकास की बात करें तो तो कंपनी सालाना आधार पर अपनी क्षमता को दोगुना करती आई है और वित्त वर्ष 2022-23 भी कुछ अलग नहीं रहा है. हमने न सिर्फ अपनी कमाई के लक्ष्यों को बल्कि EBITDA के लिए तय किये गए लक्ष्यों को भी प्राप्त किया है, जो कंपनी के बैलेंस को सही बनाये रखने के लिए जरूरी हैं. दूसरी तरफ Zetwerk Manufacturing के को-फाउंडर अंकित फतेहपुरिया ने कहा, Zetwerk भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए पर्याप्त मांग को लेकर आएगा और इस प्रक्रिया के दौरान देश की GDP और विकास में बदलाव करेगा.
इस एडिशन में यह भी है स्पेशल
BW बिजनेसवर्ल्ड के इस एडिशन में भारत के सबसे शानदार और जबरदस्त व्यक्तियों में से एक, Harvard के प्रोफेसर तरुण खन्ना का एक आर्टिकल भी शामिल है. इस आर्टिकल का विषय, Entrepreneurship As a State Of Mind’ है. बिजनेसवर्ल्ड के इस एडिशन में श्री श्री रवि शंकर का इंटरव्यू ‘The Art Of Living Founder’ भी फीचर किया गया है.
यह भी पढ़ें: चढ़ती कीमतों से परेशान जनता को राहत, शून्य से भी नीचे पहुंच गई महंगाई
सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मुंबई में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को रिलायंस एडीए ग्रुप () की कंपनियों से जुड़े तीन मामलों में 17 ठिकानों पर छापेमारी की. ये मामले रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार इन मामलों में बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को कुल ₹27,337 करोड़ का कथित नुकसान हुआ है.
निदेशकों के घरों और कंपनियों के दफ्तरों में तलाशी
सीबीआई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि तलाशी अभियान कंपनियों के निदेशकों के आवासों और उन मध्यस्थ कंपनियों के कार्यालयों में चलाया गया, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक फंड्स के डायवर्जन के लिए किया गया था.
मामले में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह की कंपनियां जांच के दायरे में हैं. हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
विशेष अदालत से मिला था तलाशी वारंट
सीबीआई ने शुक्रवार, 8 मई को मुंबई की विशेष अदालत से तलाशी वारंट हासिल किया था. अधिकारियों के मुताबिक छापेमारी के दौरान कई अहम और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं. जांच एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान यह भी सामने आया कि कई मध्यस्थ कंपनियां एक ही पते से संचालित हो रही थीं. मामले की जांच अभी जारी है.
रिलायंस ग्रुप के खिलाफ दर्ज हैं सात मामले
सीबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न बैंकों और LIC की शिकायतों के आधार पर रिलायंस ग्रुप के खिलाफ अब तक सात मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है. एजेंसी इससे पहले भी पिछले कुछ महीनों में 14 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है.
RCom के दो वरिष्ठ अधिकारी पहले ही गिरफ्तार
इससे पहले सीबीआई ने ₹2,929 करोड़ के बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एजेंसी ने 24 अप्रैल को RCom के दो वरिष्ठ अधिकारियों, संयुक्त अध्यक्ष डी. विश्वनाथ और उपाध्यक्ष अनिल काल्या को गिरफ्तार किया था. CBI के अनुसार डी. विश्वनाथ समूह के बैंकिंग संचालन की समग्र जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अनिल काल्या बैंकिंग संचालन, भुगतान और फंड उपयोग में उनकी सहायता कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही जांच
CBI ने कहा कि दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निगरानी कर रहा है.
सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सिटी ग्रुप (Citigroup) ने भारत को अपनी ग्लोबल एसेट एलोकेशन में “अंडरवेट” कर दिया है. यह फैसला लगातार बने मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों, भू-राजनीतिक जोखिमों और कमजोर कॉर्पोरेट अर्निंग्स को देखते हुए लिया गया है.
