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सांसद कार्तिकेय शर्मा ने जीरो आवर में उठाया राष्ट्रीय ऊर्जा का अहम मुद्दा
कार्तिकेय शर्मा ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि भारत परमाणु पुनर्जागरण के कगार पर खड़ा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व और दूरदर्शी सुधारों के साथ भारत को एक वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, नवाचार-प्रधान परमाणु इकोसिस्टम बनाना चाहिए, जो अगले सौ वर्षों तक देश के ऊर्जा भविष्य को आकार देगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने मंगलवार को जीरो आवर के दौरान देश की परमाणु ऊर्जा विस्तार योजना को तेज करने के लिए निजी क्षेत्र की निर्णायक भागीदारी का ढांचा तैयार करने की मांग उठाई. उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारत को अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहिए.
भारत की वैज्ञानिक यात्रा: स्वतंत्रता से अब तक
कार्तिकेय शर्मा ने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के समय वैश्विक नेता भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं पर संदेह करते थे. आज वही देश चंद्रमा मिशनों का नेतृत्व कर रहा है और दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी परमाणु कार्यक्रमों में अग्रणी है. उन्होंने भारत की सभ्यतागत मजबूती को रेखांकित करने के लिए इक़बाल की एक कविता का भी जिक्र किया. उन्होंने भारत की वैज्ञानिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कैसे थुम्बा में बैलगाड़ियों पर रॉकेट के हिस्से ले जाए गए और अब चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की तैयारी की जा रही है. आर्यभट्ट उपग्रह के प्रक्षेपण से लेकर गगनयान मिशन तक ये उपलब्धियां पश्चिमी तकनीक के वर्षों तक के इनकार के बावजूद हासिल हुईं.
निजी क्षेत्र की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय उदाहरण
शर्मा ने 2020 में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधार का उदाहरण देते हुए बताया कि इस कदम ने 200 से अधिक स्पेसटेक स्टार्टअप्स और वैश्विक निवेशकों के भरोसे के साथ USD 44 बिलियन की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का निर्माण किया. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस परिवर्तनकारी मॉडल को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी लागू किया जाए.
उन्होंने बताया कि भारत की मौजूदा स्थापित परमाणु क्षमता केवल 8.8 GW है, जो बिजली मिश्रण में सिर्फ 3 प्रतिशत योगदान देती है. उन्होंने 2047 तक 100 GW की लक्ष्य-आधारित तेजी से वृद्धि की आवश्यकता को रेखांकित किया, ताकि नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्यों को पूरा किया जा सके और भारी उद्योगों को भरोसेमंद ऊर्जा प्रदान की जा सके.
शर्मा ने वैश्विक तुलना करते हुए कहा कि जहां भारत में निजी क्षेत्र की R&D में भागीदारी केवल 36 प्रतिशत है, वहीं अमेरिका में यह आंकड़ा 68 प्रतिशत है. यही नवाचार-प्रेरित गति अमेरिका को अगली पीढ़ी की परमाणु तकनीकों जैसे स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत रिएक्टर डिज़ाइनों में तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है.
निजी क्षेत्र के लिए सिफारिशें
शर्मा ने सरकार के निजी क्षेत्र को परमाणु क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देने के साहसिक निर्णय का स्वागत किया, लेकिन उन्होंने इसके तेज़ क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित कदम सुझाए:
1. PSU और उद्योग, स्टार्टअप्स और MSMEs के बीच ठोस संयुक्त उद्यम (Joint Venture) ढांचा तैयार करना.
2. भारत के स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) रोडमैप को तेज़ी से लागू करना, जिससे स्मार्ट सिटी और डेटा सेंटर के लिए SMR को ऊर्जा का आधार बनाया जा सके.
3. परमाणु ऊर्जा अधिनियम और CLND अधिनियम में दीर्घकालिक बाधाओं को दूर करके व्यापक निजी भागीदारी की अनुमति देना.
4. फ्यूजन अनुसंधान और अगली पीढ़ी के रिएक्टरों के लिए राष्ट्रीय R&D अनुदान का पर्याप्त विस्तार करना.
परमाणु विज्ञान से जुड़े व्यापक लाभ
शर्मा ने कहा कि परमाणु विज्ञान केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है. मजबूत परमाणु इकोसिस्टम कैंसर उपचार, चिकित्सा आइसोटोप उत्पादन, कृषि अनुसंधान, सामग्री विज्ञान और राष्ट्रीय सुरक्षा में भी मदद करता है. इन लाभों का पहला प्रभाव सबसे गरीब नागरिकों तक पहुँचता है.
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