सिखर फ्लीट की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब भारत को साफ, भरोसेमंद और टिकाऊ शहरी परिवहन की सख्त जरूरत है.
HDFC AMC के ताजा नतीजे साफ संकेत देते हैं कि कंपनी न सिर्फ मुनाफे के मोर्चे पर मजबूत हो रही है, बल्कि एसेट मैनेजमेंट, निवेशक आधार और बाजार हिस्सेदारी के मामले में भी लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही है.
मजबूत डील पाइपलाइन, बढ़ती मांग और AI पर बढ़ता फोकस इन्फोसिस के लिए *लॉन्ग टर्म में पॉजिटिव संकेत दे रहे हैं.
RBI का यह फैसला भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है. इससे न सिर्फ विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा बल्कि प्रतिस्पर्धा, सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा.
दिसंबर में थोक महंगाई का 8 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचना एक संकेत जरूर है कि कीमतों का दबाव लौट रहा है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में यह बढ़त काबू में रहेगी और अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलिवरी की दौड़ पर अब लगाम लगती दिख रही है और फोकस धीरे-धीरे गिग वर्कर्स की सुरक्षा और टिकाऊ कारोबार मॉडल की ओर शिफ्ट होता नजर आ रहा है.
मंगलवार को BSE का सेंसेक्स 301.93 अंक की तेजी के साथ 83,878.17 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE का निफ्टी भी 106.95 अंक चढ़कर 25,790.25 के स्तर पर बंद हुआ.
CAIT का कहना है कि छोटे व्यापारियों और MSMEs के हितों की सुरक्षा, व्यापार में पारदर्शिता और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना, आगामी बजट में प्राथमिकता होनी चाहिए.
NVIDIA जैसी कंपनियों की रिकॉर्ड कमाई, HBM और AI प्रोसेसर की बढ़ती मांग और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश आने वाले वर्षों में वैश्विक टेक इंडस्ट्री की दिशा तय करेंगे.
मजबूत आईपीओ मार्केट, बढ़ते एग्जिट्स और मुनाफे में आते यूनिकॉर्न्स भारत को वैश्विक टेक इनोवेशन का अहम केंद्र बना रहे हैं.
ईरान-इजरायल तनाव ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक घटनाओं का असर भारतीय कृषि और निर्यात बाजारों पर कितनी तेजी से पड़ सकता है.
यह साझेदारी न केवल भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी, बल्कि दीर्घकालिक व्यापार वृद्धि, रोजगार सृजन और भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगी.
क्रिसिल रेटिंग के अनुसार वेनेज़ुएला में राजनीतिक और सैन्य घटनाओं का भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार या तेल सुरक्षा पर फिलहाल कोई गंभीर असर नहीं दिख रहा है.
भारत एक निर्णायक मोड़ पर है. रणनीतिक सुधारों के साथ गिग वर्क कम वेतन वाली भूमिका से अवसरों की संरचित सीढ़ी में बदल सकता है.
एक सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को दर्शाती है. मजबूत आयात कवर और दीर्घकालिक ट्रेंड यह संकेत देते हैं कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति फिलहाल संतुलित और मजबूत बनी हुई है.
FY25 में भारत के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात में मात्रा के स्तर पर मजबूती देखने को मिली है, लेकिन कमजोर वैश्विक कीमतों ने निर्यात आय पर दबाव बनाए रखा है.
सोमवार को BSE सेंसेक्स 301.93 अंक की तेजी के साथ 83,878.17 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी भी 106.95 अंक चढ़कर 25,790.25 के स्तर पर बंद हुआ.
दिसंबर में महंगाई में वृद्धि के बावजूद, कुल मिलाकर यह दर अभी भी नियंत्रण में मानी जा रही है और RBI के अनुमान के दायरे में बनी हुई है.
TCS के Q3FY26 नतीजे दिखाते हैं कि कंपनी का नेट प्रॉफिट इस तिमाही में 14% गिरा है, लेकिन राजस्व और AI बिजनेस में मजबूत बढ़त ने निवेशकों और बाजार को संतोषजनक संकेत दिया है.
भारत और जर्मनी के बीच हुए ये चार ऐतिहासिक समझौते दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती देते हैं.