ब्रोकरेज ने Nifty 50 के लिए साल के अंत का लक्ष्य 27,000 तय किया है, जो मौजूदा स्तर 24,176 से लगभग 11.7% की बढ़त दर्शाता है. हालांकि, सिटी ने स्पष्ट किया कि कमाई के आउटलुक में जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं.
ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों पर चिंता
सिटी के नोट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए उनके अर्निंग्स ग्रोथ अनुमान अभी तक ईरान युद्ध के संभावित प्रभाव को पूरी तरह शामिल नहीं करते. अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है या ऊर्जा कीमतों में और तेजी आती है, तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.
भारत पर मॉडल में कमजोर रेटिंग, लेकिन पोजिशनिंग हल्की
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत पिछले कुछ समय से उनके मॉडल में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है. हालांकि, निवेशकों की पोजिशनिंग भारतीय बाजार में अभी हल्की है और अर्निंग्स को लेकर अपेक्षाएँ कई अन्य बाजारों की तुलना में अधिक संतुलित हैं.
सेक्टर वाइज नजरिया
सिटी ने कुछ सेक्टर्स पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है, जिनमें बैंकिंग, टेलीकॉम, डिफेंस और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं. वहीं, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी, कंज्यूमर स्टेपल्स और आईटी सर्विसेज पर अंडरवेट रेटिंग दी गई है.
भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी बाजारों में अस्थिरता देखी गई है. निवेशक वैश्विक विकास चिंताओं, भू-राजनीतिक जोखिमों और कॉर्पोरेट अर्निंग्स के रुझानों के बीच घरेलू मजबूत बुनियादों का मूल्यांकन कर रहे हैं.
Ipsos की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि अमेरिका-ईरान तनाव का असर केवल राजनीतिक और सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की आर्थिक सोच, खर्च और ब्रांड भरोसे पर भी पड़ रहा है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एशिया-प्रशांत देशों के उपभोक्ताओं पर भी दिखाई देने लगा है। रिसर्च फर्म Ipsos की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के कारण ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता ने उपभोक्ता विश्वास को कोविड-19 महामारी के बाद सबसे निचले स्तरों में पहुंचा दिया है.
एशिया-प्रशांत देशों में उपभोक्ता भरोसे में बड़ी गिरावट
Ipsos की ग्लोबल कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उपभोक्ता भरोसे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता विश्वास सूचकांक 2 अंक गिरकर 46.7 पर पहुंच गया है. सबसे ज्यादा गिरावट थाईलैंड में 10.9 अंक की रही। इसके बाद मलेशिया में 6.1 अंक, दक्षिण कोरिया में 5.1 अंक, जापान में 4.7 अंक और ऑस्ट्रेलिया में 4.5 अंक की गिरावट दर्ज की गई.
ऊर्जा कीमतों ने बढ़ाई घरेलू चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष का सबसे बड़ा आर्थिक असर ऊर्जा बाजारों पर पड़ा है। जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों में ईंधन कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में सरकारों ने राहत उपाय शुरू किए हैं, जबकि उपभोक्ता खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं और केवल जरूरी चीजों पर ध्यान दे रहे हैं.
भारत में जरूरी खर्चों की ओर झुकाव
Ipsos इंडिया के कंट्री मैनेजर सुरेश रामालिंगम ने कहा कि ईरान संघर्ष भारत की आर्थिक मजबूती की परीक्षा ले रहा है। आयात लागत बढ़ने के कारण उपभोक्ता अब गैर-जरूरी खर्चों से बच रहे हैं और आवश्यक वस्तुओं पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.
उन्होंने बताया कि सरकार ईंधन बचत और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें फ्यूल सेविंग कुकिंग विकल्प और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहन शामिल हैं.
दक्षिण कोरिया और फिलीपींस में भी बढ़ी चिंता
दक्षिण कोरिया में सरकार ने अस्थायी ईंधन मूल्य सीमा लागू की है और प्रभावित परिवारों के लिए राहत योजनाएं तैयार की हैं. वहीं, फिलीपींस में डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बाद सरकार ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां लोगों ने यात्रा और गैर-जरूरी खर्च कम करना शुरू कर दिया है.
