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भारत-जापान मिलकर बढ़ाएंगे क्लाइमेट टेक स्टार्टअप सहयोग
संयुक्त क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (JCM) के तहत डिकार्बोनाइजेशन और तकनीकी साझेदारी पर जोर
नवनीत सिंह 8 months ago
जापान भारतीय स्टार्टअप्स के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी में है, खासकर क्लाइमेट टेक्नोलॉजी और डिकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में, हाल ही में साइन हुए जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (JCM) पर मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (MoC) के तहत. भारत में जापान के राजदूत ओनो केइइची ने BW बिज़नेसवर्ल्ड से बातचीत में कहा कि JCM फ्रेमवर्क के तहत भारतीय स्टार्टअप्स के लिए जापानी कंपनियों के साथ सहयोग के अवसर मौजूद हैं, जैसे ही इम्प्लीमेंटेशन के नियम तय हो जाएंगे.
“हमने हाल ही में एक बिज़नेस फोरम किया और MoC साइन किया. मुझे उम्मीद है कि दोनों सरकारें इम्प्लीमेंटेशन के नियम तय करेंगी और उसके आधार पर स्टार्टअप्स को भारत और जापान दोनों में NDCs के इम्प्लीमेंटेशन में सहयोग का अच्छा मौका मिलेगा,” ओनो ने कहा.
क्या स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों को जोड़ने के लिए कोई डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म या एक्सेलरेटर बनाया जाएगा, इस पर ओनो ने कहा कि यह “इस फोरम में चर्चा किए जाने वाले अहम विषयों में से एक होगा.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि डिकार्बोनाइजेशन को आगे बढ़ाने में क्लाइमेट फाइनेंस एक अहम तत्व है और जापानी प्राइवेट बैंक पहले से ही क्लीन एनर्जी और ट्रांजिशन प्रोजेक्ट्स में फाइनेंसिंग कर रहे हैं.
पेरिस एग्रीमेंट आर्टिकल 6 इम्प्लीमेंटेशन पार्टनरशिप (A6IP) सेंटर के डायरेक्टर काजुहिसा कोआकुत्सु ने स्पष्ट किया कि भारत और जापान के बीच JCM पर MoC अगस्त को साइन हुआ था. उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों की संयुक्त समिति की बैठक में नियमों को अंतिम रूप देने और कंपनियों के लिए प्रोजेक्ट प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया तय करने पर ध्यान दिया गया.
“एक प्रोजेक्ट इंफॉर्मेशन शीट भी है, जिसमें कंपनियां अपना आइडिया भर सकती हैं और सरकार को कंसेंट के लिए सबमिट कर सकती हैं, ताकि हम असल एक्टिविटी इम्प्लीमेंट करना शुरू कर सकें,” कोआकुत्सु ने समझाया. उन्होंने कहा कि हाल की इस इवेंट में प्राइवेट सेक्टर, NGO और रिसर्च संस्थानों से 300 से अधिक लोग शामिल हुए.
सहयोग को आसान बनाने के लिए जापान ने JCM ग्लोबल मैच प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया है, जो कंपनियों के लिए मैचेर्मेकिंग इनिशिएटिव है. “अगर कोई कंपनी किसी टेक्नोलॉजी या प्रोजेक्ट में रुचि रखती है, तो वह अपनी डिटेल्स डाल सकती है. अगर दूसरी तरफ कोई समान प्रोजेक्ट या टेक्नोलॉजी है, तो मैचेर्मेकिंग हो सकता है और कम्युनिकेशन शुरू हो सकता है,” कोआकुत्सु ने कहा.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि जापानी संस्थान और निवेशक ‘ट्रांसफॉर्मेटिव’ प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने में रुचि रखते हैं और कई क्लाइमेट फोकस्ड फंड्स अवसर तलाश रहे हैं. हालांकि कंपनी स्तर पर निवेश की जानकारी अलग-अलग रहती है, लेकिन कोआकुत्सु ने कहा कि भारत के कई प्रायोरिटी सेक्टर्स में इनिशिएटिव पहले से ही पाइपलाइन में हैं.
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