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International Coffee Day: सिर्फ 7 बीजों से शुरू हुई थी भारत में कॉफी की कहानी

भारत में कॉफी कब आई, इसे लेकर कोई तय साल या दिन तो दर्ज नहीं है, लेकिन माना जाता है कि 1670 में भारत में कॉफी की मौजूदगी शुरू हुई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

International Coffee Day: Starbucks Coffee, Costa Coffee, CCD, Barista, Mc Café, Nescafe...अगर आप कॉफी के शौकीन हैं तो आपने कॉफी की दुनिया की इन नामचीन कंपनियों की कॉफी का स्वाद जरूर चखा होगा, लेकिन क्या कभी आपके मन में ये ख्याल आया कि भारत जहां सबसे ज्यादा चाय की चुस्कियां ली जाती हैं, कॉफी कहां से आ गई. जो कॉफी कभी रईसों के प्यालों में छलकती थी आज भारत के घरों में बनती है. आज इंटरनेशनल कॉफी डे के मौके पर चलिये जानते हैं भारत में कॉफी की शुरुआत की एक रोचक कहानी.

दुनिया में कॉफी का इतिहास

कॉफी का इतिहास यूं तो कई सौ साल पुराना है. माना जाता है कि कॉफी का प्रचलन अरब और यमन के देशों में था. वहां के लोग कॉफी की खेती करते थे. साल 1414 तक मक्का भी कॉफी से परिचित हो चुका था और 15वीं शताब्दी की शुरुआत में ये यमन के बंदरगाह मोका से मिस्र पहुंची. कॉफी का सेवन उस समय तक केवल सूफी संत ही करते थे. काहिरा में एक धार्मिक विश्वविद्यालय के पास के कुछ घरों में इसकी खेती होती थी. ये वो दौर था जब लोग कॉफी हाउस में बैठकर जैसे आज चाय पर चर्चा करते हैं वैसे कॉफी पर चर्चा होती थी. ये लोग मुशायरे सुनते थे और शतरंज की बाजियां खेलते. कई धार्मिक संगठनों को ये नागवार भी गुजरा, विरोध भी हुए, उन्हें लगता था ये किसी शराब के अड्डों से कम नहीं है. 

भारत में कॉफी कब आई

अरब से कॉफी के बीजों को कहीं और ले जाना कानूनन जुर्म था. भारत में कॉफी कब आई, इसे लेकर कोई तय साल या दिन तो दर्ज नहीं है, लेकिन माना जाता है कि 1670 में भारत में कॉफी की मौजूदगी शुरू हुई. इसे भारत में लाने का श्रेय एक भारतीय मुस्लिम सूफी संत बाबा बुदान को जाता है. बुदान हज करने मक्का पहुंचे थे. कहा जाता है कि यमन के मोका शहर में जब चल रहे थे तो उन्होंने लोगों को रास्ते में कुछ पीते हुए और बहस करते हुए देखा. वो बहस सुनने के लिए वहीं रुक गये. उन्होंने उसी समय वो पेय पदार्थ भी लिया और पीने लगे. उन्हें ये पेय पदार्थ बहुत अच्छा लगा. तो उन्होंने इसे भारत ले जाने की ठानी. लेकिन वो उसे लेकर नहीं जा सकते थे. कहा जाता है कि बाबा बुदान ने कॉफी के सात बीजों को अपनी दाढ़ी में छिपा लिया और भारत ले आये. बुदान कर्नाटक के चिक्कामगलुरु जिले के रहने वाले थे. कहा जाता है कि इन सात बीजों को बाबा बुदन ने चंद्रगिरी की पहाड़ियों में उगाया, और यहीं से भारत में काफी का पहला उत्पादन शुरू हुआ. 

अंग्रेंजों ने कॉफी को आगे बढ़ाया

17वीं शताब्दी के आते आते मुगल काल के दौरान भारत के उच्च वर्ग के लोग कॉफी को स्टेटल सिम्बल के रूप में पीते थे. यूरोपीय यात्रियों के किस्सों में इस बात की जिक्र मिलता है कि मुगल काल में शाहजहानाबाद में कई सारे काहवा खाने थे, जहां कॉफी का सेवन किया जाता था. लेकिन फिर मुगलों का पतन शुरू हुआ और अंग्रेजों का दबदबा बढ़ा, इससे धीरे धीरे कॉफी की लोकप्रियता भी कम हो गई, क्योंकि अंग्रेज चाय पानी ज्यादा पसंद करते थे. 17वी शताब्दी की शुरुआत में ईस्ट इंडिया कंपनी और डच ईस्ट इंडिया कंपनी मोचा बंदरगाह से कॉफी की सबसे बड़ी खरीदार थीं. कॉफी से लदे उनके जहाज केप ऑफ गुड होप होते हुए स्वदेश पहुंचते थे या फिर इसे भारत को निर्यात किया जाता था. यमन की कॉफी की बाकी खपत मध्यपूर्व में होती थी.


लेकिन बाद में अंग्रेजों ने भारत में इसकी खेती दक्षिण भारत में शुरू की. 200 साल बाद 19वीं शताब्दी में कॉफी एक बार फिर क्लबों का हिस्सा बन गई. आज भारत दुनिया में कॉफी उत्पादकों की लिस्ट में छठे नंबर पर गिना जाता है. 


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