‘ब्रांड अमेरिका’ पर घटा भरोसा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि कमजोर हो रही है। 30 देशों में केवल 39 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका को विश्व मामलों में सकारात्मक ताकत माना. इसके विपरीत चीन को लेकर सकारात्मक सोच में बढ़ोतरी देखी गई। मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और सिंगापुर जैसे ASEAN देशों में चीन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण 70 प्रतिशत से अधिक रहा.
ब्रांड की पहचान पर भी असर
Ipsos के अनुसार, अब किसी ब्रांड का मूल देश उपभोक्ताओं के भरोसे और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर रहा है। कई बाजारों में अमेरिकी ब्रांड्स पर अधिक सवाल उठ रहे हैं, जबकि एशियाई ब्रांड्स तेजी से भरोसा हासिल कर रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के उपभोक्ता वैश्विक ब्रांड्स को स्थानीय ब्रांड्स की तुलना में बेहतर मानते हैं, लेकिन अब एशियाई कंपनियों की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी इस धारणा को बदल रही है.
हुंडई मोटर इंडिया का यह बड़ा निवेश और नए मॉडल लॉन्च करने की योजना भारतीय ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों में शामिल हुंडई मोटर इंडिया ने भारत में अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि वह चालू वित्त वर्ष में 7,500 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेगी और दो नए वाहन मॉडल लॉन्च करेगी.
दो नए मॉडल लॉन्च करेगी कंपनी
हुंडई मोटर इंडिया ने कहा कि वह इस साल एक नई मिड-साइज स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (SUV) और भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक कॉम्पैक्ट SUV बाजार में उतारेगी. कंपनी को उम्मीद है कि मार्च 2027 तक समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में घरेलू बिक्री और निर्यात में 8 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज होगी.
पुणे प्लांट का होगा विस्तार
कंपनी ने अपने पुणे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विस्तार की भी घोषणा की है. फेज-II विस्तार कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता में 70,000 यूनिट की बढ़ोतरी की जाएगी. इस विस्तार के बाद भारत में हुंडई की कुल उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़कर 11.4 लाख वाहन प्रतिवर्ष हो जाएगी.
तिमाही मुनाफे में आई गिरावट
निवेश और विस्तार योजनाओं के साथ कंपनी ने अपने तिमाही नतीजे भी जारी किए। मार्च तिमाही में हुंडई मोटर इंडिया का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 23 प्रतिशत घटकर 1,221 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 1,582 करोड़ रुपये था.
राजस्व में बढ़ोतरी, लेकिन मार्जिन पर दबाव
कंपनी का परिचालन राजस्व मार्च तिमाही में 5 प्रतिशत बढ़कर 18,452 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA में 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,966 करोड़ रुपये पर आ गया. EBITDA मार्जिन भी घटकर 10.4 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 14.1 प्रतिशत था.
पूरे वित्त वर्ष का प्रदर्शन
31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध लाभ 4 प्रतिशत घटकर 5,431 करोड़ रुपये रहा। वहीं राजस्व 2 प्रतिशत बढ़कर 70,763 करोड़ रुपये पहुंच गया. पूरे साल के दौरान EBITDA 4 प्रतिशत घटकर 8,598 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 12.2 प्रतिशत पर आ गया.
घरेलू बिक्री और निर्यात में बढ़ोतरी
हुंडई ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी ने घरेलू बाजार में अब तक की सबसे अधिक तिमाही बिक्री दर्ज की। इसका बड़ा कारण पिछले साल सितंबर में घोषित जीएसटी कटौती और नए उत्पादों की लॉन्चिंग रही.
मार्च तिमाही में घरेलू थोक बिक्री 8.7 प्रतिशत बढ़ी, जबकि निर्यात में 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पूरे वित्त वर्ष में निर्यात 16.4 प्रतिशत बढ़ा, जो वैश्विक बाजारों में मजबूत मांग को दर्शाता है.
