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राम मंदिर फैक्टर से गर्म हुआ सट्टा बाजार, क्या BJP करेगी 315 सीटें पार?
सट्टेबाजों का कहना है कि कांग्रेस के लिए 60 सीटों का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
भले ही राष्ट्रीय चुनाव केवल तीन महीने दूर हैं, लेकिन भारत में सट्टेबाजी अब जोर पकड़ रही है. हालांकि सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वापसी और प्रचंड जीत की संभावना लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब सट्टा बाजार या फिर कहिये चुनाव पर सट्टेबाजी किए जाने वाले अवैध बाजार में इस बात पर दांव लगाया जा रहा है कि भाजपा और उसकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस पार्टी कितनी सीटें जीतने की संभावना रखती है?
विपक्ष का होगा पत्ता साफ?
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 543 में से 272 सीटों की जरूरत होती है, लेकिन सट्टेबाजों का मानना है कि बीजेपी, NDA (National Democratic Alliance) के बिना ही, सिर्फ अपने दम पर कम से कम 315 सीटें जीत सकती है. सट्टेबाजों का कहना है कि कांग्रेस के लिए 60 सीटों का आंकड़ा पार करना भी मुश्किल होगा. सट्टा लगाने वाले लोग भाजपा के 315 सीटें जीतने और कांग्रेस के 55 सीटें जीतने के लिए 1:1 का अनुपात बता रहे हैं. सट्टा लगाने वाले लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे सीटों का यह अंतर उन घोषणाओं और कदमों पर निर्भर करेगा जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी अगले तीन महीनों तक करते रहेंगे.
सिर्फ 315-320 सीटें ही क्यों?
दुबई स्थित सट्टा बाजार चलाने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि "अकेले राम मंदिर फैक्टर की वजह से ही 2019 की तुलना में इस बार बीजेपी की झोली में 25-30 अतिरिक्त सीटें जुड़ जाएंगी. लगभग चार दशकों से, राम मंदिर बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में एजेंडा के रूप में मौजूद था और इस साल यह पूरा हो रहा है. यह बहुत ही अच्छी बात है. यह देश के लिए गौरव की बात तो है ही साथ ही यह एकमात्र कारक है जो 2024 के राष्ट्रीय चुनावों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करेगा. 300+ सीटें BJP को मिलना तो तय है, लेकिन सट्टेबाज इस तरह से दांव लगाना चाहते हैं कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह बहुत अधिक पैसा न खोएं. इसीलिए 315-320 सीटों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है लेकिन इससे भी अधिकांश सट्टेबाजों की रातों की नींद गायब हो गई है''
मोदी के रथ के आगे कोई नहीं
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या राम मंदिर का उद्घाटन तेल की कीमतों में बड़ी कटौती और ऐसी ही अन्य घोषणाओं के साथ होने की संभावना है. सट्टा बाजार का मानना है कि बजट में किये जाने वाले वादों और मतदान शुरू होने के आखिरी दिन तक देश का मूड बीजेपी के प्रति उत्साहित बना रहेगा. सट्टेबाजों का कहना है कि कांग्रेस के पास मोदी रथ का मुकाबला करने के लिए कोई कथा नहीं है, लेकिन वह अल्पसंख्यक समुदाय और मुख्य रूप से दक्षिण भारत में सहानुभूति रखने वालों के ध्रुवीकरण के कारक पर भरोसा कर रही है. पिछले कुछ सालों में भ्रष्टाचार और पीएम मोदी को अरबपति गौतम अडानी से जोड़ने को लेकर कांग्रेस पार्टी के बयानों ने मतदाताओं को ज्यादा प्रभावित नहीं किया है. जब कांग्रेस ने रसोई गैस की बढ़ती कीमतों की बात की, तो सरकार ने गैस सिलेंडर की कीमत में कटौती कर दी. राष्ट्रीय सुरक्षा, GDP (सकल घरेलु उत्पाद) से लेकर ग्रामीणों के लिए आवास योजनाओं तक, मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में आख्यानों के खेल में जीत हासिल की है.
हाईटेक हुआ सट्टा बाजार
सट्टा बाजार अब हाईटेक हो गया है और सट्टेबाजी अब मोबाइल ऐप्स के जरिए की जाती है, जो भारत के बाहर से संचालित होती है. हवाला या हस्तांतरण के माध्यम से पैसे का आदान-प्रदान होता है. सट्टेबाजों का कहना है कि अगले 3-4 महीनों में सट्टेबाजी का कारोबार 50,000 करोड़ रुपये को पार कर सकता है. सट्टेबाजों को उम्मीद है कि फरवरी के अंत में किसी भी समय चुनाव की घोषणा हो जाएगी. NDA गठबंधन में जहां भाजपा प्रमुख पार्टी है, कांग्रेस I.N.D.I गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें भारत की लगभग सभी अन्य क्षेत्रीय पार्टियां शामिल हैं. सट्टेबाजों का कहना है कि प्रभावी रूप से यह सभी के खिलाफ एक है और यह अकेले ही कहानी तय करता है.
चुनावों का गणित
2019 के चुनावों में भाजपा को 37.36% वोट मिले थे, जो 1989 के आम चुनाव के बाद से किसी राजनीतिक दल द्वारा प्राप्त किया गया सबसे अधिक वोट शेयर था और तब पार्टी ने 303 सीटें जीती थीं. 2019 में कांग्रेस ने केवल 52 सीटें जीतीं और विपक्ष के नेता के पद का दावा करने के लिए आवश्यक 10% सीटें हासिल करने में पार्टी विफल रही. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा, ओडिशा, असम, हिमाचल प्रदेश और उत्तर पूर्व के अधिकांश राज्य, भाजपा के लिए सबसे मजबूत राज्य हो सकते हैं जबकि केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना कांग्रेस के लिए अनुकूल हो सकते हैं.
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