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आखिर समरकंद समिट भारत के लिए क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
इस समिट में पीएम मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग भी पहुंच चुके हैं। दो दिन के समिट पर दुनियाभर की नजर लगी हुई है।
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
उज्बेकिस्तान के शहर समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक आज से शुरू होने जा रही है. दो दिन के इस समिट में भाग लेने के लिए पीएम मोदी वहां पहुंच चुके हैं. इस समिट में पीएम मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी पहुंच चुके हैं. दो दिन के समिट पर दुनियाभर की नजरें लगी हुई हैं। क्योंकि इसमें दक्षिण एशिया के तीन महत्वपूर्ण देश भाग ले रहें हैं, लेकिन इस समिट का भारत के लिए क्या महत्व है, आज हम आपको यही बताने की कोशिश करेंगें.
क्या है शंघाई को-ऑपोरेशन समिट
एससीओ का गठन 2001 में हुआ था. शुरुआती तौर पर इसमें पांच देश जुड़े थे. जिसमें चीन कजाकिस्तान, रशिया, उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान शामिल थे. लेकिन बाद में 2016 में भारत और पाकिस्तान को भी सदस्य बना दिया गया. इस संगठन का उद्देशय आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाना है.
क्या कहते हैं विदेश मामलों के जानकार
विदेश मामलों के जानकार संजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि एससीओ भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भारत इस समिट के माध्यम से इसमें मौजूद 8 देशों में से जो चार प्रमुख देशों में शामिल हैं जिसमें चीन, पाकिस्तान, रूस, और भारत, इसके जरिए विदेश नीति की सक्रियता को बढ़ाना चाहता है. साथ ही 4 मध्य एशियाई देशों का भी सामरिक महत्व है। जिसे भारत गहराई के साथ समझता है। ये मंच है जो अन्य मामलों में भी महत्वपूर्ण है, जिसमें प्रमुख तौर पर आतंकवाद की चर्चा करना चाहूंगा. एससीओ के अंदर एक स्ट्रक्चर है जिसे रिजनल एंटी टेररिस्ट स्ट्रक्चर रैट्स भी कहा जाता है, इसमें भारत अपनी बात रखेगा. आज जब पीएम मोदी इसकी बैठक को संबोधित करेंगे तो आंतकवाद इसका महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। जैसा कि हम जानते हैं कि पाकिस्तान के पीएम भी इस बैठक में शामिल हैं, जहां तक आतंकवाद का संबंध है वो आतंकवाद को अपनी स्टेट पॉलिसी के तौर पर इस्तेमाल करता है. आतंकवादियों को स्ट्रैटिजिक एसेट के रूप में इस्तेमाल करता है. ऐसे में ये मुद्दा भी उठ सकता है.
इस बैठक में यूक्रेन को लेकर भी चर्चा हो सकती है. एससीओ भारत के ट्रेड को भी बढ़ाने के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. एससीओ विश्व की 40 प्रतिशत आबादी और 30 प्रतिशत ट्रेड को कवर करता है. ये दुनिया का सबसे बड़ा रीजनल संगठन है. इसके ऊपर पूरी दुनिया की नजर है. ये बैठक 2019 के बाद कारोना के कारण लंबे अरसे के बाद हो रही है. क्या ये अमेरिका के लिए चैलेंज है इस पर संजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि हमें इसे इस एंगल से नहीं देखना चाहिए, लेकिन हमेशा से ही अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के प्रमुखों में एससीओ हो या ब्रिक्स को इसे लेकर एक कंसर्न रहता है कि ये हमारे खिलाफ बढ़ता एक संगठन है. इस तरह की चर्चाएं अवश्य होती हैं.
वहीं विदेश मामलों के ही अन्य जानकार रवीन्द्र सचदेवा बताते हैं कि भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है कि रूस कमजोर हो रहा है. जितना रूस कमजोर होगा वो उतना चीन की ओर झुकेगा, ये हमारी बहुत बड़ी चिंता है. लेकिन उसी समय में हम रशिया के साथ गैस, ट्रेड और रूबल - रूपी ट्रेड देखें वो मेकेनिज्म बहुत महत्वपूर्ण हैं. अगर आप देखें तो रशिया से वेस्टर्न कंपनियों के बाहर आने के बाद चाइनीज कंपनियां वहां जा रही है जबकि भारतीय कंपनियों को जाना चाहिए, वो ट्रेड के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. जबकि इसका दूसरा एंगल चीन को सिग्नल देने का है. अगर हम चाइना से मिलते तो बात अलग थी लेकिन हम चाइना से नहीं मिल रहे हैं। इसका मतलब ये है कि हम चीन सिग्नल कर रहे हैं कि आपका जो रवैया हमारे प्रति चल रहा है हम उससे खुश नहीं हैं. इस ग्रुप में जितने भी देश हैं वो सेंट्रल एशिया के हैं. ये सभी एंटी वेस्ट ग्रुप में भी आ सकते हैं. इन सब में केवल भारत ही है जो वेस्ट से भी बात करता है. क्या इस संगठन लेकर अमेरिका के लिए खतरा हो सकता है इस पर रवीन्द्र सचदेवा कहते हैं कि ये एक बड़ा संगठन है, अगर उस मायने में देखा जाए तो ये एक बड़ी ताकत हो सकता है, जबकि अगर शांति के मामले में देखा जाए तो उसमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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