कंपनी ने X पर जानकारी देते हुए बताया कि पीएम के साथ बैठक में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई. यह मुलाकात जॉन फर्नर की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट (Walmart) ने भारत में अपने कारोबार के विस्तार को लेकर मजबूत संकेत दिए हैं। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जॉन फर्नर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जिसमें भारत की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और विदेशी निवेश के अवसरों पर चर्चा हुई.
भारत में निवेश बढ़ाने पर जोर
वॉलमार्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत में अपने परिचालन को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है. कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत हुई. यह मुलाकात जॉन फर्नर की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान हुई.
फ्लिपकार्ट अधिग्रहण के बाद बढ़ा दायरा
वॉलमार्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण कर भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में प्रवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने डिजिटल पेमेंट्स और सप्लाई चेन सेवाओं में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. कंपनी भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में से एक मानकर लगातार निवेश बढ़ा रही है.
40 अरब डॉलर से अधिक का सोर्सिंग कारोबार
वॉलमार्ट ने बताया कि वह अब तक भारत से 40 अरब डॉलर से अधिक के उत्पादों की खरीद कर चुका है। company स्थानीय उद्यमियों और सप्लायर्स के साथ साझेदारी को और मजबूत करने पर भी काम कर रही है. जॉन फर्नर ने कहा कि कंपनी सप्लायर क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों को सुधारने और भारतीय विनिर्माण को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने पर ध्यान दे रही है.
IPO की तैयारी में फ्लिपकार्ट और फोनपे
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट और डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे भारत में अपने-अपने आईपीओ (IPO) की तैयारी कर रही हैं. वॉलमार्ट के पास फ्लिपकार्ट में लगभग 80 प्रतिशत और फोनपे में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है.
भारत वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन रहा है
वैश्विक कंपनियों के लिए भारत अब एक महत्वपूर्ण सोर्सिंग और ग्रोथ मार्केट के रूप में उभर रहा है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण अंतरराष्ट्रीय रिटेलर्स भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं.
वॉलमार्ट और भारत सरकार के बीच हुई यह उच्च स्तरीय बातचीत संकेत देती है कि कंपनी आने वाले समय में भारत में अपने निवेश और विस्तार को और तेज कर सकती है। फ्लिपकार्ट और फोनपे के संभावित आईपीओ के साथ भारत वॉलमार्ट की वैश्विक रणनीति का और भी अहम हिस्सा बनता जा रहा है.
लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया है. वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की सक्रिय भूमिका जारी है, जिससे रुपये की स्थिरता बनाए रखी जा सके.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 मई को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट लगातार दूसरे सप्ताह देखने को मिली है, जिससे आर्थिक दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर साफ दिखाई देता है.
लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट
इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 698.487 अरब डॉलर पर आ गया था. लगातार दो हफ्तों में गिरावट ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है.
रिकॉर्ड स्तर से नीचे आया भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार ने फरवरी 27 को समाप्त सप्ताह में 728.494 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था. हालांकि इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा है, जिसमें भारत भी शामिल है.
RBI की बाजार में सक्रिय भूमिका
रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री के जरिए हस्तक्षेप किया है. इसका उद्देश्य मुद्रा बाजार को स्थिर बनाए रखना और अचानक गिरावट से बचाना है.
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट
ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, 2.797 अरब डॉलर घटकर 551.825 अरब डॉलर रह गईं. इनमें यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं में बदलाव का प्रभाव शामिल होता है.
सोने के भंडार में तेज गिरावट
इस अवधि में सोने के भंडार में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. यह 5.021 अरब डॉलर घटकर 115.216 अरब डॉलर रह गया.
अन्य घटकों में मामूली बढ़ोतरी
स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में हल्की बढ़ोतरी देखी गई और यह 15 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.789 अरब डॉलर हो गया. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की आरक्षित स्थिति भी 8 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.863 अरब डॉलर पर पहुंच गई.
लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया है. वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की सक्रिय भूमिका जारी है, जिससे रुपये की स्थिरता बनाए रखी जा सके.
SBI के Q4 नतीजे संतुलित लेकिन दबाव वाले रहे. एक ओर मजबूत लोन ग्रोथ और रिकॉर्ड वार्षिक मुनाफा रहा, तो दूसरी ओर गैर-ब्याज आय में गिरावट और मार्जिन पर दबाव ने तिमाही प्रदर्शन को कमजोर किया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर बढ़ा जरूर है, लेकिन गैर-ब्याज आय में भारी गिरावट और मार्जिन पर दबाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया. नतीजों के बाद बाजार में बैंक के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली.
Q4 में मुनाफा 5.58% बढ़ा, लेकिन गति धीमी
मार्च तिमाही (Q4 FY26) में SBI का शुद्ध लाभ 5.58 फीसदी बढ़कर 19,684 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. हालांकि, पिछली तिमाही (Q3) की तुलना में इसमें 6.39 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो बैंकिंग प्रदर्शन में धीमेपन का संकेत देती है.
गैर-ब्याज आय में बड़ी गिरावट ने बढ़ाया दबाव
तिमाही के दौरान बैंक की गैर-ब्याज आय 29 फीसदी घटकर 17,314 करोड़ रुपये रह गई. यह गिरावट मुख्य रूप से निवेश बिक्री में 1,471 करोड़ रुपये के घाटे के कारण रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में बैंक को 6,879 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था. इसके अलावा 100 करोड़ रुपये का मार्क-टू-मार्केट (MTM) घाटा भी दर्ज किया गया, जिसने कुल मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव डाला.
ब्याज आय में सुधार, लेकिन मार्जिन पर असर
गैर-ब्याज आय में कमजोरी के बावजूद बैंक की शुद्ध ब्याज आय (NII) 4.1 फीसदी बढ़कर 44,380 करोड़ रुपये रही. यह वृद्धि मुख्य रूप से 16.9 फीसदी की मजबूत ऋण वृद्धि के कारण देखने को मिली. हालांकि, शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रहा और यह सालाना आधार पर 3% गिरकर तथा तिमाही आधार पर 18 बेसिस पॉइंट घटकर 2.93% पर आ गया. बैंक प्रबंधन के अनुसार, ब्याज दरों में कटौती का पूरा असर इस तिमाही में दिखा है.
पूरे वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड मुनाफा
कमजोर तिमाही प्रदर्शन के बावजूद पूरे वित्त वर्ष 2026 में SBI का प्रदर्शन मजबूत रहा. बैंक का शुद्ध लाभ 80,032 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 12.9% की वृद्धि दर्शाता है. यह दिखाता है कि बैंक की लंबी अवधि की कमाई क्षमता अब भी मजबूत बनी हुई है, भले ही तिमाही में उतार-चढ़ाव देखने को मिला हो.
परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार जारी
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया. सकल NPA घटकर 1.49% पर आ गया, जबकि शुद्ध NPA 0.39% पर स्थिर रहा. साथ ही प्रावधान खर्च में भी 21% की गिरावट दर्ज की गई, जो यह संकेत देती है कि बैड लोन पर दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और बैंक की बैलेंस शीट मजबूत हो रही है.
शेयर बाजार में गिरावट
शुक्रवार को नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर SBI का शेयर 6.62% गिरकर 1,019.55 रुपये पर बंद हुआ. बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से गैर-ब्याज आय में कमजोरी और मार्जिन पर दबाव के कारण देखी गई.
बैंक प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2027 के लिए लगभग 3% NIM का अनुमान जताया है. साथ ही, यदि ऋण वृद्धि 13–15% के दायरे में बनी रहती है, तो जमा दरों में बड़े बदलाव की संभावना सीमित रहने की उम्मीद है.
गूगल की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक विशाखापत्तनम में बनने वाला AI डेटा हब है. यह प्रोजेक्ट भारत का पहला गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब होगा, जिसमें तीन बड़े डेटा सेंटर कैंपस शामिल होंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) भारत में एक बड़े निवेश प्लान पर काम कर रही है. कंपनी का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सर्वर और ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-टेक क्षेत्रों पर है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि गूगल भारत में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के अवसरों पर विचार कर रहा है. यह कदम भारत को ग्लोबल डिजिटल और AI मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, अरबों डॉलर का निवेश
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने हाल ही में कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस निवेश का बड़ा हिस्सा AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर विकास पर खर्च किया जाएगा. कंपनी पहले ही भारत में लगभग 15 अरब डॉलर (करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की योजना का संकेत दे चुकी है. यह निवेश विशेष रूप से गीगावाट-स्केल AI इकोसिस्टम विकसित करने के लिए किया जा रहा है.
विशाखापत्तनम में बनेगा भारत का पहला AI गीगावाट हब
गूगल की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक विशाखापत्तनम में बनने वाला AI डेटा हब है. यह प्रोजेक्ट भारत का पहला गीगावाट-स्केल AI इंफ्रास्ट्रक्चर हब होगा, जिसमें तीन बड़े डेटा सेंटर कैंपस शामिल होंगे. इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने लगभग 600 एकड़ जमीन आवंटित की है. यह केंद्र भारत में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के भविष्य को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
अडानी और एयरटेल के साथ साझेदारी
इस बड़े प्रोजेक्ट कोगूगल ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर आगे बढ़ाने का फैसला किया है. इसमें AdaniConneX जैसी कंपनियां शामिल हैं. यह साझेदारी भारत में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और डेटा सेंटर नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की रणनीति
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग का एक भरोसेमंद ग्लोबल हब बनता जा रहा है. सरकार चाहती है कि वैश्विक टेक कंपनियां अपने सर्वर, GPU और चिप निर्माण भारत में ही करें. इससे न सिर्फ निवेश बढ़ेगा बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
AI और क्लाउड सेक्टर में बड़ा बदलाव
गूगल क्लाउड के सीईओ थॉमस कुरियन ने इस प्रोजेक्ट को भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक “टर्निंग पॉइंट” बताया है. वहीं गूगल क्लाउड के ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख बिकाश कोली के मुताबिक यह AI हब भारत को वैश्विक AI अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान दिलाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा प्रोसेसिंग और AI डेवलपमेंट को नई रफ्तार देगा.
भारत बन सकता है AI पावरहाउस
गूगल का यह मेगा प्लान साफ संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक AI और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है. डेटा सेंटर, ड्रोन और AI सिस्टम में होने वाला यह निवेश देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाली महिलाओं को नौकरी की सुरक्षा, लिखित अनुबंध, पेड लीव और सोशल सिक्योरिटी जैसे लाभ मिलने की संभावना अधिक रहती है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में महिलाओं की रोजगार स्थिति को लेकर आई SBI Research की नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, जो महिलाएं अपने परिवार की मुखिया होती हैं, उनके नियमित वेतन वाली नौकरी में होने की संभावना अन्य महिलाओं की तुलना में 4.4 प्रतिशत ज्यादा होती है.
यह अध्ययन पहली बार भारत के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के यूनिट-लेवल डेटा के आधार पर किया गया है. रिपोर्ट बताती है कि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं अधिक स्थिर और सुरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं.
नियमित नौकरी में बेहतर सुरक्षा और सुविधाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमित वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाली महिलाओं को नौकरी की सुरक्षा, लिखित अनुबंध, पेड लीव और सोशल सिक्योरिटी जैसे लाभ मिलने की संभावना अधिक रहती है.
शोधकर्ताओं ने इसके लिए वर्क क्वालिटी इंडेक्स (WQI) तैयार किया, जिसमें तीन मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया.
1. लिखित जॉब कॉन्ट्रैक्ट
2. पेड लीव की सुविधा
3. सोशल सिक्योरिटी लाभ
जिस कर्मचारी का WQI ज्यादा होता है, उसकी नौकरी को बेहतर गुणवत्ता वाली नौकरी माना गया है.
महिलाओं के लिए अब भी चुनौतीपूर्ण है रोजगार बाजार
हालांकि रिपोर्ट में महिला मुखियाओं की स्थिति बेहतर बताई गई है, लेकिन कुल मिलाकर महिलाओं के लिए रोजगार की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है. रिपोर्ट के अनुसार, महिला कर्मचारियों के अनौपचारिक रोजगार (Informal Jobs) में होने की संभावना पुरुषों की तुलना में 4.8 प्रतिशत अधिक है. ऐसे रोजगार में न तो लिखित अनुबंध होता है और न ही पेड लीव या सोशल सिक्योरिटी की सुविधा मिलती है.
भारत में करीब 80 से 90 प्रतिशत कार्यबल अब भी अनौपचारिक रोजगार क्षेत्र में काम कर रहा है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है.
राज्यों के बीच रोजगार गुणवत्ता में बड़ा अंतर
SBI की रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों की रोजगार गुणवत्ता और श्रम भागीदारी दर की भी तुलना की गई है.
बेहतर प्रदर्शन वाले राज्य
कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों में रोजगार भागीदारी और नौकरी की गुणवत्ता दोनों बेहतर पाई गईं.
कमजोर स्थिति वाले राज्य
उत्तर प्रदेश, बिहार और पंजाब में रोजगार भागीदारी और नौकरी की गुणवत्ता दोनों कम दर्ज की गईं.
ज्यादा काम लेकिन कम गुणवत्ता
राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ज्यादा लोग काम कर रहे हैं, लेकिन वहां नौकरी की गुणवत्ता कमजोर है. इसका मतलब है कि रोजगार तो मिल रहा है, लेकिन उसमें सुरक्षा और सुविधाओं की कमी है.
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा अनौपचारिक रोजगार
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में अनौपचारिक रोजगार की स्थिति ज्यादा गंभीर है. करीब 59 प्रतिशत अनौपचारिक कर्मचारी ग्रामीण इलाकों में काम करते हैं, जबकि 41 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में हैं. कृषि क्षेत्र अकेले 42 प्रतिशत अनौपचारिक रोजगार का हिस्सा है.
इसके अलावा ट्रेड, होटल और अन्य सेवा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोग बिना सुरक्षा वाले रोजगार में काम कर रहे हैं.
न्यूनतम वेतन से कम कमाई कर रहे लाखों कर्मचारी
रिपोर्ट में मजदूरी को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है. अध्ययन के अनुसार, भारत में करीब 25 प्रतिशत अस्थायी कर्मचारी न्यूनतम वेतन से कम कमाई कर रहे हैं. छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में सबसे ज्यादा कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन पा रहे हैं. महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी लगभग एक-तिहाई अस्थायी कर्मचारी कम भुगतान का सामना कर रहे हैं.
महिलाएं कुल अंडरपेड कर्मचारियों में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जबकि अस्थायी कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी केवल 25 प्रतिशत है. यह वेतन असमानता की गंभीर तस्वीर पेश करता है.
ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट से बदल सकती है तस्वीर
रिपोर्ट में स्किल ट्रेनिंग को रोजगार सुधार का बड़ा माध्यम बताया गया है. जिन कर्मचारियों ने किसी प्रकार की ट्रेनिंग ली है, उनके अनौपचारिक रोजगार में रहने की संभावना 4.8 प्रतिशत तक कम हो जाती है.
महिलाओं के मामले में सरकारी फंडिंग वाली ट्रेनिंग से स्वरोजगार की संभावना 5.8 प्रतिशत बढ़ती है, जबकि खुद के खर्च पर ली गई ट्रेनिंग से नियमित नौकरी मिलने की संभावना 3 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.
रोजगार सुधार के लिए सख्त कदम जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की बेहतर रोजगार भागीदारी के लिए स्किल डेवलपमेंट, औपचारिक रोजगार और सोशल सिक्योरिटी को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही न्यूनतम वेतन कानून का सख्ती से पालन कराने और अनौपचारिक रोजगार को कम करने के लिए बड़े श्रम सुधारों की आवश्यकता बताई गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं को बेहतर ट्रेनिंग, रोजगार सुरक्षा और वित्तीय अवसर मिलें, तो उनकी आय और नौकरी की गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार हो सकता है.
यह IPO देश के स्टार्टअप और ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि निवेशकों की नजर लंबे समय से क्विक कॉमर्स कंपनियों पर टिकी हुई है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की तेजी से उभरती क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो (Zepto)अब शेयर बाजार में बड़ी एंट्री करने जा रही है. 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी के लिए मशहूर यह स्टार्टअप अपने मेगा IPO के जरिए निवेशकों के बीच नया उत्साह पैदा करने की तैयारी में है. बाजार नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी का पब्लिक लिस्टिंग का रास्ता लगभग साफ हो चुका है.
कंपनी इस IPO के जरिए करीब ₹7,500 करोड़ से ₹9,300 करोड़ तक जुटाने की योजना बना रही है. माना जा रहा है कि यह फंडिंग Zepto को अपने बिजनेस विस्तार और प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ मजबूत स्थिति बनाने में बड़ी मदद करेगी.
₹9300 करोड़ तक जुटाने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेप्टो अपने IPO के जरिए 80 करोड़ डॉलर से 1 अरब डॉलर तक की पूंजी जुटा सकती है. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹9,300 करोड़ तक पहुंचती है. कंपनी फिलहाल अपने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) को अंतिम रूप देने में लगी हुई है. यदि सब कुछ तय समय के अनुसार रहा, तो अगले 2 से 3 महीनों के भीतर कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है.
यह IPO देश के स्टार्टअप और ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि निवेशकों की नजर लंबे समय से क्विक कॉमर्स कंपनियों पर टिकी हुई है.
सिर्फ 4 साल में स्टार्टअप से स्टॉक मार्केट तक
जेप्टो की शुरुआत साल 2020 में हुई थी और बेहद कम समय में कंपनी ने बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना ली. महज चार वर्षों में IPO तक पहुंचना किसी भी भारतीय स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है. लिस्टिंग के बाद Zepto देश की पहली ऐसी “प्योर प्ले क्विक कॉमर्स” कंपनी बन सकती है, जिसका मुख्य फोकस केवल फास्ट डिलीवरी बिजनेस मॉडल पर आधारित है. कंपनी की तेज ग्रोथ और ग्राहकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता ने इसे भारत के सबसे चर्चित स्टार्टअप्स में शामिल कर दिया है.
ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट को चुनौती देने की तैयारी
क्विक कॉमर्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है. जेप्टो को बाजार में पहले से मौजूद बड़े खिलाड़ियों जैसे Blinkit, Swiggy Instamart, Amazon Now, Flipkart Minutes और BigBasket जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है. इसी वजह से कंपनी अब अपने नेटवर्क, डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को मजबूत करने पर बड़ा निवेश करना चाहती है. IPO से जुटाई जाने वाली राशि का बड़ा हिस्सा बिजनेस विस्तार और नए शहरों में पहुंच बढ़ाने पर खर्च किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में क्विक कॉमर्स सेक्टर भारत में ई-कॉमर्स का सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा बन सकता है.
रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ रहे हैं ऑर्डर
जेप्टो की ग्रोथ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी के दैनिक ऑर्डर में जबरदस्त उछाल आया है. कुछ समय पहले तक कंपनी हर दिन करीब 15 से 17 लाख ऑर्डर डिलीवर करती थी, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 25 लाख ऑर्डर प्रतिदिन तक पहुंच गया है. ग्राहकों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि भारत में 10 मिनट डिलीवरी मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोग तेजी से क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
निवेशकों की नजर रहेगी IPO पर
जेप्टो का IPO आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित इश्यू में से एक बन सकता है. खासतौर पर युवा निवेशक और टेक स्टार्टअप्स में दिलचस्पी रखने वाले लोग इस IPO पर नजर बनाए हुए हैं. हालांकि, किसी भी IPO में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और बाजार जोखिमों को समझना बेहद जरूरी होता है.